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Shayari Sukun: The Best Hindi Urdu Poetry Shayari Podcast

Shayari Sukun: Best Hindi Urdu Poetry

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साप्ताहिक+
 
हम अक्सर रोज की जिंदगी में सुकून भरे और दिल को तरोताजा रखने वाले पल ढूंढते हैं. शायरी सुकून आपको ऐसे ही पलों की बेहतरीन श्रृंखला से रूबरू करवाता है. हमारी shayarisukun.com वेबसाइट को विजिट करते ही आपकी इस सुकून की तलाश पूरी हो जायेगी. यह एक बेहतरीन और नायाब उर्दू-हिंदी शायरियो (Best Hindi Urdu Poetry Shayari) का संग्रह है. यहाँ आपको ऐसी शायरियां 🎙️ मिलेगी, जो और कही नहीं मिल पायेंगी. हम पूरी दिलो दिमाग से कोशिश करते हैं कि आपको एक से बढ़कर एक शायरियों से नवाजे गए खुशनुमा माहौल का अनुभव करा स ...
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*कहानीनामा( Hindi stories), *स्वकथा(Autobiography) *कवितानामा(Hindi poetry) ,*शायरीनामा(Urdu poetry) ★"The Great" Filmi show (based on Hindi film personalities) मशहूर कलमकारों द्वारा लिखी गयी कहानी, कविता,शायरी का वाचन व संरक्षण ★फिल्मकारों की जीवनगाथा ★स्वास्थ्य संजीवनी
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Nayidhara Ekal

Nayi Dhara Radio

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रोज+
 
साहित्य और रंगकर्म का संगम - नई धारा एकल। इस शृंखला में अभिनय जगत के प्रसिद्ध कलाकार, अपने प्रिय हिन्दी नाटकों और उनमें निभाए गए अपने किरदारों को याद करते हुए प्रस्तुत करते हैं उनके संवाद और उन किरदारों से जुड़े कुछ किस्से। हमारे विशिष्ट अतिथि हैं - लवलीन मिश्रा, सीमा भार्गव पाहवा, सौरभ शुक्ला, राजेंद्र गुप्ता, वीरेंद्र सक्सेना, गोविंद नामदेव, मनोज पाहवा, विपिन शर्मा, हिमानी शिवपुरी और ज़ाकिर हुसैन।
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कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
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Here I recite Hindi poems written by me and some of my favorite, all-time classics. इस पॉडकास्ट के माध्यम से मैं स्वरचित रचनाएँ और अपने प्रिय कवियों की कालजयी कवितायेँ प्रस्तुत कर रहा हूँ Three times "Author Of The Month" on StoryMirror in 2021. Open to collaborating with music composers and singers. Write to me on HindiPoemsByVivek@gmail.com #Hindi #Poetry #Shayri #Kavita #HindiPoetry #Ghazal
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BHARATVANI... Kavita Sings INDIA

Kavita Sings India भारतवाणी

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साप्ताहिक
 
BHARATVAANI...KAVITA SINGS INDIA I Sing.. I Write.. I Chant.. I Recite.. I'm here to Tell Tales of my glorious motherland INDIA, Tales of our rich cultural, spiritual heritage, ancient Vedic history, literature and epic poetry. My podcasts will include Bharat Bharti by Maithilisharan Gupta, Rashmirathi and Parashuram ki Prateeksha by Ramdhari Singh Dinkar, Kamayani by Jaishankar Prasad, Madhushala by Harivanshrai Bachchan, Ramcharitmanas by Tulsidas, Radheshyam Ramayan, Valmiki Ramayan, Soun ...
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Khule Aasmaan Mein Kavita

