show episodes
 
*कहानीनामा( Hindi stories), *स्वकथा(Autobiography) *कवितानामा(Hindi poetry) ,*शायरीनामा(Urdu poetry) ★"The Great" Filmi show (based on Hindi film personalities) मशहूर कलमकारों द्वारा लिखी गयी कहानी, कविता,शायरी का वाचन व संरक्षण ★फिल्मकारों की जीवनगाथा ★स्वास्थ्य संजीवनी
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This podcast presents Hindi poetry, Ghazals, songs, and Bhajans written by me. इस पॉडकास्ट के माध्यम से मैं स्वरचित कवितायेँ, ग़ज़ल, गीत, भजन इत्यादि प्रस्तुत कर रहा हूँ Awards StoryMirror - Narrator of the year 2022, Author of the month (seven times during 2021-22) Kalam Ke Jadugar - Three Times Poet of the Month. Sometimes I also collaborate with other musicians & singers to bring fresh content to my listeners. Always looking for fresh voices. Write to me at HindiPoemsByVivek@gmail.com #Hind ...
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Nayidhara Ekal

Nayi Dhara Radio

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मासिक+
 
साहित्य और रंगकर्म का संगम - नई धारा एकल। इस शृंखला में अभिनय जगत के प्रसिद्ध कलाकार, अपने प्रिय हिन्दी नाटकों और उनमें निभाए गए अपने किरदारों को याद करते हुए प्रस्तुत करते हैं उनके संवाद और उन किरदारों से जुड़े कुछ किस्से। हमारे विशिष्ट अतिथि हैं - लवलीन मिश्रा, सीमा भार्गव पाहवा, सौरभ शुक्ला, राजेंद्र गुप्ता, वीरेंद्र सक्सेना, गोविंद नामदेव, मनोज पाहवा, विपिन शर्मा, हिमानी शिवपुरी और ज़ाकिर हुसैन।
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Pratidin Ek Kavita

Nayi Dhara Radio

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रोज
 
कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
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Shayari Sukun: The Best Hindi Urdu Poetry Shayari Podcast

Shayari Sukun: Best Hindi Urdu Poetry

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साप्ताहिक+
 
हम अक्सर रोज की जिंदगी में सुकून भरे और दिल को तरोताजा रखने वाले पल ढूंढते हैं. शायरी सुकून आपको ऐसे ही पलों की बेहतरीन श्रृंखला से रूबरू करवाता है. हमारी shayarisukun.com वेबसाइट को विजिट करते ही आपकी इस सुकून की तलाश पूरी हो जायेगी. यह एक बेहतरीन और नायाब उर्दू-हिंदी शायरियो (Best Hindi Urdu Poetry Shayari) का संग्रह है. यहाँ आपको ऐसी शायरियां 🎙️ मिलेगी, जो और कही नहीं मिल पायेंगी. हम पूरी दिलो दिमाग से कोशिश करते हैं कि आपको एक से बढ़कर एक शायरियों से नवाजे गए खुशनुमा माहौल का अनुभव करा स ...
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shaam e shayari

Fanindra bhardwaj

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रोज
 
"sham e shayari" is a captivating podcast that takes you on a poetic journey through the rich and expressive world of Hindi literature. With each episode, Fanindra Bhardwaj, a talented poet and voice artist, skillfully weaves together words and emotions to create a truly immersive experience. In this podcast, you'll encounter a wide range of themes, from love and heartbreak to nature and spirituality. Fanindra's poetry beautifully captures the essence of these emotions, allowing listeners to ...
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Khule Aasmaan Mein Kavita

