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ग़ज़ल - दिन रात मुझे याद (Ghazal - Din Raat Mujhe Yaad)

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दिन रात मुझे याद यूँ आया न करो तुम।

हर वक़्त यूँ तड़पा के सताया न करो तुम।

दिन भर तो मुझे नींद नहीं होती मयस्सर,

आ ख्वाब में हर रात जगाया न करो तुम।

इक वक़्त था मुस्कान हमेशा थी लबों पर,

वो वक़्त मुझे याद दिलाया न करो तुम।

लगता है तेरे दिल में कहीं कुछ तो बचा है,

जो भी है दिल में वो छुपाया न करो तुम।

इस वक़्त से बढ़कर है नहीं कुछ भी यहाँ पर,

बेकार की बातों में गँवाया न करो तुम।

माना कि तेरे दिल में नहीं इश्क़ मेरा अब,

अपना जो कभी था वो पराया न करो तुम।

_____________________

लेखन - विवेक अग्रवाल 'अवि'

संगीत और सुर - रानू जैन

--- Send in a voice message: https://podcasters.spotify.com/pod/show/vivek-agarwal70/message

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हर वक़्त यूँ तड़पा के सताया न करो तुम।

दिन भर तो मुझे नींद नहीं होती मयस्सर,

आ ख्वाब में हर रात जगाया न करो तुम।

इक वक़्त था मुस्कान हमेशा थी लबों पर,

वो वक़्त मुझे याद दिलाया न करो तुम।

लगता है तेरे दिल में कहीं कुछ तो बचा है,

जो भी है दिल में वो छुपाया न करो तुम।

इस वक़्त से बढ़कर है नहीं कुछ भी यहाँ पर,

बेकार की बातों में गँवाया न करो तुम।

माना कि तेरे दिल में नहीं इश्क़ मेरा अब,

अपना जो कभी था वो पराया न करो तुम।

_____________________

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