झूठी क़समों की यादें, जूते बचाने का मोह और धार्मिक ठगों के अलबेले क़िस्से: तीन ताल, Ep 39

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तीन ताल के 39वें एपिसोड में कमलेश 'ताऊ', पाणिनि 'बाबा' और कुलदीप 'सरदार' से सुनिए:

- ताऊ के सफ़र का बनारस में पड़ाव और रास्ते के मशहूर ढाबे.

- हमारे यहाँ कौन खुलकर हँसता है और कौन नहीं, इसका पता लगा पाना कितना आसान, कितना कठिन.

- ख़ास लोग शपथ लेते हैं और आम लोग क़सम खाते हैं. कैसी है, शपथ, क़सम, संकल्प, प्रण, प्रतिज्ञा और हलफ की दुनिया.

- झूठी कसम के क़िस्से और चकमा देने की तरकीबें.

- बाबा ने क्यों कहा कि कसम खाने वाले दया के पात्र हैं और कसम की आधारशिला ही झूठ होनी चाहिए.
- बिज़ार ख़बर में तमिलनाडु के उन मंत्री का ज़िक्र जिनकी धोती और जूते गंदे न हो इसलिए वे एक मछुआरे के कंधे पर सवार हो गए. इस बहाने कंधों पर चढ़ने और जूते बचाने के मोह पर बात.

- बात धार्मिक नगरियों के अलबेले ठगों की. बनारस वाले, वृंदावन वाले, देवघर और गया वाले, गमछा वाले और चादर वाले किन किन तरकीबों से ठगते हैं. बाबा को क्यों सरदार ने ठगों का सरगना कहा ?
- सरदार का कालका जी मन्दिर में संस्थागत भ्रष्टाचार का अनुभव और उस ठग की स्मार्टनेस का क़िस्सा जिसने बाबा के हित-मित्रों को चूना लगा दिया. ताऊ की धार्मिक ठगी को संस्थागत करने की माँग.

- और 'न्योता वाले श्रोता' में संस्कृत और दर्शन के विद्वान कोलेन्द्रदास जी की पाती और उस पर ताऊ और बाबा का जवाब.

प्रड्यूसर : शुभम तिवारी

साउंड मिक्सिंग : कपिल देव सिंह

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