Nayi Dhara Radio

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मासिक
 
यहाँ हम सुनेंगे कविताएं – पेड़ों, पक्षियों, तितलियों, बादलों, नदियों, पहाड़ों और जंगलों पर – इस उम्मीद में कि हम ‘प्रकृति’ और ‘कविता’ दोनों से दोबारा दोस्ती कर सकें। एक हिन्दी कविता और कुछ विचार, हर दूसरे शनिवार... Listening to birds, butterflies, clouds, rivers, mountains, trees, and jungles - through poetry that helps us connect back to nature, both outside and within. A Hindi poem and some reflections, every alternate Saturday...
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तुलसीदास जी का जन्म, आज से लग-भग 490 बरस पहले, 1532 ईसवी में उत्तर प्रदेश के एक गाँव में हुआ और उन्होंने अपने जीवन के अंतिम पल काशी में गुज़ारे। पैदाइश के कुछ वक़्त बाद ही तुलसीदास महाराज की वालिदा का देहांत हो गया, एक अशुभ नक्षत्र में पैदा होने की वजह से उनके पिता उन्हें अशुभ समझने लगे, तुलसीदास जी के जीवन में सैकड़ों परेशानियाँ आईं लेकिन हर परेशानी का रास्ता प्रभु श्री राम की भक्ति पर आकर खत्म हुआ। राम भक्ति की छाँव तले ही तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस और हनुमान चालीसा जैसी नायाब रचनाओं को ...
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Hello Poetry lovers, Here I will Publish classic Hindi poems to enrich your soul. They will take your emotions from love, sadness to the next level. Expect poetry every 3 days. नमस्कार दोस्तों , आपका पोएट्री विथ सिड में स्वागत है. यहाँ पे कविताये सुनेंगे उन कवियों की जिन्हे हम भूलते जा रहे है. Cover art photo provided by Tom Barrett on Unsplash: https://unsplash.com/@wistomsin
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show series
 
