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पॉडभारती (http://podbharati.com) का यह पॉडकास्ट शो सोपान, केंद्रित है मोटिवेशन, करियर मार्गदर्शन, उद्यमिता और कामकाज की दुनिया पर। सोपान माने सीढ़ी, यानी इस पॉडकास्ट का उद्देश्य है आपके करियर में समृद्धी की सीढ़ी बनना।
 
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जॉब्स, एग्जाम और रिजल्ट से जुड़ी ताजा खबरें, हायर एजुकेशन, स्कूल एजुकेशन और नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए करियर में अच्छा करने के टिप्स, अपना काम शुरू करने के टिप्स, बिजनेस आगे बढ़ाने के टिप्स बताएँगे लाइव हिंदुस्तान के चीफ़ कंटेंट क्रिएटर, पंकज विजय।आप सुन रहे हैं एच टी स्मार्टकास्ट और ये है लाइव हिंदुस्तान प्रोडक्शन |
 
प्रोबेशन से प्रमोशन तक पॉडकास्ट पर अभिनव त्रिवेदी बात करते हैं आपके व्यक्तित्व और आजीविका से जुडी वास्तविक कठिनाइयों की और वास्तविक चैलेंजेज की I इस पॉडकास्ट में ज्ञान और बड़ी बड़ी बातों की अपेक्षा न रखें I तमाम कंसल्टेंट्स, वास्तविक लोगों और कॉर्पोरेट ट्रेनर्स की बातों का निचोड़ यथार्थ भाव से इस पॉडकास्ट में परोसा गया हैं I हर सोमवार को अपने व्यक्तित्व से जुड़े एक नयें आयाम के बारें में जाने और उस पर काम करें और जानें पर्सनालिटी डेवलपमेंट कैसे करें, नेटव्रकिंग स्किल्स कैसे सीखें, असफलता का सामन ...
 
‘राह – एक करियर पॉडकास्ट ‘, सुनो इंडिया की एक हिंदी पॉडकास्ट श्रृंखला है, जिसके माध्यम से हम हमारे देश में उपलब्ध उन् करियर विकल्पों के बारे में अवगत करवाते हे जिनके बारे में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्टूडेंट्स को शायद जानकारी नहीं हे। वैसे भी 120 करोड़ आबादी वाले देश में, जंहा इतनी विविधता है, वहां हम एक ही तरह के विकल्पों से सभी को रोज़गार नहीं उपलब्ध करवा सकते और हमे अन्य विकल्पों की तलाश करने की आवश्यकता है। इस पॉडकास्ट के माध्यम से, हम उन करियर विकल्पों पर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद कर ...
 
फ़िल्मी दुनिया की दिलचस्प कहानियां, वो किस्से जो आपने अब तक नहीं सुने होंगे। तो देखिए सिनेमा, सुनिए किस्से। THE BOLLYWOOD RADIO सुनता है सारा इंडिया
 
"सेल्स का तड़का" हिंदी भाषा में बिक्री पर सूचनात्मक पॉडकास्ट है। आप इसकी बी 2 बी या बी 2 सी बिक्री के बारे में सब कुछ जानेंगे। यह पॉडकास्ट उद्योग के प्रतिष्ठित मेहमानों का साक्षात्कार करेगा, जिसमें उन्होंने यह समझा होगा कि उन्होंने इसे बिक्री करियर में कैसे बनाया, कैसे वे प्रतिकूल परिस्थितियों और सफलता के लिए अपने मंत्र के साथ आगे बढ़ते हैं, जो हमें बिक्री और बिक्री प्रबंधन पर अधिक अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में मदद करेगा।"सेल्स का तड़का" न केवल आपको अपने कौशल को सुधारने में मदद करेगा, बल्कि ब ...
 
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उन दिनों राजेश खन्ना को शराब पीने का बस बहाना चाहिए होता था. देर रात तक आशीर्वाद में महफ़िल लगा करती थी. लेकिन अब इन महफिलों में फिल्म जगत के बड़े लोग नहीं चमचे आया करते थे जिनकी कोई खास पहचान नहीं थी. धीरे धीरे ये चमचे ताकतवर होने लगे थे.
 