Nayi Dhara Radio

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मासिक
 
यहाँ हम सुनेंगे कविताएं – पेड़ों, पक्षियों, तितलियों, बादलों, नदियों, पहाड़ों और जंगलों पर – इस उम्मीद में कि हम ‘प्रकृति’ और ‘कविता’ दोनों से दोबारा दोस्ती कर सकें। एक हिन्दी कविता और कुछ विचार, हर दूसरे शनिवार... Listening to birds, butterflies, clouds, rivers, mountains, trees, and jungles - through poetry that helps us connect back to nature, both outside and within. A Hindi poem and some reflections, every alternate Saturday...
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ये उलझने भी अब अज़ीब सी लग रही है बगैर तेरे ये शहर भी रंगहीन सी लग रही है वैसे तो दूरियाँ भी हैं बहुत ... हमारे दरमियाँ मेरी ख़ामोशियों को समझने वाली बस तेरी कमी सी लग रही है.. मंजर जो दिख रहा अब फिज़ाओं में वक़्त रद्दी के भाव में बिक रहा बाजारों में... रब ने तुम्हें सजाया है सितारों से.. यूँ ही नहीं मिले हो तुम मुझे... ढूँढा है मैंने तुझे लाखों हज़ारों में..
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Gita , krishna and success stories , ekadashi, janmashtami. "समय ⏲️को भी समय⏰ लगता है, समय ⏱️ बदलने में। इसलिए अपनेआप को समय दें,इस आपके ही चैनल के माध्यम से।" "श्रीमद्भगवद्गीता" के वजह से आपके जीवन में सफलता आए और यह चैनल उसका हिस्सा बनें इसमें मेरा सौभाग्य है। आपकी सफलता के लिए मंगल कामना . Krishna janm poetry https://hubhopper.com/episode/poetry-of-krishna-janmashtami-1630285171
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Hi there beautiful! In my podcast, I bring you topics that are close to women's heart. Using research and storytelling (and poetry), I shed light on issues that are often ignored by the society, such as contribution of full time mothers, grey hair and society ki soch, challenges faced by working mothers. I hope that you will find your story reflected in my podcasts. I also have a weekly news (samachar) brief where you can catch up with the latest from the world. So join me on a new journey e ...
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FM Countdown

Ashutosh Chauhan

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हेलो दोस्तों मैं हूं आशुतोष चौहान शायरियां,कहानियां, कविताएं सुनाता हूं | FM Countdown में आपका स्वागत है आपको हम हर एक कहानियां, कविताओं के साथ मिलते रहेंगे | कहानियां, कविताएं कैसी लग रही हैं मुझको जरूर बताएं मुझ तक अपनी बात या अपनी कहानियों को शेयर करने के लिए, Hello friends, I am Ashutosh Chauhan, I tell poetry, stories, poems. Welcome to FM Countdown, we will keep meeting you with every single stories, poems. stories, poems Feel free to tell me to share your point or your stories to me✍ ...
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तुलसीदास जी का जन्म, आज से लग-भग 490 बरस पहले, 1532 ईसवी में उत्तर प्रदेश के एक गाँव में हुआ और उन्होंने अपने जीवन के अंतिम पल काशी में गुज़ारे। पैदाइश के कुछ वक़्त बाद ही तुलसीदास महाराज की वालिदा का देहांत हो गया, एक अशुभ नक्षत्र में पैदा होने की वजह से उनके पिता उन्हें अशुभ समझने लगे, तुलसीदास जी के जीवन में सैकड़ों परेशानियाँ आईं लेकिन हर परेशानी का रास्ता प्रभु श्री राम की भक्ति पर आकर खत्म हुआ। राम भक्ति की छाँव तले ही तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस और हनुमान चालीसा जैसी नायाब रचनाओं को ...
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Yakshi Yash Podcast | Teri Dosti

