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यदि कोई भगवद् गीता का सारांश यथार्थ रूप से समझने में सक्षम हो तो वह परम सत्य का अनुभव कर बंधन की भ्रान्ति व संसार के दुखों से मुक्त हो सकता है। अर्जुन ने भी महाभारत का युद्ध लड़ते हुए सांसारिक दुखों से मुक्ति प्राप्त की थी। भगवान श्री कृष्ण के द्वारा दिए गए दिव्यचक्षु के कारण ही यह संभव हो सका और इसी दिव्यचक्षु के कारण अर्जुन कोई भी कर्म बाँधे बिना युद्ध लड़ने में सक्षम बने और उसी जीवन में मोक्ष प्राप्त किया। This Satsang is conducted by Mona Mahajan Sharma. To connect us visit https://devotio ...
 
** श्री आनंदपुर धाम महिमा ** श्री आरती-पूजा सत्संग सेवा सुमिरन और ध्यान, श्रद्धा सहित सेवन करे निश्चय हो कल्याण || **Shri Anandpur Dham Mahima** Spirituality is not a business..it is a selfless Service for pure bhakti teaching by our Masters. First Master Shri Paramhans Dayal Swami Advaita Anand ji Maharaj, Second Master Shri Swami Swarup Anand Ji Maharaj, Third Master Shri Swami Vairag Anand Ji Maharaj, Fourth Master Shri Swami Beant Anand Ji Maharaj, Fifth Master Shri Swami Darshan Puran A ...
 
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नमो अंजनिनंदनं वायुपूतम् सदा मंगलाकर श्रीरामदूतम् । महावीर वीरेश त्रिकाल वेशम् घनानन्द निर्द्वन्द हर्तां कलेशम् । नमो अंजनिनंदनं वायुपूतम् सदा मंगलाकर श्रीरामदूतम् । संजीवन जड़ी लाय नागेश काजे गयी मूर्च्छना रामभ्राता निवाजे। सकल दीन जन के हरो दुःख स्वामी नमो वायुपुत्रं नमामि नमामि। नमो अंजनि नंदनं वायुपूतम् सदा मंगलागार श्री राम दूतम् । Listen to B…
 
रघुवर तेरो ही दास कहाऊँ तेरो नाम जपूँ निसि वासर तेरो ही गुण गाऊँ रघुवर तेरो ही दास कहाऊँ तुम ही मेरे प्राण जीवन धन तुम तजि अनत न जाऊँ तुम्हरे चरण कमल को भज कर रतन हरि सुख पाऊँ रघुवर तेरो ही दास कहाऊँ Listen to Bhajan sung by Dr. Uma Shrivastava by clicking here.द्वारा Shri Ram Parivar
 
साधो, मन का मान त्यागो। काम, क्रोध, संगत दुर्जन की, इनसे अहि निशि भागो, साधो, मन का मान त्यागो… सु:ख-दुःख दोऊ सम करि जानो, और मान अपमाना, हर्ष-शोक से रहै अतीता, तीनों तत्व पहचाना, साधो, मन का मान त्यागो… अस्तुति निंदा दोऊ त्यागो, जो है परमपद पाना, जन नानक यह खेल कठिन है, सद्गुरु के गुन गाना, साधो, मन का मान त्यागो… alternate अस्तुति निंदा दोऊ त्याग…
 
अब तो माधव मोहे उबार | दिवस बीते रैन बीती, बार बार पुकार || नाव है मझधार भगवान्, तीर कैसे पाए, घिरी है घनघोर बदली पार कौन लगाये | काम क्रोध समेत तृष्णा, रही पल छिन घेर, नाथ दीनानाथ कृष्ण मत लगाओ देर | दौड़ कर आये बचाने द्रोपदी की लाज, द्वार तेरा छोड़ के किस द्वार जाऊं आज | Listen to Bhajan sung by Dr. Uma Shrivastava by clicking here.…
 
रघुवर तुमको मेरी लाज । सदा सदा मैं शरण तिहारी, तुम हो गरीब निवाज़ ॥ पतित उद्धारण विरद तिहारो, श्रवनन सुनी आवाज । हूँ तो पतित पुरातन कहिए, पार उतारो जहाज ॥ रघुवर तुमको मेरी लाज … अघ खंडन दुःख भन्जन जन के, यही तिहारो काज । तुलसीदास पर किरपा कीजै, भगति दान देहु आज ॥ रघुवर तुमको मेरी लाज… Listen to Bhajan sung by Dr. Uma Shrivastava by clicking here.…
 
मंगल मूरति राम दुलारे, आन पड़ा अब तेरे द्वारे, हे बजरंगबली हनुमान, हे महावीर करो कल्याण, हे महावीर करो कल्याण ॥ तीनों लोक तेरा उजियारा, दुखियों का तूने काज सवारा, हे जगवंदन केसरी नंदन, कष्ट हरो हे कृपा निधान ॥ मंगल मूरति राम दुलारे… तेरे द्वारे जो भी आया, खाली नहीं कोई लौटाया, दुर्गम काज बनावन हारे, मंगलमय दीजो वरदान ॥ मंगल मूरति राम दुलारे… तेरा स…
 
प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर, प्रभु का नियम बदलते देखा । अपना मान भले टल जाए, भक्त का मान न टलते देखा ॥ जिनकी केवल कृपा दृष्टि से, सकल विश्व को पलते देखा । उनको गोकुल के माखन पर, सौ-सौ बार मचलते देखा ॥ जिनका ध्यान विरंचि शम्भु सनकादिक से न सम्हलते देखा । उनको बाल सखा मंडल में, लेकर गेंद उछलते देखा ॥ जिनके चरण कमल कमला के, करतल से न निकलते देखा । उनको…
 