टहनियाँ | जयप्रकाश कर्दम काटा जाता है जब भी कोई पेड़ बेजान हो जाती हैं टहनियां बिना कटे ही पेड़ है क्योंकि टहनियां हैं टहनियां हैं क्योंकि पेड़ है अर्थहीन हैं एक दूसरे के बिना पेड़ और टहनियां ठूंठ हो जाता है पेड़ टहनियों के अभाव में टहनियां हैं पेड़ का कुनबा पेड़ ने देखा है अपने कुनबे को बढते हुए टहनियों ने देखा है पेड़ को कटते हुए कटकर गिरने से पह…
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एक अविश्वसनीय सपना - विश्वनाथ प्रसाद तिवारी एक दिन उसने सपना देखा बिना वीसा बिना पासपोर्ट सारी दुनिया में घूम रहा है वह न कोई सरहद, न कोई चेकपोस्ट समुद्रों और पहाड़ों और नदियों और जंगलों से गुज़रते हुए उसने अद्भुत दृश्य देखे... आकाश के, बादलों और रंगों के... अक्षत यौवना प्रकृति उसके सामने थी... निर्भय घूम रहे थे पशु पक्षी। पुरुष स्त्री बच्चे क्या शह…
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रोक सको तो रोको | पूनम शुक्ला उछलेंगी ये लहरें अपनी राह बना लेंगी ये बल खाती सरिताएँ अपनी इच्छाएँ पा लेंगी रोको चाहे जितना भी ये झरने शोर मचाएँगे रोड़े कितने भी डालो कूद के ये आ जाएँगे चाहे ऊँची चट्टानें हों विहंगों का वृंद बसेगा सूखती धरा भले हो पुष्पों का झुंड हँसेगा हो रात घनेरी जितनी रोशनी का पुंज उगेगा रोक सको तो रोको यम भी विस्मित चल देगा डाल…
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घर-बार छोड़कर संन्यास नहीं लूंगा | विनोद कुमार शुक्ल घर-बार छोड़कर संन्यास नहीं लूंगा अपने संन्यास में मैं और भी घरेलू रहूंगा घर में घरेलू और पड़ोस में भी। एक अनजान बस्ती में एक बच्चे ने मुझे देखकर बाबा कहा वह अपनी माँ की गोद में था उसकी माँ की आँखों में ख़ुशी की चमक थी कि उसने मुझे बाबा कहा एक नामालूम सगा।…
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अग्निपथ | हरिवंश राय बच्चन वृक्ष हों भले खड़े, हों घने हों बड़े, एक पत्र छाँह भी, माँग मत, माँग मत, माँग मत, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु स्वेद रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।…
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फ़ागुन का गीत | केदारनाथ सिंह गीतों से भरे दिन फागुन के ये गाए जाने को जी करता! ये बाँधे नहीं बँधते, बाँहें रह जातीं खुली की खुली, ये तोले नहीं तुलते, इस पर ये आँखें तुली की तुली, ये कोयल के बोल उड़ा करते, इन्हें थामे हिया रहता! अनगाए भी ये इतने मीठे इन्हें गाएँ तो क्या गाएँ, ये आते, ठहरते, चले जाते इन्हें पाएँ तो क्या पाएँ ये टेसू में आग लगा जाते, …
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नई धारा एकल के इस एपिसोड में देखिए मशहूर अभिनेता मनोज पाहवा द्वारा मोहन राकेश के नाटक, 'आधे-अधूरे' में से एक अंश। नई धारा एकल श्रृंखला में अभिनय जगत के सितारे, अपने प्रिय हिन्दी नाटकों में से अंश प्रस्तुत करेंगे और साथ ही साझा करेंगे उन नाटकों से जुड़ी अपनी व्यक्तिगत यादें। दिनकर की कृति ‘रश्मिरथी’ से मोहन राकेश के नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ तक और धर्मव…
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सच है, विपत्ति जब आती है | रामधारी सिंह दिनकर सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं। मुख से न कभी उफ कहते हैं, संकट का चरण न गहते हैं, जो आ पड़ता सब सहते हैं, उद्योग-निरत नित रहते हैं, शूलों का मूल नसाने को, बढ़ खुद विपत्ति पर छाने को। है कौ…
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चिट्ठी है किसी दुखी मन की | कुँवर बेचैन बर्तन की यह उठका-पटकी यह बात-बात पर झल्लाना चिट्ठी है किसी दुखी मन की। यह थकी देह पर कर्मभार इसको खाँसी, उसको बुखार जितना वेतन, उतना उधार नन्हें-मुन्नों को गुस्से में हर बार, मारकर पछताना चिट्ठी है किसी दुखी मन की। इतने धंधे! यह क्षीणकाय- ढोती ही रहती विवश हाय खुद ही उलझन, खुद ही उपाय आने पर किसी अतिथि जन के …
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नीड़ का निर्माण | हरिवंश राइ बच्चन नीड़ का निर्माण फिर-फिर, नेह का आह्वान फिर-फिर! वह उठी आँधी कि नभ में छा गया सहसा अँधेरा, धूलि धूसर बादलों ने भूमि को इस भाँति घेरा, रात-सा दिन हो गया, फिर रात आ‌ई और काली, लग रहा था अब न होगा इस निशा का फिर सवेरा, रात के उत्पात-भय से भीत जन-जन, भीत कण-कण किंतु प्राची से उषा की मोहिनी मुस्कान फिर-फिर! नीड़ का निर्…