Yakshi Yash Podcast

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मासिक+
 
Become a Paid Subscriber: https://anchor.fm/yakshi-yash-podcast/subscribe Yakshi Yash Podcast | Teri Dosti Follow me on Instagram https://www.instagram.com/yakshi_yash/ #arzooterihai #yakshiyash #teridosti #loveable #punjabisong #podcast #yakshiyash #yakshi #yash #love #poems #poetry #poetrycommunity #inspirationalquotes #poetsofinstagram #writersofinstagram #wordsoftheday #forgiveness #quotes #writerscommunity #poemsofinstagram #poets #writers #poetryofinstagram #writingcommunity #w Support ...
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Explore the unexpected twists and turns of fate through heartfelt shayaris in our 'Ittefaq Shayari' episode. Join us as we unravel the mysteries of life, love, and destiny through the power of poetry. Voice-Over: Madhuri Pundir Website post link: Ittefaq Shayari Love Story Podcast: Heart Tales : Love Stories in Hindi For more love stories: Love Sto…
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लोकतंत्र से उम्मीद | मयंक असवाल एक देश की संसद को कीचड़ के बीचों बीच होना चाहिए ताकि अपने हर अभिभाषण के बाद संसद से निकलते ही एक राजनेता को पुल बनाना याद रहे। एक लोकतांत्रिक कविता को गाँव, मोहल्ले और शहर के हर चौराहे पर होना चाहिए ताकि जनता के बीच आजादी और तानाशाही का अंतर स्पष्ट रहें। एक लेखक को प्रतिपक्ष की कविता लिखने की समझ होनी चाहिए ताकि सिर्…
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बड़ा टूट कर दिल लगाया है हमने जुदाई को हमदम बनाया है हमने तेरा अक्स आँखों में हमने छिपाया तभी तो न आँसू भी हमने बहाए तेरा नूर दिल में अभी तक है रोशन 'अक़ीदत से तुझको इबादत बनाकर लबों पर ग़ज़ल सा सजाया है हमने.. बड़ा टूट कर दिल लगाया है हमने सबब आशिक़ी का भला क्या बतायें ये दिल की लगी है तो बस दिल ही जाने न सोचा न समझा मोहब्बत से पहले सुकूं चैन अपना…
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चुप की साज़िश | अमृता प्रीतम रात ऊँघ रही है... किसी ने इनसान की छाती में सेंध लगायी है हर चोरी से भयानक यह सपनों की चोरी है। चोरों के निशान - हर देश के हर शहर की हर सड़क पर बैठे हैं पर कोई आँख देखती नहीं, न चौंकती है। सिर्फ़ एक कुत्ते की तरह एक जंजीर से बंधी किसी वक़्त किसी की कोई नज़्म भौंकती है।द्वारा Nayi Dhara Radio
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कविताएं | नरेश सक्सेना जैसे चिड़ियों की उड़ान में शामिल होते हैं पेड़ क्या कविताएँ होंगी मुसीबत में हमारे साथ? जैसे युद्ध में काम आए सैनिक की वर्दी और शस्त्रों के साथ खून में डूबी मिलती है उसके बच्चे की तस्वीर क्या कोई पंक्ति डूबेगी खून में? जैसे चिड़ियों की उड़ान में शामिल होते हैं पेड़ मुसीबत के वक्त कौन सी कविताएँ होंगी हमारे साथ लड़ाई के लिए उठ…
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गायत्री | कुशाग्र अद्वैत तुमसे कभी मिला नहीं कभी बातचीत नहीं हुई कहने को कह सकते हैं तुम्हारे बारे में कुछ नहीं जानता ऐसा भी नहीं कि एकदम नहीं जानता ख़बर है कि इस नगर में नई आई हो इधर एक कामचलाऊ कमरा ढूँढ़ने में व्यस्त रही और रोज़गार की दुश्चिंताएँ कुतरती रहीं तुमको रात के इस पहर तुम्हारे नाम कविता लिखने बैठ जाऊँ ऐसी हिमाक़त करने जितना तो शायद नहीं जान…
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हिंदी सी माँ | अजेय जुगरान जब पर्दे खोलने पर ठंड की नर्म धूप पलंग तक आ गई तो बड़ा भाई गेट पर अटका हिंदी अख़बार ले आया माँ के लिए। तेज़ी से वर्तमान भूल रही माँ अब रज़ाई के भीतर ही बैठ तीन तकियों पर टिका पीठ होने लगी तैयार उसे पढ़ने को। सर पर पल्लू माथे पर बिंदी हृदय में भाषा मन में जिज्ञासा हाथ में हिंदी अख़बार और उसे पढ़ने को भूली ऐनक ढूँढती मेरी मा…