तब रेखा की उम्र महज 14 साल की थी. मुंबई के महबूब स्टूडियो में डायरेक्टर राजा नवाथे की इस फिल्म की शूटिंग चल रही थी। फिल्म के पहले शेड्यूल में कुलजीत पाल, राजा और विश्वजीत ने रेखा के लिए एक प्लान बनाया। उस दिन रेखा और विश्वजीत के बीच एक रोमांटिक सीन फिल्माया जाना था। जैसे ही डायरेक्टर राजा नवाथे ने एक्शन बोला, विश्वजीत ने 15 साल की रेखा को अपनी बाहो…
 
राजेश खन्ना और अंजू महेंद्रू का रिश्ता अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था. डिंपल की एंट्री के बाद ये रिश्ता खत्म होने की कगार पर पहुंच गया. 29 दिसंबर 1972 को अंजू ने काका के जन्मदिन पर डिंपल को नहीं बुलाया.
 
ये नवंबर 1972 का दौर था. गुजरात के चित्रलोक सिने सक्रिल ने हिंदी सिनेमा के कलाकारों को सम्मान देने का ऐलान किया था. इस फंक्शन में राजेश खन्ना को भी सम्मानित किया जाना था. बंबई से अहमदाबाद जाने वाली फ्लाइट में राजेश खन्ना की मुलाकात डिंपल कपाड़िया से हुई.
 
साल 1973 के बाद से राजेश खन्ना की फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही थी. वजह थी फिल्मों में कुछ भी नया न होना. उन दिनों राजेश खन्ना बहुत सी फिल्में साइन कर रहे थे और सभी फिल्में फ्लॉप हो रही थीं.
 
राजेश खन्ना की किस्मत अचानक से चमकी थी. आखिरी खत से शुरू हुआ काका का करियर साल 1969 से 1972 तक करिश्माई ढंग से ऊपर उठा था. इसके बाद अचानक से राजेश खन्ना की फिल्में फ्लॉप होनी शुरू हो गईं.
 
राजेश खन्ना तब तक सुपर स्टारडम के शिखर पर पहुंच चुके थे. चमचे हमेशा राजेश खन्ना को घेरे रहते. अब राजेश खन्ना अपनी बुराई सुनना पसंद नहीं करते थे. धड़ाधड़ फिल्में साइन कर रहे थे और दोस्त से ज्यादा दुश्मन बना रहे थे.
 
राजेश खन्ना के दीवानों की फेहरिस्त बहुत लंबी थी. लड़कियां उन पर जान छिड़कती थीं. ऐसा ही एक किस्सा अजमेर की रहने वाली 15 साल की एक लड़की का है. जो राजेश खन्ना से मिलने के लिए फिल्म पत्रकार बनी.
 
हेमा मालिनी को बेहतर डांसर बनाने में मां जया चक्रवर्ती का सबसे अहम भूमिका रही. साठ के दशक में वैजयंती माला से हेमा मालिनी की पहली मुलाकात भी मां जया चक्रवर्ती ने ही दिल्ली के एक डांस प्रोग्राम में करवाई थी.
 
गुरुदत्त की कामयाब फिल्म प्यासा में विजय का लीड रोल पहले दिलीप कुमार करने वाले थे. लेकिन गीता दत्त चाहती थीं कि ये रोल गुरुदत्त ही करें. गीता दत्त 'प्यासा' में कई तरह के बदलाव करना चाहती थीं. पर आखरी वक्त तक गुरुदत्त ने फिल्म में किसी तरह के बदलाव पर हामी नहीं भरी और 'प्यासा' वैसी ही बनी जैसी गुरुदत्त चाहते थे. लेकिन उन्होंने फिल्म में अभिनेता के च…
 
बीआर चोपड़ा एक फिल्म बना रहे थे, नाम था - कर्म. इसमें राजेश खन्ना को बतौर हीरो साइन किया गया था. कश्मीर में शूटिंग होनी थी लेकिन काका नहीं पहुंचे, बावर्ची से संदेश भिजवाया कि तबीयत खराब है. सलीम खान ने इसके बाद तीखी प्रतिक्रिया दी थी.
 
