Nayi Dhara Radio द्वारा प्रदान की गई सामग्री. एपिसोड, ग्राफिक्स और पॉडकास्ट विवरण सहित सभी पॉडकास्ट सामग्री Nayi Dhara Radio या उनके पॉडकास्ट प्लेटफ़ॉर्म पार्टनर द्वारा सीधे अपलोड और प्रदान की जाती है। यदि आपको लगता है कि कोई आपकी अनुमति के बिना आपके कॉपीराइट किए गए कार्य का उपयोग कर रहा है, तो आप यहां बताई गई प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं https://hi.player.fm/legal
Player FM - पॉडकास्ट ऐप
Player FM ऐप के साथ ऑफ़लाइन जाएं!

Geet | Gopaldas Neeraj

3:36
 
साझा करें
 

Manage episode 381726793 series 3463571
Nayi Dhara Radio द्वारा प्रदान की गई सामग्री. एपिसोड, ग्राफिक्स और पॉडकास्ट विवरण सहित सभी पॉडकास्ट सामग्री Nayi Dhara Radio या उनके पॉडकास्ट प्लेटफ़ॉर्म पार्टनर द्वारा सीधे अपलोड और प्रदान की जाती है। यदि आपको लगता है कि कोई आपकी अनुमति के बिना आपके कॉपीराइट किए गए कार्य का उपयोग कर रहा है, तो आप यहां बताई गई प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं https://hi.player.fm/legal

