Ep. 42: सरकारी काम इतना रुलाते है, सब बेच डालें क्या?

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The debate on governmental reform often takes one of these three turns: privatization, nationalization, or devolution. But none of the three narratives provides a comprehensive framework for reforming government organisations. For example, privatization might not always be possible nor advisable. Similarly, devolution of policy and regulatory roles can have adverse effects on efficiency. Nationalization, on the other hand, distorts markets and often leads to terrible outcomes.

How then should we think about changing government organisations? Osborne and Plastrik’s classic Banishing Bureaucracy: The Five Strategies for Reinventing Government lays out some general strategies for changing the DNA of government organisations. Pranay and Saurabh discuss ideas from the book relevant to the Indian context.

क्यों हमारी ट्राफिक पुलिस इतनी प्रभावहीन है? क्यों एयर इंडिया जैसी सरकारी कंपनी हर दिन पाँच करोड़ का घाटा करती है? HAL जैसे सरकारी संस्थान में क्या सुधार किया जा सकता है? क्यों आज भी सरकारें साबुन बेचने वाली कंपनी चला रही है? इनमें से किसी भी सरकारी संगठन से सरोकार करने की सोच मात्र से हम अक्सर कतराने लगते है | उनकी अक्षमता और निष्फलता सभी को चुभती है | तो इस एपिसोड में हमने चर्चा की कुछ सरकारी संस्थान में सुधार लाने की कुछ रणनीतियों के बारे में |

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