Gig Economy के इस दौर में, कई startup कंपनियां आ गयी है। आये दिन कई लोगो को बड़े-बड़े पैकेज पे उठाया जाता है। पर इसका एक दूसरा aspect है की उतने ही लोगो को जल्दी-जल्दी निकाला भी जाता ह। हमारी पीढ़ी हमारे माँ बाप के मुकाबले ज्यादा firings (नौकरी से निकाला जाना) देखती है। Firings भले ही Modern और Tech Enabled हो गयी हो, पर उनसे जूझने का तरीका और उनको…
 
हेमा मालिनी के पिता दिल्ली में सरकारी नौकरी करते थे. दिल्ली के गोल मार्केट में पूरा परिवार रहता था. अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए हेमा मालिनी पुरानी यादों में खो जाती हैं. उन यादों को भावना सोमाया ने अपनी किताब में उतारा है.
 
राज कपूर को फिल्म मेरा नाम जोकर से काफी नुकसान हुआ था. इसके बाद टीन एज लव स्टोरी बॉबी बनी. अफवाह उड़ी कि अब डिंपल कपूर फैमिली की बहू बहू बनेंगी.
 
डबलिन की रहने वाली एक 21 साल की लड़की ने अपनी आपबीती सुनाई है, जिसको सुन कोई भी सिहर उठेगा। डबलिन की रहने वाली एक 21 वर्षीय आइचा दूनिया (Aicha Dounia) का कहना है कि उसके पिता ने उसके साथ 12 सालों तक रेप किया है। वह हर रात उसके साथ सोते थे और उसका यौन उत्पीड़न करते थे। अपने ही पिता द्वारा यौन उत्पीड़न की सच्चाई आइचा ने अब जाकर बहादुरी से दुनिया के स…
 
शर्मिला टैगोर और नवाब पटौदी की शादी साल 1969 हुई. उन दिनों देश में सांप्रदायिकता चरम पर थी, खासकर पश्चिम बंगाल में हालात तनावपूर्ण हो गए थे. इन हालातों में शर्मिला टैगोर ने अंतरधर्मीय विवाह किया था.
 
हेमा मालिनी के पिता दिल्ली में नौकरी करते थे. माँ जया चक्रवर्ती ने हेमा को भरतनाट्यम की ट्रेनिंग दिलवाई. एक बार दिल्ली में हेमा मालिनी ने राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद के सामने नाट्य प्रस्तुति दी.
 
साल 1972 में आई राजेश खन्ना की फिल्म बावर्ची काका की रोमांटिक छवि से बिल्कुल अलग थी. इसमें उनका किरदार कॉमेडियन का था. पहली बार राजेश खन्ना कॉमेडी कर रहे थे. फिल्म में जया बच्चन भी थीं. इस फिल्म के बाद जया ने कभी राजेश खन्ना के साथ काम नहीं किया.
 
हेमा मालिनी का जन्म नवरात्रि में दशहरे के दिन हुआ था. मां को सपने में देवी नज़र आती थीं और वैसे ही चित्र वो दीवारों पर बनाती थीं.
 
राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) और शर्मिला टैगोर (Sharmila Tagore) की साल 1972 में आई फिल्म अमर प्रेम कोई परंपरागत रोमांटिक फिल्म नहीं है. ये बंगाली परिवेश में बनी एक ऐसी फिल्म थी जिसमें राजेश खन्ना एक अलग अंदाज़ में नज़र आए. जिसमें उनका देवदास अवतार देखने को मिला. इस फिल्म को पहले शक्ति सामंत कलकत्ता में शूट करना चाहते थे लेकिन कोलकाता में मौजूद राजेश…
 
Old is gold: Rajesh Khanna की साल 1972 की शुरुआत फिल्म दुश्मन से हुई. इसके बाद आई शक्ति सामंत की अमर प्रेम ने राजेश खन्ना को बिल्कुल अलग तरह से पर्दे पर उतारा. प्रेग्नेंसी के एक साल बाद शर्मिला टैगोर ने भी इस फिल्म के लिए हां कर दी.
 