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Soundaryalahari Shlok 78_स्थिरो गङ्गा वर्तः स्तनमुकुल-रोमावलि-लता_Adi Shankaracharya Tantragranth_KavitaSingsIndiaस्थिरो गङ्गा वर्तः स्तनमुकुल-रोमावलि-लताकलावालं कुण्डं कुसुमशर तेजो-हुतभुजः ।रते-र्लीलागारं किमपि तव नाभिर्गिरिसुतेबेलद्वारं सिद्धे-र्गिरिशनयनानां विजयते ॥ 78 ॥--- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/kavita-…
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अबकी अगर लौटा तो | कुँवर नारायण अबकी अगर लौटा तो बृहत्तर लौटूंगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछे नहीं कमर में बाँधे लोहे की पूँछें नहीं जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को तरेर कर न देखूँगा उन्हें भूखी शेर-आँखों से अबकी अगर लौटा तो मनुष्यतर लौटूंगा घर से निकलते सड़कों पर चलते बसों पर चढ़ते ट्रेनें पकड़ते जगह-बेजगह कुचला पड़ा पिद्दी-सा जानवर नहीं अगर बचा रहा त…
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Experience the beauty of life through the art of Shayari on Zindagi. This poetic episode explores the essence of existence, capturing its joys, sorrows, and the myriad emotions that make life a profound journey. Tune in for a soul-stirring exploration of life's poetic expressions. Voice-Over: Vanshika Navlani Website post link: https://shayarisukun…
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हारे हुए बुद्धिजीवी का वक्तव्य | सत्यम तिवारी हारे हुए बुद्धि जीवी का वक्तव्य मैं माफ़ी माँगता हूँ जैसे हिम्मत माँगता हूँ मेरे कंधे पर बेलगाम वितृष्णाएँ मेरा चेहरा हारे हुए राजा का रनिवास में जाते हुए मेरी मुद्रा भाड़ में जाते मुल्क की नाव जले सैनिक का मेरा नैराश्य मैं अपना हिस्सा सिर्फ़ इसलिए नहीं छोडूँगा कि संतोष परम सुख है या मृत्यु में ही मुक्त…
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वापसी | केदारनाथ सिंह आज उस पक्षी को फिर देखा जिसे पिछले साल देखा था लगभग इन्हीं दिनों इसी शहर में क्या नाम है उसका खंजन टिटिहिरी, नीलकंठ मुझे कुछ भी याद नहीं मैं कितनी आसानी से भूलता जा रहा हूँ पक्षियों के नाम मुझे सोचकर डर लगा आख़िर क्या नाम है उसका मैं खड़ा-खड़ा सोचता रहा और सिर खुजलाता रहा और यह मेरे शहर में एक छोटे-से पक्षी के लौट आने का विस्फ…
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(अ)विकल्प | किंशुक गुप्ता तुम्हारी महत्वकांक्षाओं से माँ चटक गई है मेरी रीढ़ की हड्डी जिस लहज़े से तुमने पिता सुनाया था फ़रमान कि रेप में लड़की की गलती ज़रूर होगी मैं समझ गया था मेरे धुकधुकाते दिल को किसी भी दिन घोषित कर दोगे टाइम बम मेरे आकाश के सभी नक्षत्र अनाथ होते जा रहे हैं चीटियों की बेतरतीब लकीरों से काली पड़ रही है सफेद पक्षी की देह चोंच के हर…
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नट | राजेश जोशी दीमकें जगह-जगह से खा चुकी हैं तुम्हारे बाँसों को भूख खा चुकी है तुम्हारा सारा बदन क़दमों को साधकर चलते हो जिस रस्सी पर इस छोर से उस छोर टूट चुके हैं उसके रेशे, जर्जर हो चुकी है वो रस्सी जब-जब शुरू करते हो तुम अपना खेल कहीं बहुत क़रीब से आती है यम के भैंसे के खुरों की आवाज़ कहीं बहुत पास सुनाई पड़ती हैं उसके गले में लटकी घंटियाँ। नट!…
