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Bhagavad Gita Sanskrit सार्वजनिक
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सबसे अच्छा Bhagavad Gita Sanskrit पॉडकास्ट हम पा सकते हैं (अपडेट किया गया दिसंबर 2019)
सबसे अच्छा Bhagavad Gita Sanskrit पॉडकास्ट हम पा सकते हैं
अपडेट किया गया दिसंबर 2019
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Bhagavad Gita Sanskrit
 
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गुरु-वन्दना : ।। ॐ श्री सद्गुरुदेव भगवान् की जय ।। जय सद्गुरुदेवं, परमानन्दं, अमर शरीरं अविकारी।। निर्गुण निर्मूलं, धरि स्थूलं, काटन शूलं भवभारी।। सूरत निज सोहं, कलिमल खोहं, जनमन मोहन छविभारी।। अमरापुर वासी, सब सुख राशी, सदा एकरस निर्विकारी।। अनुभव गम्भीरा, मति के धीरा, अलख फकीरा अवतारी।। योगी अद्वैष्टा, त्रिकाल द्रष्टा, केवल पद आनन्दकारी।। चित ...…
 
भगवान् श्रीकृष्णो यस्मिन् काले गीतायाः सदुपदेशं प्रादात्, तदानीं तस्य मनोभावाः कीदृशा आसन्? ते सर्वे मनोगता भावा वक्तुं न शक्यन्ते। केचन सन्ति भावा वर्णयितुं योग्याः केचन भावभङ्गिमयैव प्रकटयितुमर्हाः, अपरे शेषा भावाः क्रियात्मकाः सन्ति, तान् भावान् कोऽपि जनस्तत्पथमारुह्यैव ज्ञातुं शक्नोति। यस्मिन् स्तरे श्रीकृष्ण आसीत्, तदेव स्तरमात्मसात् कृत्व ...…
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘संशयविषादयोगो’ नाम प्रथमोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘कर्मजिज्ञासा’ नाम द्वितीयोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे ‘शत्रुविनाशप्रेरणा’ नाम तृतीयोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘यज्ञकर्मस्पष्टीकरणम्’ नाम चतुर्थोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘‘यज्ञभोक्तामहापुरुषस्थमहेश्वरः’’ नाम पञ्चमोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘अभ्यासयोगो’ नाम षष्ठोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘समग्रबोधः’ नाम सप्तमोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘अक्षरब्रह्मयोगो’ नामाष्टमोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘राजविद्याजागृति’ नाम नवमोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘विभूतिवर्णनम्’ नाम दशमोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘विश्वरूपदर्शनयोगो’ नामैका- दशोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘भक्तियोगो’ नाम द्वादशोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोगो’ नाम त्रयोदशोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘गुणत्रयविभागयोगो’ नाम चतुर्दशोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘पुरुषोत्तमयोगो’ नाम पञ्चदशोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘दैवासुरसम्पद्विभागयोगो’ नाम षोडशोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘ॐ तत्सत् श्रद्धात्रयविभागयोगो’ नाम सप्तदशोऽध्यायः।
 
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘संन्यासयोगो’ नामाष्टादशोऽध्यायः।
 
स सर्वसमर्थोऽविनाशी परमात्मा मानवस्य हृदये निवसति। सम्पूर्णभावेन तस्य शरणं गन्तुं विधानमस्ति, येन शाश्वतं धाम, सदाविद्यमाना- शान्तिस्तथानन्तजीवनस्य, प्राप्तिर्भवति।
 
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