Ep. 73: 1857 की लड़ाई का आँखों देखा हाल

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It’s rare to find a narration of earthshaking political events by a commoner of those times. That’s precisely why Vishnu Bhat Godse Varsaikar’s Maazaa Pravaas is special. This book provides an eyewitness account of the 1857 mutiny. In this puliyabaazi, we discuss a few counter-intuitive and lesser-known facts from that era based on Varsaikar’s account.

१८५७ की लड़ाई से हर भारतीय कुछ हद तक तो वाक़िफ़ ज़रूर है | कुछ लोगों ने इसे ग़दर कहा तो कुछ लोगों ने इसे आज़ादी की पहली जंग की उपाधि दी | लेकिन इस लड़ाई का आँखों देखा वर्णन मिल जाए तो? ऐसा ही कुछ हमें विष्णु भट्ट वरसैकर की नायाब किताब ‘माझा प्रवास’ में देखने मिलता है | तो इस पुलियाबाज़ी में हमने इस किताब की मदद से १८५७ के भारत की राजनीति, समाज, और रहन-सहन समझने की कोशिश की |

Readings:

  1. 1857: The Real Story of the Great Uprising, translation by Mrinal Pande

  2. Maazaa Pravaas (Marathi) by Vishnubhatt Godse

  3. Adventures of a Brahmin Priest: My Travels in the 1857 Rebellion - Mazha Pravas, translation by Priya Adarkar and Shanta Gokhale

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