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स्वतंत्र पार्टी की पहेली। Swatantra Party in Independent India ft. Aditya Balasubramanian

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आज़ादी के बाद भारत में जो राजनीतिक पार्टियां उभर कर आ रही थी उसमें से एक थी राजाजी द्वारा स्थापित स्वतंत्र पार्टी। उनकी कोशिश थी की आज़ादी के बाद के भारत में कांग्रेस की योजनाबद्ध व्यवस्था के सामने स्वतंत्र आर्थिक नीति के समर्थन में एक प्रतिपक्ष रखा जाये। क्या थी इस स्वतंत्र पार्टी की विचारधारा और उसकी राजनीति? जिस समय देश में समाजवादी विचारधारा का प्रभुत्व था उस समय अमरीका की लिबर्टेरियन विचारधारा से प्रभावित पार्टी कैसे उभर कर आ पायी?

हमें तो ये कहानी एक गुत्थी की तरह लगी जो हमारे मेहमान आदित्य बालसुब्रमन्यन अपनी किताब और इस पुलियाबाज़ी में बख़ूबी सुलझाते हैं। हिंदी में बोलने के आदी न होने के बावजूद आदित्य ने हिंदी में बात करने का विशेष प्रयत्न किया उस के लिए उन्हें शुक्रिया।

Join us in this conversation as we try to understand the origins and ideology of the Swatantra party, which was an attempt at offering effective opposition to Congress’s one party dominance in post-independence India. The party, founded by C. Rajagopalachari who famously formulated the term ‘Licence Permit Raj’, was influenced by libertarian thought and rallied behind the promise of a free economy in contrast to the planned economy of the erstwhile Congress government.

But history is seldom that straightforward. This story and its characters also have many shades. Listen patiently as our guest Aditya Balasubramanian narrates a comprehensive picture of the Swatantra party and its politics.

We discuss:

* Understanding the roots of liberalisation

* Emerging ideologies after independence

* Free Economy vs Free Markets

* Policy changes after independence

* How did they gather electoral strength

* Rallying around private property rights

* C. Rajagopalachari’s involvement in Swatantra

* Difference between theory and practice

* The decline of Swatantra

* The use of print public sphere

Readings:

Toward a Free Economy by Aditya Balasubramanian

Listen to related Puliyabaazi:

भारत में बैंकिंग : हुंडी से सरकारीकरण तक. History of Indian Banking Part 1.

आज़ादी की राह: स्वदेशी बनाम खुले व्यापार की १५० साल पुरानी बहस। Historical Debate on Swadeshi vs Free Trade

If you have any questions for the guest or feedback for us, please comment here or write to us at puliyabaazi@gmail.com. If you like our work, please subscribe and share this Puliyabaazi with your friends, family and colleagues.

Website: https://puliyabaazi.in

Hosts: @saurabhchandra @pranaykotas @thescribblebee

Guest: @Aditya_Balasub

Twitter: @puliyabaazi

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* Rallying around private property rights

* C. Rajagopalachari’s involvement in Swatantra

* Difference between theory and practice

* The decline of Swatantra

* The use of print public sphere

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