राजेश खन्ना और अंजू महेंद्रू का रिश्ता आखिरी सांसें ले रहा था. अंजू महेंद्रू फिल्में करना चाहती थीं और काका इसके सख्त खिलाफ थे. नतीजा ये हुआ कि राजेश खन्ना की जिद के आगे अंजू महेंद्रू का करियर तबाह हो गया और ऐसा करने वाले खुद राजेश खन्ना थे.
 
राजेश खन्ना और अंजू महेंद्रू का परिचय उस दौर से था जब राजेश खन्ना ने बंबई में अपना स्ट्रगल शुरू किया था. तभी अंजू की मुलाकात राजेश खन्ना से हुई थी. वक्त के साथ राजेश खन्ना तो रुपहले पर्दे पर चमक उठे लेकिन अंजू महेंद्रू का करियर नहीं चला. दोनों का रिश्ता काका की कामयाबी के साथ नाजुक होता जा रहा था.
 
उन दिनों राजेश खन्ना की जोड़ी मुमताज के साथ स्क्रीन पर खूब पसंद की जा रही थी. शर्मिला टैगोर के साथ भी काका कुछ हिट फिल्में दे चुके थे. उस दौर की फिल्मी पत्रिकाओं ने राजेश खन्ना के अफेयर के किस्से छापने शुरू कर दिए. जिससे नाराज अंजू महेंद्रू ने काका को धमकी दी.
 
उन दिनों राजेश खन्ना का नाम इंडस्ट्री पर राज करता था. चमचों से घिरे राजेश खन्ना को अपनी तारीफ से प्यार था वो आलोचना सुनना नहीं चाहते थे. सलीम खान ने काका के उन दिनों का किस्सा विस्तार से बताया है.
 
राजेश खन्ना शुरुआत में जब उभरे तब उनके घर आशीर्वाद पर हर शाम सितारों का जलसा लगता था. बड़े बड़े नामचीन सितारे इस महफ़िल का हिस्सा बनते थे. लेकिन बाद के दिनों में बड़े सितारे इन महफिलों से दूर होते गए और छोटे छोटे कलाकारों और प्रोड्यूसर्स का जमावड़ा लगने लगा. जो सिर्फ चमचे की भूमिका में थे.
 
लेखक सलीम खान राजेश खन्ना से जुड़ा एक किस्सा सुनाते हैं. एक मैगज़ीन जोकि संजीव कुमार पर कवर स्टोरी कर रही थी. उस मैगज़ीन में सलीम खान ने संजीव कुमार की तारीफ की. ये बात राजेश खन्ना को बहुत बुरी लगी.
 
राजेश खन्ना को लेकर लोगों की दीवानगी पागलपन की सारी हदें पार कर चुकी थी. खून से लिखे खत इस बात की गवाही दे रहे थे. एक्टर नवीन निश्चल राजेश खन्ना का एक दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं.
 
साल 1980 में आई राज कुमार, मौसमी चटर्जी, शत्रुघ्न सिन्हा अभिनीत फिल्म चंबल की कसम डाकुओं की पृष्ठभूमि पर आधारित थी. फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा एक्टर रंजीत ने The Kapil Sharma show के सेट पर सुनाया.
 
साल 1971, जब कर्नाटक सरकार के एक लॉटरी फंक्शन में पहुंचे राजेश खन्ना से मिलने विधानसभा के सामने जमा हो गए पचास हजार लोग. इतना प्यार और भीड़ देखकर राजेश खन्ना रो पड़े.
 