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Soundaryalahari Shlok 77_यदेतत्कालिन्दी-तनुतर-तरङ्गाकृति शिवे_Adi Shankaracharya Tantragranth_KavitaSingsIndiaयदेतत्कालिन्दी-तनुतर-तरङ्गाकृति शिवेकृशे मध्ये किञ्चिज्जननि तव यद्भाति सुधियाम् ।विमर्दा-दन्योन्यं कुचकलशयो-रन्तरगतंतनूभूतं व्योम प्रविशदिव नाभिं कुहरिणीम् ॥ 77 ॥--- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/kavita-si…
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बसंत आया | केदारनाथ अग्रवाल बसंत आया : पलास के बूढ़े वृक्षों ने टेसू की लाल मौर सिर पर धर ली! विकराल वनखंडी लजवंती दुलहिन बन गई, फूलों के आभूषण पहन आकर्षक बन गई। अनंग के धनु-गुण के भौरे गुनगुनाने लगे, समीर की तितिलियों के पंख गुदगुदाने लगे। आम के अंग बौरों की सुगंध से महक उठे, मंगल-गान के सब गायक पखेरू चहक उठे। विकराल : भयंकर, भयानक वनखंडी: वन का ए…
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नई धारा एकल के इस एपिसोड में देखिए जानी मानी अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी द्वारा कृष्णा सोबती के उपन्यास ‘मित्रो मरजानी’ की नाट्य प्रस्तुति में से एक अंश। नई धारा एकल श्रृंखला में अभिनय जगत के सितारे, अपने प्रिय हिन्दी नाटकों में से अंश प्रस्तुत करेंगे और साथ ही साझा करेंगे उन नाटकों से जुड़ी अपनी व्यक्तिगत यादें। दिनकर की कृति ‘रश्मिरथी’ से मोहन राकेश…
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मेरी यह कविता "प्रतिशोध" पुलवामा के वीर बलिदानियों और भारतीय वायु सेना के पराक्रमी योद्धाओं को समर्पित हैचलो फिर याद करते हैं कहानी उन जवानों की।बने आँसू के दरिया जो, लहू के उन निशानों की॥......नमन चालीस वीरों को, यही संकल्प अपना है।बचे कोई न आतंकी, यही हम सब का सपना है॥The full Poem is available for your listening.You can write to me on HindiPoems…
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तितलियों की भाषा | मयंक असवाल यदि मुझे तितलियों कि भाषा आती मैं उनसे कहता तुम्हारी पीठ पर जाकर बैठ जाएं बिखेर दें अपने पंखों के रंग जहाँ जहाँ मेरे चुम्बन की स्मृतियाँ शेष बची हैं ताकि वो जगह इस जीवन के अंत तक महफूज रहे। महफूज़ रहे, वो हर एक कविता जिन्होंने अपनी यात्राएँ तुम्हारी पीठ से होकर की जिनकी उत्पत्ति तुमसे हुई और अंत तुम्हारे प्रेम के साथ य…
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लोग कहते है | ममता कालिया लोग कहते हैं मैं अपना ग़ुस्सा कम करूँ समझदार औरतों की तरह सहूँ और चुप रहूँ। ग़ुस्सा कैसे कम किया जाता है? क्या यह चाट के ऊपर पड़ने वाला मसाला है या रेडियो का बटन? जिसे कभी भी कर दो ज़्यादा या कम। यह तो मेरे अन्दर की आग है। एक खौलता कढ़ाह, मेरा दिमाग़ है। मैं एक दहका हुआ कोयला जिस पर जिन्होंने ईंधन डाला है और तेल, फिर हवा भी क…
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घोर अंधकार है | डॉ. श्यौराज सिंह 'बेचैन' घोर अन्धकार है बड़ी उदास रात है न मेल है न प्यार है। जलाओ दीप साथियो कि घोर अन्धकार है। सिसक रहा है चाँद अब तड़प रही है चाँदनी। गली-गली दरिद्रता सुना रही है रागनी। ज़िन्दगी गरीब की अमीर का शिकार है। जलाओ दीप.... कहाँ स्वतन्त्रता, कहाँ समाजवाद की लहर देश तेरी धमनियों में भर दिया गया है ज़हर कली-कली उदास बागवा…
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Discover the poetic world of 'Paiso Par Shayari' (Poetry on Money) in our latest podcast episode. Immerse yourself in the lyrical verses that explore the intricate relationship between wealth, aspirations, and human emotions. From reflections on materialism to musings on financial freedom, tune in for a soulful journey through the realm of money-in…