गीत - गोपालदास नीरज

विश्व चाहे या न चाहे,

लोग समझें या न समझें,

आ गए हैं हम यहाँ तो गीत गाकर ही उठेंगे।

हर नज़र ग़मगीन है, हर होंठ ने धूनी रमाई,

हर गली वीरान जैसे हो कि बेवा की कलाई,

ख़ुदकुशी कर मर रही है रोशनी तब आँगनों में

कर रहा है आदमी जब चाँद-तारों पर चढ़ाई,

फिर दियों का दम न टूटे,

फिर किरन को तम न लूटे,

हम जले हैं तो धरा को जगमगा कर ही उठेंगे।

विश्व चाहे या न चाहे॥

हम नहीं उनमें हवा के साथ जिनका साज़ बदले,

साज़ ही केवल नहीं अंदाज़ औ' आवाज़ बदले,

उन फ़क़ीरों-सिरफिरों के हमसफ़र हम, हमउमर हम,

जो बदल जाएँ अगर तो तख़्त बदले ताज बदले,

तुम सभी कुछ काम कर लो,

हर तरह बदनाम कर लो,

हम कहानी प्यार की पूरी सुनाकर ही उठेंगे।

विश्व चाहे या न चाहे॥

नाम जिसका आँक गोरी हो गई मैली सियाही,

दे रहा है चाँद जिसके रूप की रोकर गवाही,

थाम जिसका हाथ चलना सीखती आँधी धरा पर

है खड़ा इतिहास जिसके द्वार पर बनकर सिपाही,

आदमी वह फिर न टूटे,

वक़्त फिर उसको न लूटे,

ज़िंदगी की हम नई सूरत बनाकर ही उठेंगे।

विश्व चाहे या न चाहे॥

हम न अपने आप ही आए दुखों के इस नगर में,

था मिला तेरा निमंत्रण ही हमें आधे सफ़र में,

किंतु फिर भी लौट जाते हम बिना गाए यहाँ से

जो सभी को तू बराबर तौलता अपनी नज़र में,

अब भले कुछ भी कहे तू,

ख़ुश कि या नाख़ुश रहे तू,

गाँव भर को हम सही हालत बताकर ही उठेंगे।

विश्व चाहे या न चाहे॥

इस सभा की साज़िशों से तंग आकर, चोट खाकर

गीत गाए ही बिना जो हैं गए वापिस मुसाफ़िर

और वे जो हाथ में मिज़राब पहने मुशकिलों की

दे रहे हैं ज़िंदगी के साज़ को सबसे नया स्वर,

मौर तुम लाओ न लाओ,

नेग तुम पाओ न पाओ,

हम उन्हें इस दौर का दूल्हा बनाकर ही उठेंगे।

विश्व चाहे या न चाहे॥

  continue reading

326 एपिसोडस

iconसाझा करें
 
Manage episode 381726793 series 3463571
Nayi Dhara Radio द्वारा प्रदान की गई सामग्री. एपिसोड, ग्राफिक्स और पॉडकास्ट विवरण सहित सभी पॉडकास्ट सामग्री Nayi Dhara Radio या उनके पॉडकास्ट प्लेटफ़ॉर्म पार्टनर द्वारा सीधे अपलोड और प्रदान की जाती है। यदि आपको लगता है कि कोई आपकी अनुमति के बिना आपके कॉपीराइट किए गए कार्य का उपयोग कर रहा है, तो आप यहां बताई गई प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं https://hi.player.fm/legal

गीत - गोपालदास नीरज

विश्व चाहे या न चाहे,

लोग समझें या न समझें,

आ गए हैं हम यहाँ तो गीत गाकर ही उठेंगे।

हर नज़र ग़मगीन है, हर होंठ ने धूनी रमाई,

हर गली वीरान जैसे हो कि बेवा की कलाई,

ख़ुदकुशी कर मर रही है रोशनी तब आँगनों में

कर रहा है आदमी जब चाँद-तारों पर चढ़ाई,

फिर दियों का दम न टूटे,

फिर किरन को तम न लूटे,

हम जले हैं तो धरा को जगमगा कर ही उठेंगे।

विश्व चाहे या न चाहे॥

हम नहीं उनमें हवा के साथ जिनका साज़ बदले,

साज़ ही केवल नहीं अंदाज़ औ' आवाज़ बदले,

उन फ़क़ीरों-सिरफिरों के हमसफ़र हम, हमउमर हम,

जो बदल जाएँ अगर तो तख़्त बदले ताज बदले,

तुम सभी कुछ काम कर लो,

हर तरह बदनाम कर लो,

हम कहानी प्यार की पूरी सुनाकर ही उठेंगे।

विश्व चाहे या न चाहे॥

नाम जिसका आँक गोरी हो गई मैली सियाही,

दे रहा है चाँद जिसके रूप की रोकर गवाही,

थाम जिसका हाथ चलना सीखती आँधी धरा पर

है खड़ा इतिहास जिसके द्वार पर बनकर सिपाही,

आदमी वह फिर न टूटे,

वक़्त फिर उसको न लूटे,

ज़िंदगी की हम नई सूरत बनाकर ही उठेंगे।

विश्व चाहे या न चाहे॥

हम न अपने आप ही आए दुखों के इस नगर में,

था मिला तेरा निमंत्रण ही हमें आधे सफ़र में,

किंतु फिर भी लौट जाते हम बिना गाए यहाँ से

जो सभी को तू बराबर तौलता अपनी नज़र में,

अब भले कुछ भी कहे तू,

ख़ुश कि या नाख़ुश रहे तू,

गाँव भर को हम सही हालत बताकर ही उठेंगे।

विश्व चाहे या न चाहे॥

इस सभा की साज़िशों से तंग आकर, चोट खाकर

गीत गाए ही बिना जो हैं गए वापिस मुसाफ़िर

और वे जो हाथ में मिज़राब पहने मुशकिलों की

दे रहे हैं ज़िंदगी के साज़ को सबसे नया स्वर,

मौर तुम लाओ न लाओ,

नेग तुम पाओ न पाओ,

हम उन्हें इस दौर का दूल्हा बनाकर ही उठेंगे।

विश्व चाहे या न चाहे॥

  continue reading

326 एपिसोडस

सभी एपिसोड

×
 
Loading …

प्लेयर एफएम में आपका स्वागत है!

प्लेयर एफएम वेब को स्कैन कर रहा है उच्च गुणवत्ता वाले पॉडकास्ट आप के आनंद लेंने के लिए अभी। यह सबसे अच्छा पॉडकास्ट एप्प है और यह Android, iPhone और वेब पर काम करता है। उपकरणों में सदस्यता को सिंक करने के लिए साइनअप करें।

 

त्वरित संदर्भ मार्गदर्शिका