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गुन गाऊँगा | अरुण कमल गुन गाऊँगा फाग के फगुआ के चैत के पहले दिन के गुन गाऊँगा गुड़ के लाल पुओं और चाशनी में इतराते मालपुओं के गुन गाऊँगा दही में तृप्त उड़द बड़ों और भुने जीरों रोमहास से पुलकित कटहल और गुदाज़ बैंगन के गुन गाऊँगा होली में घर लौटते जन मजूर परिवारों के गुन भाँग की सांद्र पत्तियों और मगही पान के नर्म पत्तों सरौतों सुपारियों के गुन गाऊँगा…
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साहिल और समंदर | सरवर ऐ समंदर क्यों इतना शोर करते हो क्या कोई दर्द अंदर रखते हो यूं हर बार साहिल से तुम्हारा टकराना किसी के रोके जाने के खिलाफ तो नहीं पर मुझको तुम्हारी लहरें याद दिलाती हैं कोशिश से बदल जाते हैं हालात तुमने ढाला है साहिलों को बदला है उनके जबीनों को मुझको ऐसा मालूम पड़ता है कि तुम आकर लेते हो बौसा साहिलों के हज़ार ये मोहब्बत है तुम्हा…
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फ़र्नीचर | अनामिका मैं उनको रोज़ झाड़ती हूँ पर वे ही हैं इस पूरे घर में जो मुझको कभी नहीं झाड़ते! रात को जब सब सो जाते हैं— अपने इन बरफाते पाँवों पर आयोडिन मलती हुई सोचती हूँ मैं— किसी जनम में मेरे प्रेमी रहे होंगे फ़र्नीचर, कठुआ गए होंगे किसी शाप से ये! मैं झाड़ने के बहाने जो छूती हूँ इनको, आँसुओं से या पसीने से लथपथ- इनकी गोदी में छुपाती हूँ सर- एक …
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दुआ | मनमीत नारंग कतरनें प्यार की जो फेंक दीं थी बेकार समझकर चल चुनें तुम और मैं हर टुकड़ा उस नेमत का और बुनें एक रज़ाई छुप जाएं सभी उसमें आज तुम मेरे सीने पे मैं उसके कंधे पर सिर रखकर रो लें ज़रा कुछ हँस दें ज़रा यूँ ही ज़िंदगी गुज़र बसर हो जाएगी शायद यह दुनिया बच जाएगीद्वारा Nayi Dhara Radio
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दही जमाने को, थोड़ा-सा जामन देना | यश मालवीय मन अनमन है, पल भर को अपना मन देना दही जमाने को, थोड़ा-सा जामन देना सिर्फ़ तुम्हारे छू लेने से चाय, चाय हो जाती धूप छलकती दूध सरीखी सुबह गाय हो जाती उमस बढ़ी है, अगर हो सके सावन देना दही जमाने को, थोड़ा-सा जामन देना नहीं बाँटते इस देहरी उस देहरी बैना तोता भी उदास, मन मारे बैठी मैना घर से ग़ायब होता जाता, आँगन द…
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तमाशा | मदन कश्यप सर्कस में शेर से लड़ने की तुलना में बहुत अधिक ताकत और हिम्मत की ज़रूरत होती है जंगल में शेर से लड़ने के लिए जो जिंदगी की पगडंडियों पर इतना भी नहीं चल सका कि सुकून से चार रोटियाँ खा सके वह बड़ी आसानी से आधी रोटी के लिए रस्सी पर चल लेता है। तमाशा हमेशा ही सहज होता है क्योंकि इसमें बनी-बनायी सरल प्रक्रिया में चीजें लगभग पूर्व निर्धार…
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जड़ें | राजेंद्र धोड़पकर हवा में बिल्कुल हवा में उगा पेड़ बिल्कुल हवा में, ज़मीन में नहीं बादलों पर झरते हैं उसके पत्ते लेकिन जड़ों को चाहिए एक आधार और वे किसी दोपहर सड़क पर चलते एक आदमी के शरीर में उतर जाती हैं उसके साथ उसके घर जाती हैं जड़ें और फैलती हैं दीवारों में भी आदमी झरता जाता है दीवारों के पलस्तर-सा जब भी बारिश होती है उसके स्वप्नों में प…
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श्री राम नवमी - (हरिगीतिका छंद) श्री राम नवमी पर्व पावन, राम मंदिर में मना। संसार पूरा राममय है, राम से सब कुछ बना॥ संतों महंतों की हुई है, सत्य सार्थक साधना। स्त्री-पुरुष बच्चे-बड़े सब, मिल करें आराधना॥ नीरज नयन कोदंड कर शर, सूर्य का टीका लगा। मस्तक मुकुट स्वर्णिम सुशोभित, भाग्य भारत का जगा॥ आदर्श का आधार हो तुम, धैर्य का तुम श्रोत हो। चिर काल तक ज…
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संयोग | शहंशाह आलम यह संयोगवश नहीं हुआ कि मैंने पुरानी साइकिल से पुराने शहरों की यात्राएं कीं ख़ानाबदोश उम्मीदों से भरी इस यात्रा में संयोग यह था कि तुम्हारा प्रेम साथ था मेरे तुम्हारे प्रेम ने मुझे अकेलेपन से मुठभेड़ नहीं होने दिया एक संयोग यह भी था कि मेरा शहर जूझ रहा था अकेलेपन की उदासी से तुम्हारे ही इंतज़ार में और मेरे शहर का नाम तुमने खजुराहो…