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ये चेतावनी है | विनोद कुमार शुक्ल यह चेतावनी है कि एक छोटा बच्चा है यह चेतावनी है कि चार फूल खिले हैं यह चेतावनी है कि खुशी है और घड़े में भरा हुआ पानी पीने के लायक है, हवा में साँस ली जा सकती है। यह चेतावनी है कि दुनिया है बची दुनिया में मैं बचा हुआ यह चेतावनी है मैं बचा हुआ हूँ किसी होने वाले युद्ध से जीवित बच निकलकर मैं अपनी अहमियत से मरना चाहता…
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कितना लंबा होगा झरना | गुलज़ार कितना लंबा होगा झरना सारा दिन कोहसार पकड़ के नीचे उतरता रहता है फिर भी ख़त्म नहीं होता...! सारा दिन ही बादलों में, ये वादी चलती रहती है न रुकती है, न थमती है बारिश का बर्बत भी बजता रहता है लंबी लंबी हवा की उंगलियाँ थकतीं नहीं जंगल में आवाज़ नदी की बोलते बोलते बैठ गई है भारी लगती है आवाज़ नदी की!! कोहसार - पर्वतीय शृंखला…
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Soundaryalahari Shlok 76_हरक्रोध-ज्वालावलिभि-रवलीढेन वपुषा_Adi Shankaracharya Tantragranth_KavitaSingsIndiaहरक्रोध-ज्वालावलिभि-रवलीढेन वपुषागभीरे ते नाभीसरसि कृतसङो मनसिजः ।समुत्तस्थौ तस्मा-दचलतनये धूमलतिकाजनस्तां जानीते तव जननि रोमावलिरिति ॥ 76 ॥--- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/kavita-sings-india-u092du/message…
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बड़ा बेटा | किंशुक गुप्ता पिता हृदयाघात से ऐसे गए जैसे साबुन की घिसी हुई टिकिया हाथ से छिटक कर गिर जाती है नाली में या पत्थर लगने से अचानक चली जाती है मोबाइल की रोशनी अचानक मैं बड़ा हो गया अनिद्रा के शिकार मेरे पिता को न बक्शी गई गद्दे की नर्माई या कंबल की गरमाई पटक दिया गया कमरे के बाहर जैसे बिल्ली के लिए कसोरे में छोड़ दिया जाता है दूध पूरी रात म…
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Embark on a poetic exploration of the 'Matlabi Duniya' (selfish world) with our latest Shayari episode. Unveil the harsh realities and complexities of life as our verses delve into the intricacies of a selfish world. Let the words resonate with you as we navigate through the layers of relationships, ambitions, and the pursuit of personal gain. Join…
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शामिल होता हूँ | मलय मैं चाँद की तरह रात के माथे पर चिपका नहीं हूँ, ज़मीन में दबा हुआ गीला हूँ गरम हूँ फटता हूँ अपने अंदर अंकुर की उठती ललक को महसूसता देखने और रचने के सुख में थरथराते पानी में उगते सूर्य की तरह सड़क पर निकला हूँ पूरे आकाश पर नज़र रखे, भाषा की सुबह मेरे रोम-रोम में हरी दूब की तरह हज़ार-हज़ार आँखों से खुली है ज़मीन में दबा हुआ गीला ह…
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इन सर्दियों में | मंगलेश डबराल पिछली सर्दियाँ बहुत कठिन थीं उन्हें याद करने पर मैं इन सर्दियों में भी सिहरता हूँ हालाँकि इस बार दिन उतने कठोर नहीं पिछली सर्दियों में मेरी माँ चली गई थी मुझसे एक प्रेमपत्र खो गया था एक नौकरी छूट गई थी रातों को पता नहीं कहाँ-कहाँ भटकता रहा कहाँ-कहाँ करता रहा टेलीफ़ोन पिछली सर्दियों में मेरी ही चीजें गिरती थीं मुझ पर इ…
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आत्महत्या | शाश्वत उपाध्याय सात आसमानों के पार आठवें आसमान पर जहाँ आकर चाँद रुक जाता है सूरज की रौशनी पर टूटे सपनों के किरचें चमकते हैं दिन और रात की परिभाषायें रद्द हो जाती हैं कि आत्महत्या ऊपर उठती दुनिया की सबसे आखिरी मंज़िल है प्यार के भी बाद किया जाने वाला सबसे तिलिस्मी काम। कोई है जिसके पास काफी कुछ है सुबह है उम्मीद से जगमगाई हुई शाम है चाँदन…