राजेश खन्ना जिस दौर में तेजी से उभरे उसी दौर में देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का सिक्का चल रहा था. बांग्लादेश को आजाद कराने के साथ ही पूरी दुनिया का मीडिया इंदिरा गांधी की ओर देख रहा था. भारत में तभी इंदिरा गांधी और राजेश खन्ना की लोकप्रियता को आंकता एक लेख छपा जो बाद में सिलेबस का हिस्सा बना.…
 
राजेश खन्ना सत्तर के दशक में भगवान से कम नहीं थे. उनकी दीवानगी का आलम ये था कि अब बंबई में भिखारी भगवान के नाम पर नहीं बल्कि राजेश खन्ना के नाम पर भीख मांगने लगे थे.
 
राजेश खन्ना के साथ अमिताभ बच्चन ने फिल्म आनंद में पहली बार साथ में काम किया था. फिल्म पूरी तरह से राजेश खन्ना के नाम थी, लेकिन अमिताभ अपनी छाप छोड़ने में कामयाब हो चुके थे. फिल्म पत्रकार और राजेश खन्ना की करीबी दोस्त ने फिल्म देखने के बाद कहा - उस लंबू के साथ दोबारा काम मत करना.
 
Rajesh Khanna की फिल्म आनंद के क्लाइमेक्स सीन की चर्चा आज तक होती है, सीन में इतना कुछ है कि लगता है यही जीवन का सार है. अचानक से सुनाई देती आवाज.. बाबू मोशाय, अमिताभ बच्चन का रोना. सबकुछ रुला देता है.
 
शहीद भगत सिंह की कुर्बानी देश युगों युगों तक याद रखेगा. भगत सिंह पर बहुत फिल्में बनीं लेकिन मनोज कुमार की शहीद सबसे खास है. फिल्म के सिलसिले में मनोज कुमार तब चंडीगढ़ में थे. मनोज साहब ने शहीद भगत की मां से मिलने की इच्छा जताई और अस्पताल पहुंच गये. जहां वो भर्ती थीं. यहीं इनकी मुलाकत शहीद भगत सिंह के साथी बटुकेश्वर दत्त से भी हुई. मनोज कुमार के लिए…
 
वो जनवरी 1971 का साल था जब ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म आनंद सिनेमाघरों में लगी. फिल्म राजेश खन्ना के इर्दगिर्द बुनी गई थी, अमिताभ बच्चन भी एक अहम किरदार में थे. फिल्म के क्लाइमेक्स ने सबको रुला दिया.
 
बंबई में उस रोज़ खूब बारिश हुई थी. सेंट जोजेफ स्कूल में पढ़ने वाली एक 11 साल की लड़की ने क्लास बंक कर राजेश खन्ना की एक ही फिल्म को तीसरी बार देखा और फिर काका के बंगले आशीर्वाद के बाहर पहुँच कर गेटकीपर से बोली - मुझे राजेश खन्ना से मिलने है. ये लड़की डिंपल कपाड़िया थी.
 
राजेश खन्ना की कामयाबी जैसे जैसे बढ़ रही थी वैसे वैसे उनके पास चमचों की फौज बढ़ती जा रही थी. अब राजेश खन्ना की शामें शराब और चमचों से सजा करती थी. अब राजेश खन्ना के पास अंजू महेंद्रू के लिए भी वक्त नहीं था.
 
राजेश खन्ना से नाराज होकर अंजू महेंद्रू ने वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर गैरी सोबर्स से सगाई कर ली. ये बात सुनकर राजेश खन्ना बहुत नाराज हुए. हालांकि बाद में अंजू ने सगाई तोड़ दी मगर राजेश खन्ना को अब शक की बीमारी लग गई.
 
उन दिनों राजेश खन्ना के बंगले आशीर्वाद में अंजू महेंद्रू का हुक्म चलता था. हर किसी को यही लगता था कि काका अंजू महेंद्रू से ही शादी करेंगे लेकिन एक रोज़ एक ख़बर कलकत्ता से बंबई पहुंची कि अंजू महेंद्रू ने सगाई कर ली है.
 