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मैं जब रोमानिया से बल्गारिया जा रही थी ,रात बहुत ठंडी थी ,पास में अपने कोट के सिवाय कुछ नहीं था ,वही घुटने जोड़ कर ऊपर तान लिया था ,फिर भी जब उसे सर करर और खींचती थी ,तो पैरों में ठिठुरन लगती थी। न जाने कब मुझे नींद आ गयी। लगा ,सारे शरीर में गर्मी आ गयी हैं। बाकी रात खूब गर्माइश में सोती रही ....... नायक को जानती हूँ ,उस दिन से ,जिस दिन उसे साधुओं क…
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वहाँ नहीं मिलूँगी मैं | रेणु कश्यप मैंने लिखा एक-एक करके हर अहसास को काग़ज़ पर और सँभालकर रखा उसे फिर दरअस्ल, छुपाकर मैंने खटखटाया एक दरवाज़ा और भाग गई फिर डर जितने डर उतने निडर नहीं हम छुपते-छुपाते जब आख़िर निकलो जंगल से बाहर जंगल रह जाता है साथ ही आसमान से झूठ बोलो या सच समझ जाना ही है उसे कि दोस्त होते ही हैं ऐसे। मेरे डरों से पार एक दुनिया है तु…
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"sham e shayari" is a captivating podcast that takes you on a poetic journey through the rich and expressive world of Hindi literature. With each episode, Fanindra Bhardwaj, a talented poet and voice artist, skillfully weaves together words and emotions to create a truly immersive experience. In this podcast, you'll encounter a wide range of themes…
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यदि चुने हों शब्द | नंदकिशोर आचार्य जोड़-जोड़ कर एक-एक ईंट ज़रूरत के मुताबिक लोहा, पत्थर, लकड़ी भी रच-पच कर बनाया है इसे। गोखे-झरोखे सब हैं दरवाज़े भी कि आ-जा सकें वे जिन्हें यहाँ रहना था यानी तुम। आते भी हो पर देख-छू कर चले जाते हो और यह तुम्हारी खिलखिलाहट से जिसे गुँजार होना था मक़्बरे-सा चुप है। सोचो, यदि यह मक़्बरा हो भी तो किस का? और ईंटों की …
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धूप | रूपा सिंह धूप!! धधकती, कौंधती, खिलखिलाती अंधेरों को चीरती, रौशन करती। मेरी उम्र भी एक धूप थी अपनी ठण्डी हड्डियों को सेंका करते थे जिसमें तुम! मेरी आत्मा अब भी एक धूप अपनी बूढ़ी हड्डियों को गरमाती हूँ जिसमें। यह धूप उतार दूँगी, अपने बच्चों के सीने में ताकि ठण्डी हड्डियों वाली नस्लें इस जहाँ से ही ख़त्म हो जाएँ।…
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नई धारा एकल के इस एपिसोड में देखिए मशहूर अभिनेत्री लवलीन मिश्रा द्वारा, हज़रत आवारा द्वारा अनुदित मौलियर के नाटक, 'कंजूस' में से एक अंश। नई धारा एकल श्रृंखला में अभिनय जगत के सितारे, अपने प्रिय हिन्दी नाटकों में से अंश प्रस्तुत करेंगे और साथ ही साझा करेंगे उन नाटकों से जुड़ी अपनी व्यक्तिगत यादें। दिनकर की कृति ‘रश्मिरथी’ से मोहन राकेश के नाटक ‘आषाढ़…
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चिड़िया | रामदरश मिश्रा चिड़िया उड़ती हुई कहीं से आयी बहुत देर तक इधर उधर भटकती हुई अपना घोंसला खोजती रही फिर थक कर एक जली हुई डाल पर बैठ गयी और सोचने लगी- आज जंगल में कोई आदमी आया था क्‍या?द्वारा Nayi Dhara Radio
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Podcaste "sham e shayari" is a captivating podcast that takes you on a poetic journey through the rich and expressive world of Hindi literature. With each episode, Fanindra Bhardwaj, a talented poet and voice artist, skillfully weaves together words and emotions to create a truly immersive experience. In this podcast, you'll encounter a wide range …
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उसका चेहरा | राजेश जोशी अचानक गुल हो गयी बत्ती घुप्प अँधेरा हो गया चारों तरफ उसने टटोल कर ढूँढी दियासलाई और एक मोमबत्ती जलाई आधे अँधेरे और आधे उजाले के बीच उभरा उसका चेहरा न जाने कितने दिनों बाद देखा मैंने इस तरह उसका चेहरा जैसे किसी और ग्रह से देखा मैंने पृथ्वी को !द्वारा Nayi Dhara Radio
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"sham e shayari" is a captivating podcast that takes you on a poetic journey through the rich and expressive world of Hindi literature. With each episode, Fanindra Bhardwaj, a talented poet and voice artist, skillfully weaves together words and emotions to create a truly immersive experience. In this podcast, you'll encounter a wide range of themes…