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Indulge in a poetic journey of endurance and resilience with our latest Bardasht Shayari episode. Immerse yourself in soul-stirring verses that capture the essence of enduring pain, facing challenges, and finding strength within. Let the eloquence of our Shayari touch your heart and resonate with the courage to withstand life's trials. Tune in now …
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अपने बजाय | कुँवर नारायण रफ़्तार से जीते दृश्यों की लीलाप्रद दूरी को लाँघते हुए : या एक ही कमरे में उड़ते-टूटते लथपथ दीवारों के बीच अपने को रोक कर सोचता जब तेज़ से तेज़तर के बीच समय में किसी दुनियादार आदमी की दुनिया से हटाकर ध्यान किसी ध्यान देने वाली बात को, तब ज़रूरी लगता है ज़िंदा रखना उस नैतिक अकेलेपन को जिसमें बंद होकर प्रार्थना की जाती है या …
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बन्द कमरे में | प्रभा खेतान बन्द कमरे में मेरी सब चीज़ें अपना परिचय खोने लगती हैं दीवारों के रंग धूमिल नीले पर्दे फीके छत पर घूमता पंखा गतिहीन। तब मैं निकल पड़ती हूँ—बाहर, फुटपाथ पर मूँगफली बेचनेवाला परिचय की मुस्कान देता है और सामने पानवाले की दुकान पर घरवाली का हाल पूछना कहीं अधिक अपना लगता है। चौराहों पर भीड़ के साथ रास्ता पार करना मुझे अकेला नही…
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आत्मस्वीकार | गौरव सिंह जो अपराध मैंने किये, वो जीवन जीने की न्यूनतम ज़रूरत की तरह लगे! मैंने चोर निगाहों से स्त्रियों के वक्ष देखे और कई बार एक लड़की का हृदय ना समझ सकने की शर्म के साथ सोया मुझे परिजनों की मौत पर रुलाई नहीं फूटी और कई दफ़े चिड़ियों की चोट पर फफककर रोया मैं अपने लोगों के बीच एक लम्बी ऊब के साथ रहा और चाय बेचती एक औरत का सारा दुःख जान ल…
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Soundaryalahari Shlok 75_तव स्तन्यं मन्ये धरणिधरकन्ये हृदयतः_Adi Shankaracharya Tantragranth_KavitaSingsIndiaतव स्तन्यं मन्ये धरणिधरकन्ये हृदयतःपयः पारावारः परिवहति सारस्वतमिव ।दयावत्या दत्तं द्रविडशिशु-रास्वाद्य तव यत्कवीनां प्रौढाना मजनि कमनीयः कवयिता ॥ 75 ॥--- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/kavita-sings-india-u0…
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"Experience the euphoria of triumph with our latest podcast episode, featuring soul-stirring Shayari on Jeet (Victory). 🏆 Immerse yourself in the rhythmic verses that celebrate the sweet taste of success and the resilience that paves the way to triumph. Join us as we explore the poetic nuances of victory, unraveling emotions and stories of overcomi…
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चट्टान को तोड़ो वह सुंदर हो जाएगी | केदारनाथ सिंह चट्टान को तोड़ो वह सुंदर हो जाएगी उसे और तोड़ो वह और, और सुंदर होती जाएगी अब उसे उठाओ रख लो कंधे पर ले जाओ किसी शहर या क़स्बे में डाल दो किसी चौराहे पर तेज़ धूप में तपने दो उसे जब बच्चे आएँगे उसमें अपने चेहरे तलाश करेंगे अब उसे फिर से उठाओ अबकी ले जाओ किसी नदी या समुद्र के किनारे छोड़ दो पानी में उस…
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अचानक नहीं गई माँ | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी अचानक नहीं गई माँ जैसे चला जाता है टोंटी का पानी या तानाशाह का सिंहासन थोड़ा-थोड़ा रोज गई वह जैसे जाती है कलम से स्याही जैसे घिसता है शब्द से अर्थ सुकवा और षटमचिया से नापे थे उसने समय के सत्तर वर्ष जीवन को कुतरती धीरे-धीरे गिलहरी-सी चढ़ती-उतरती काल वृक्ष पर गीली-सूखी लकड़ी-सी चूल्हे की धुआँ देती सुलगती जलत…
