Artwork

Nayi Dhara Radio द्वारा प्रदान की गई सामग्री. एपिसोड, ग्राफिक्स और पॉडकास्ट विवरण सहित सभी पॉडकास्ट सामग्री Nayi Dhara Radio या उनके पॉडकास्ट प्लेटफ़ॉर्म पार्टनर द्वारा सीधे अपलोड और प्रदान की जाती है। यदि आपको लगता है कि कोई आपकी अनुमति के बिना आपके कॉपीराइट किए गए कार्य का उपयोग कर रहा है, तो आप यहां बताई गई प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं https://hi.player.fm/legal
Player FM - पॉडकास्ट ऐप
Player FM ऐप के साथ ऑफ़लाइन जाएं!

Andhere Ka Musafir | Sarveshwar Dayal Saxena

2:25
 
साझा करें
 

Manage episode 377962504 series 3463571
Nayi Dhara Radio द्वारा प्रदान की गई सामग्री. एपिसोड, ग्राफिक्स और पॉडकास्ट विवरण सहित सभी पॉडकास्ट सामग्री Nayi Dhara Radio या उनके पॉडकास्ट प्लेटफ़ॉर्म पार्टनर द्वारा सीधे अपलोड और प्रदान की जाती है। यदि आपको लगता है कि कोई आपकी अनुमति के बिना आपके कॉपीराइट किए गए कार्य का उपयोग कर रहा है, तो आप यहां बताई गई प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं https://hi.player.fm/legal

अँधेरे का मुसाफ़िर - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

यह सिमटती साँझ,

यह वीरान जंगल का सिरा,

यह बिखरती रात, यह चारों तरफ सहमी धरा;

उस पहाड़ी पर पहुँचकर रोशनी पथरा गयी,

आख़िरी आवाज़ पंखों की किसी के आ गयी,

रुक गयी अब तो अचानक लहर की अँगड़ाइयाँ,

ताल के ख़ामोश जल पर सो गई परछाइयाँ।

दूर पेड़ों की कतारें एक ही में मिल गयीं,

एक धब्बा रह गया, जैसे ज़मीनें हिल गयीं,

आसमाँ तक टूटकर जैसे धरा पर गिर गया,

बस धुँए के बादलों से सामने पथ घिर गया,

यह अँधेरे की पिटारी, रास्ता यह साँप-सा,

खोलनेवाला अनाड़ी मन रहा है काँप-सा।

लड़खड़ाने लग गया मैं, डगमगाने लग गया,

देहरी का दीप तेरा याद आने लग गया;

थाम ले कोई किरन की बाँह मुझको थाम ले,

नाम ले कोई कहीं से रोशनी का नाम ले,

कोई कह दे, "दूर देखो टिमटिमाया दीप एक,

ओ अँधेरे के मुसाफिर उसके आगे घुटने टेक!"

  continue reading

335 एपिसोडस

Artwork
iconसाझा करें
 
Manage episode 377962504 series 3463571
Nayi Dhara Radio द्वारा प्रदान की गई सामग्री. एपिसोड, ग्राफिक्स और पॉडकास्ट विवरण सहित सभी पॉडकास्ट सामग्री Nayi Dhara Radio या उनके पॉडकास्ट प्लेटफ़ॉर्म पार्टनर द्वारा सीधे अपलोड और प्रदान की जाती है। यदि आपको लगता है कि कोई आपकी अनुमति के बिना आपके कॉपीराइट किए गए कार्य का उपयोग कर रहा है, तो आप यहां बताई गई प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं https://hi.player.fm/legal

अँधेरे का मुसाफ़िर - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

यह सिमटती साँझ,

यह वीरान जंगल का सिरा,

यह बिखरती रात, यह चारों तरफ सहमी धरा;

उस पहाड़ी पर पहुँचकर रोशनी पथरा गयी,

आख़िरी आवाज़ पंखों की किसी के आ गयी,

रुक गयी अब तो अचानक लहर की अँगड़ाइयाँ,

ताल के ख़ामोश जल पर सो गई परछाइयाँ।

दूर पेड़ों की कतारें एक ही में मिल गयीं,

एक धब्बा रह गया, जैसे ज़मीनें हिल गयीं,

आसमाँ तक टूटकर जैसे धरा पर गिर गया,

बस धुँए के बादलों से सामने पथ घिर गया,

यह अँधेरे की पिटारी, रास्ता यह साँप-सा,

खोलनेवाला अनाड़ी मन रहा है काँप-सा।

लड़खड़ाने लग गया मैं, डगमगाने लग गया,

देहरी का दीप तेरा याद आने लग गया;

थाम ले कोई किरन की बाँह मुझको थाम ले,

नाम ले कोई कहीं से रोशनी का नाम ले,

कोई कह दे, "दूर देखो टिमटिमाया दीप एक,

ओ अँधेरे के मुसाफिर उसके आगे घुटने टेक!"

  continue reading

335 एपिसोडस

सभी एपिसोड

×
 
Loading …

प्लेयर एफएम में आपका स्वागत है!

प्लेयर एफएम वेब को स्कैन कर रहा है उच्च गुणवत्ता वाले पॉडकास्ट आप के आनंद लेंने के लिए अभी। यह सबसे अच्छा पॉडकास्ट एप्प है और यह Android, iPhone और वेब पर काम करता है। उपकरणों में सदस्यता को सिंक करने के लिए साइनअप करें।

 

त्वरित संदर्भ मार्गदर्शिका