कन्हैया बनने के टिप्स, सिक्कों के क़िस्से और अक्टूबर का कनफ़्यूजन : तीन ताल, Ep 51

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तीन ताल के 51वें एपिसोड में कमलेश 'ताऊ', पाणिनि 'बाबा' और कुलदीप 'सरदार' से सुनिए:

- तीन ताल के श्रवण जयंती एपिसोड के बाद सरदार हुए भावुक. बिटिया के ब्याह के बाद की उदासी.

- ठोको ताली वाले सरदार और तीन ताल के सरदार के बीच का फ़र्क़. क्यों अक्टूबर को कमबख्त कहने का मन नहीं करता और अक्टूबर आठवां महीना है या दसवाँ.

- गाँधी के आदर्शवाद की समस्याएँ. ताऊ ने गाँधी को क्यों 'देवता' कहा और सरदार ने क्यों 'जंक्शन' कहा?

- इंटरनेशनल पॉडकास्ट डे के बहाने ताऊ, बाबा और सरदार की पॉडकास्ट यात्रा और कुछ पॉडकास्ट के सुझाव. साथ ही नेताओं को डांस करना चाहिए या नहीं, इस पर ताऊ और बाबा में गहरी असहमति.

- सुबह जेएनयू, शाम को कांग्रेस. वामपंथियों की आख़िरी शरणस्थली कांग्रेस क्यों है?
- ताऊ ने क्यों कहा कि राहुल गांधी वामपंथी विचारक जैसे नज़र आते हैं?

-प्रेम विवाह का निपटारा सिक्का उछालकर करने वाली पंचायत से ताऊ की सहमति. सिक्कों की यादें,आकर्षण और खनखनाहट.

-ताऊ का फ़लसफ़ा, क्यों सिक्का उछालकर जीवन के फ़ैसले लेना सबसे बेहतर. गुल्लक से सिक्का निकालने का सही तरीका क्या? सबसे खूबसूरत सिक्के कहाँ के.

-बिज़ार ख़बर में सेब सा दिखने और केलों सा ज़ायक़ा देने वाले आमों पर बात. राजनीति के पके और अनपके आम. सरदार को आई देरिदा की याद और ताऊ की कविता - आम आदमी है या आदमी ही आम है.

-न्योता वाले श्रोता में गुमला से लेकर अमरीका तक की चिट्ठी. उस श्रोता को प्यार जिन्होंने दिया तीन ताल को 'हेराफेरी' का नाम. भय का निदान और बिड़ला होस्टल की याद.

प्रड्यूसर: शुभम तिवारी
साउंड मिक्सिंग: सचिन द्विवेदी

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