754: रंगा और बिल्ला के जीवन के आखिरी क्षण

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हाल ही में सुनील गुप्ता और सुनेत्रा चौधरी की एक किताब प्रकाशित हुई है ‘ब्लैक वॉरंट - कनफ़ेशंस ऑफ़ अ तिहाड़ जेलर’ जिसमें फाँसी पाए अपराधियों के अंतिम क्षणों का वर्णन किया गया है. 1982 में जब ख़ूँख़ार अपराधियों रंगा और बिल्ला को फाँसी दी गई थी तो सुनील गुप्ता वहाँ मौजूद थे. कौन थे रंगा और बिल्ला ? उन्होंने कौन सा अपराध किया था जिसने दिल्ली को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया था ? रंगा और बिल्ला को फाँसी देते समय क्या क्या हुआ था बता रहे हैं रेहान फ़ज़ल विवेचना में

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