गोविंद कबहुं मिलै पिया मेरा। चरण-कंवल को हंस-हंस देखू राखूं नैणां नेरा। गोविंद कबहुं मिलै पिया मेरा॥ निरखणकूं मोहि चाव घणेरो कब देखूं मुख तेरा। गोविंद कबहुं मिलै पिया मेरा॥ व्याकुल प्राण धरे नहिं धीरज मिल तूं मीत सबेरा। गोविंद कबहुं मिलै पिया मेरा॥ मीरा के प्रभु गिरधर नागर ताप तपन बहुतेरा। गोविंद कबहुं मिलै पिया मेरा॥ Listen to Bhajan sung by Dr. U…
 
श्याम आये नैनों में बन गयी मैं साँवरी शीश मुकुट बंसी अधर रेशम का पीताम्बर पहने है वनमाल, सखी सलोनो श्याम सुन्दर कमलों से चरणों पर जाऊँ मैं वारि री मैं तो आज फूल बनूँ धूप बनूँ दीप बनूँ गाते गाते गीत सखी आरती का दीप बनूँ आज चढ़ूँ पूजा में बन के एक पाँखुड़ी Listen to Bhajan sung by Dr. Uma Shrivastava by clicking here.…
 
जो भजे हरि को सदा सो परम पद पायेगा .. देह के माला तिलक और भस्म नहिं कुछ काम के . प्रेम भक्ति के बिना नहिं नाथ के मन भायेगा .. जो भजे हरि को सदा सो परम पद पायेगा .. दिल के दर्पण को सफ़ा कर दूर कर अभिमान को . खाक हो गुरु के चरण की तो प्रभु मिल जायेगा .. जो भजे हरि को सदा सो परम पद पायेगा .. छोड़ दुनिया के मज़े और बैठ कर एकांत में . ध्यान धर हरि के चर…
 
तू दयालु, दीन हौं, तू दानि, हौं भिखारी। हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पाप-पुंज-हारी॥ नाथ तू अनाथ को, अनाथ कौन मोसो। मो समान आरत नहिं, आरतिहर तोसो॥ ब्रह्म तू, हौं जीव, तू है ठाकुर, हौं चेरो। तात-मात, गुरु-सखा, तू सब विधि हितु मेरो॥ तोहिं मोहिं नाते अनेक, मानियै जो भावै। ज्यों त्यों तुलसी कृपालु! चरन-सरन पावै॥ Listen to Bhajan sung by Dr. Uma Shrivastava…
 
किसकी शरण में जाऊं अशरण शरण तुम्ही हो ॥ गज ग्राह से छुड़ाया प्रह्लाद को बचाया द्रोपदी का पट बढ़ाया निर्बल के बल तुम्ही हो ॥ अति दीन था सुदामा आया तुम्हारे धामा धनपति उसे बनाया निर्धन के धन तुम्ही हो ॥ तारा सदन कसाई अजामिल की गति बनाई गणिका सुपुर पठाई पातक हरण तुम्ही हो ॥ मुझको तो हे बिहारी आशा है बस तुम्हारी काहे सुरति बिसारी मेरे तो एक तुम्ही हो ॥…
 
अबकी टेक हमारी, लाज राखो गिरिधारी। जैसी लाज राखी पारथ की, भारत जुद्ध मंझारी। सारथि होके रथ को हांको, चक्र-सुदर्शन-धारी।। भगत की टेक न टारी। अबकी टेक हमारी॥ जैसी लाज राखी द्रौपदि की, होन न दीनि उधारी। खैंचत खैंचत दोऊ भुज थाके, दु:शासन पचि हारी।। चीर बढ़ायो मुरारी । अबकी टेक हमारी॥ सूरदास की लज्जा राखो, अब को है रखवारी ? राधे राधे श्रीवर-प्यारी श्रीव…
 
कान्हा तोरी जोहत रह गई बाट । जोहत जोहत एक पग ठानी, कालिंदी के घाट, कान्हा तोरी जोहत रह गई बाट । झूठी प्रीत करी मनमोहन, या कपटी की बात, कान्हा तोरी जोहत रह गई बाट । मीरा के प्रभु गिरघर नागर, दे गियो बृज को चाठ, कान्हा तोरी जोहत रह गई बाट । Listen to Bhajan sung by Dr. Uma Shrivastava by clicking here.…
 
Listen to the Holi `Ram Janki ki Hori` sung by Shri Vibhu Varma राम-जानकी की होरी (२) जनकपुर देखन चलो री, राम-जानकी की होरी… कौशल भूषण इत रघुनन्दन, उत मिथिलेश किशोरी, (२) सखा राम के, सखी सिया की, (२) कैसा ये फाग रचो री, जुगल छवि आज लखो री, राम जानकी की होरी… लपक झपक सीता ने लक्ष्मण, पकड़ लिये बरजोरी, (२) कहां गये वो धनुष बाण अब, (२) बेंदी माथे धरो …
 
Listen to this Holi `Holi aayii re kaanhaa brij ke basiya' in the voice of Dr. Uma Shrivastava होलीआई रे कान्हा बृज के बसिया होलीआई रे कान्हा… आज बिरज में धूम मची है, सब मिल खेलें होली झांझ मृदङ्ग मंजीरा बाजे, नाचे छोरा छोरी ऐसी धूम मची बृज में रसिया होलीआई रे कान्हा… अपने अपने घर से निकसी, कोई श्यामल कोई गोरी, किसी के हाथ गुलाल पिटारी कोई मारे पिच…
 
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