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सच छूछा होता है।- अमिताव कुमार महात्मा गाँधी की आत्मकथा में मौसम का कहीं ज़िक्र नहीं, लंदन की किसी ईमारत या सड़क के बारे में कोई बयान नहीं, किसी कमरे की, कभी एकत्रित भीड़ या यातायात के किसी साधन की कहीं कोई चर्चा नहीं– यह वी. एस. नायपॉल की आलोचना है। लेकिन मौसम तो गांधीजी के अंदर था! तूफान से जूझती एक अडिग आत्मा– नैतिकता की पतली पगडण्डी पर ठोकर खात…
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"Dive into the depths of love and emotion with our latest podcast episode featuring enchanting Mohabbat Shayari (Love Poetry). 🌹 Let the rhythmic verses and soul-stirring words captivate your heart as we explore the myriad facets of love through the art of poetry. Join us for an immersive experience that transcends time and culture, celebrating the…
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गाँव गया था, गाँव से भागा | कैलाश गौतम गाँव गया था गाँव से भागा। रामराज का हाल देखकर पंचायत की चाल देखकर आँगन में दीवाल देखकर सिर पर आती डाल देखकर नदी का पानी लाल देखकर और आँख में बाल देखकर गाँव गया था गाँव से भागा। गाँव गया था गाँव से भागा। सरकारी स्कीम देखकर बालू में से क्रीम देखकर देह बनाती टीम देखकर हवा में उड़ता भीम देखकर सौ-सौ नीम हकीम देखकर …
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Soundaryalahari Shlok 74_वहत्यम्ब स्त्म्बेरम-दनुज-कुम्भप्रकृतिभिः_Adi Shankaracharya Tantragranth_KavitaSingsIndiaवहत्यम्ब स्त्म्बेरम-दनुज-कुम्भप्रकृतिभिःसमारब्धां मुक्तामणिभिरमलां हारलतिकाम् ।कुचाभोगो बिम्बाधर-रुचिभि-रन्तः शबलितांप्रताप-व्यामिश्रां पुरदमयितुः कीर्तिमिव ते ॥ 74 ॥--- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/k…
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कवि की आत्महत्या | देवांश एकांत अभिनेता अभिनय करते-करते मृत्यु का मंचन करने लगता है आप उन्मत्त होते हैं अभिनय देख पीटना चाहते हैं तालियाँ मगर इस बार वह नही उठता क्योंकि जीवन के रंगमंच में एक ही ‘कट-इट’ होता है कोई हँसते-हँसाते शहर के पुल से छलाँग लगा देता है और तब पिता के साथ नवका विहार में आया लड़का जान पाता है पानी की सतह पर मछलियाँ ही नहीं आदमी …
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ख़ुदाओं से कह दो | किश्वर नाहीद जिस दिन मुझे मौत आए उस दिन बारिश की वो झड़ी लगे जिसे थमना न आता हो, लोग बारिश और आँसुओं में तमीज़ न कर सकें जिस दिन मुझे मौत आए इतने फूल ज़मीन पर खिलें कि किसी और चीज़ पर नज़र न ठहर सके, चराग़ों की लवें दिए छोड़कर मेरे साथ-साथ चलें बातें करती हुई मुस्कुराती हुई जिस दिन मुझे मौत आए उस दिन सारे घोंसलों में सारे परिंदों…
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पुष्प की अभिलाषा - माखनलाल चतुर्वेदी चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ। चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ॥ चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊँ। चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूँ, भाग्य पर इठलाऊँ॥ मुझे तोड़ लेना वनमाली। उस पथ में देना तुम फेंक॥ मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने। जिस पथ जावें वीर अनेक॥…
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"Unlock the spirit of patriotism with our special Republic Day Shayari episode! 🇮🇳 Immerse yourself in the poetic expressions of love for the nation as we celebrate the essence of freedom, unity, and pride. Join us on a poetic journey that encapsulates the soul of Republic Day, weaving together verses that resonate with the heartbeat of our great n…
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