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गोल पत्थर | नरेश सक्सेना नोकें टूटी होंगी एक-एक कर तीखापन ख़त्म हुआ होगा किस-किस से टकराया होगा कितनी-कितनी बार पूरी तरह गोल हो जाने से पहले जब किसी भक्त ने पूजा या बच्चे ने खेल के लिए चुन लिया होगा तो खुश हुआ होगा कि सदमे में डूब गया होगा एक छोटी-सी नोक ही बचाकर रख ली होती किसी आततायी के माथे पर वार के लिए।…
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सांकल | रजनी तिलक चारदीवारी की घुटन घूँघट की ओट सहना ही नारीत्व तो बदलनी चाहिए परिभाषा। परम्पराओं का पर्याय बन चौखट की साँकल है जीवन-सार तो बदलना होगा जीवन-सार।द्वारा Nayi Dhara Radio
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झरबेर | केदारनाथ सिंह प्रचंड धूप में इतने दिनों बाद (कितने दिनों बाद) मैंने ट्रेन की खिड़की से देखे कँटीली झाड़ियों पर पीले-पीले फल ’झरबेर हैं’- मैंने अपनी स्मृति को कुरेदा और कहीं गहरे एक बहुत पुराने काँटे ने फिर मुझे छेदाद्वारा Nayi Dhara Radio
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बचाना | राजेश जोशी एक औरत हथेलियों की ओट में दीये की काँपती लौ को बुझने से बचा रही है एक बहुत बूढ़ी औरत कमज़ोर आवाज़ में गुनगुनाते हुए अपनी छोटी बहू को अपनी माँ से सुना गीत सुना रही है एक बच्चा पानी में गिर पड़े चींटे को एक हरी पत्ती पर उठाने की कोशिश कर रहा है एक आदमी एलबम में अपने परिजनों के फोटो लगाते हुए अपने बेटे को उसके दादा दादी और नाना नानी…
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पास आओ मेरे | नरेंद्र कुमार पास आओ मेरे मुझे समझाओ ज़रा ये जो रोम-रोम में तुम्हारे नफ़रत रमी है तुममें ऐसी क्या कमी है खुद से पूछो ज़रा खुद को बताओ ज़रा व्हाट्सएप की जानकारी टीवी की डिबेट सारी साइड में रखो इसे इंसानियत की बात करें इसमें ऐसा क्या डर है मरहम होती है क्या ज़ख्म से पूछो ज़रा मेरा एक काम कर दो मुझे कहीं से ढूँढ कर वो प्रार्थना दो जिसमें हिंसा…
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"sham e shayari" is a captivating podcast that takes you on a poetic journey through the rich and expressive world of Hindi literature. With each episode, Fanindra Bhardwaj, a talented poet and voice artist, skillfully weaves together words and emotions to create a truly immersive experience. In this podcast, you'll encounter a wide range of themes…
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जीवन नहीं मारा करता है | गोपालदस नीरज छिप छिप अंश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ लुटाने वालों कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है। सपना क्या है, नयन सेज पर सोया हुया आँख का पानी और टूटना है उसको ज्यों जागे कच्ची नींद जवानी गीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालों कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है। माला बिखर गई तो क्या है, खुद ह…
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पिताओं के बारे में कुछ छूटी हुई पंक्तियाँ | कुमार अम्बुज एक दिन लगभग सभी पुरुष पिता हो जाते हैं जो नहीं होते वे भी उम्रदराज़ होकर बच्चों से, युवकों से इस तरह पेश आने लगते हैं जैसे वे ही उनके पिता हों पिताओं की सख़्त आवाज़ घर से बाहर कई जगहों पर कई लोगों के सामने गिड़गिड़ाती पाई जाती है वे ज़माने भर से क्रोध में एक अधूरा वाक्य बुदबुदाते हैं— 'यदि बा…
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सलामत रहें | दीपिका घिल्डियाल सलामत रहें, सबके इंद्रधनुष, जिनके छोर चाहे कभी हाथ ना आएं, फिर भी सबके खाने के बाद, बची रहे एक रोटी, ताकि भूखी ना लौटे, दरवाज़े तक आई बिल्ली और चिड़िया सलामत रहे, माँ की आंखों की रौशनी, क्योंकि माँ ही देख पाती है, सूखे हुए आंसू और बारिश में गीले बाल सलामत रहें, बेटियों के हाथों कढ़े मेज़पोश और बहुओं के हल्दी भरे हाथों की थ…
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ख़ुशआमदीद | गगन गिल दोस्त के इंतज़ार में उसने सारा शहर घूमा शहर का सबसे सुंदर फूल देखा शहर की सबसे शांत सड़क सोची एक क़िताब को छुआ धीरे-धीरे उसे देने के लिए कोई भी चीज़ उसे ख़ुशआमदीद कहने के लिए काफ़ी न थी !द्वारा Nayi Dhara Radio
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