उन दिनों अपने बंगले आशीर्वाद की छत से राजेश खन्ना घंटों तक समंदर की उठती लहरों को देखा करते थे. ये वो दौर था जब सैकड़ों मिलने वालों का डेरा हमेशा काका के घर में लगा रहता था. उन्हीं दिनों काका के चाहने वाले उन्हें ढेरों खत भेजा करते थे, जिसमें रोज़ कुछ खत खून से लिखे होते थे. जिसका बराबर जवाब राजेश खन्ना देते थे.…
 
किस्सा उन दिनों का है जब राजेश खन्ना ने राजेन्द्र कुमार का बंगला खरीद लिया था. नाम रखा था- आशीर्वाद. इस बंगले में बिना किसी रोक टोक के सिर्फ एक पत्रकार देवयानी चौबल को आने की इजाज़त थी. देवयानी चौबल और राजेश खन्ना को लेकर उन दिनों बहुत बातें होती थीं जिसपर देवयानी ने खुद एक बार सफाई दी.
 
राजेश खन्ना की फिल्म हाथी मेरे साथी साउथ की हिंदी रिमेक थी. इस फिल्म के डायरेक्टर एम. एम. देवर ने उस जमाने में राजेश खन्ना को उनकी मार्किट प्राइज़ से पांच लाख ज्यादा में ये फिल्म साइन करवाई थी. लेकिन फिल्म की कहानी ने राजेश खन्ना को परेशान कर दिया फिर सलीम जावेद की जोड़ी ने फिल्म की कहानी को बदला.
 
समंदर किनारे बंगला खरीदने की चाहत हमेशा से राजेश खन्ना की रही मगर कामयाबी के बाद भी इतने रुपए नहीं जमा हो सके थे कि आलीशान बंगला खरीद सकें. तभी राजेन्द्र कुमार ने अपना भूत बंगला राजेश खन्ना को बेच दिया.
 
राजेश खन्ना का सितारा चमक उठा था. उस दौर को याद करते हुए Salim Khan ने कहा था कि 1969 से 1972 तक राजेश खन्ना के अलावा कोई नहीं था. वो इकलौते चमकते सितारे थे. बाद में भी बहुत से सितारे आए लेकिन आज तक राजेश खन्ना के कद को कोई छू नहीं सका.
 
ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म आनंद के लिए राजेश खन्ना ने अपने साथ काफी समझौता किया था. फीस तो कम ली ही थी साथ ही सेट पर देरी से आने के लिए मशहूर राजेश खन्ना आनंद के सेट पर समय से आने लगे थे. लेकिन कभी कभी देरी हो ही जाती थी.
 
1970 का साल खत्म होते होते राजेश खन्ना की किस्मत का सितारा फिल्मी दुनिया के आकाश में सबसे तेज चमक रहा था. एक बाद एक सुपरहिट फिल्म देने के बाद अब राजेश खन्ना के पास फिल्म किलो के भाव थीं मगर उन्हें करने के लिए उनके पास डेट्स नहीं थी. इसकी बड़ी वजह ये थी कि राजेश खन्ना को न कहना नहीं आत था.
 
राजेश खन्ना और दिलीप कुमार की फिल्मों में कामयाबी के मूल मंत्र के तौर पर डेथ सीन लिखने का ट्रेंड चला. पहले इससे दिलीप कुमार को कामयाबी मिली फिर यही फार्मूला राजेश खन्ना ने भी अपनाया. लेकिन इससे सबसे ज्यादा दिक्कत काका की माँ को हुई.
 
रेखा और मुकेश अग्रवाल दोनों एक दूसरे से बिल्कुल अलग थे. दोनों की सोच और जरूरत बेमेल थी. मुकेश अग्रवाल को रेखा का स्टारडम पसंद था और रेखा को मुकेश की दीवानगी. पहली बार दोनों दिल्ली में मिले थे.
 
राजेश खन्ना की बहुत सी सुपरहिट फिल्मों के बाद एक फिल्म आई सच्चा झूठा. इस फिल्म में राजेश खन्ना का डबल रोल था. एक गाँव का भोला भाला लड़का जो बहन की शादी के लिए शहर कमाने आता है. दूसरा है शहर का क्रिमिनल रंजीत, जो दिखने में बिल्कुल राजेश खन्ना जैसा है.
 
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