परमात्मा मझधार है (अध्यात्म उपनिषद - दूसरा प्रवचन)

2:11:29
 
साझा करें
 

Manage episode 299990711 series 2914377
Oshō - ओशो द्वारा - Player FM और हमारे समुदाय द्वारा खोजे गए - कॉपीराइट प्रकाशक द्वारा स्वामित्व में है, Player FM द्वारा नहीं, और ऑडियो सीधे उनके सर्वर से स्ट्रीम किया जाता है। Player FM में अपडेट ट्रैक करने के लिए ‘सदस्यता लें’ बटन दबाएं, या फीड यूआरएल को अन्य डिजिटल ऑडियो फ़ाइल ऐप्स में पेस्ट करें।

अंतः शरीरे निहतो गुहायामज एको नित्यमस्य। पृथिवी शरीरं यः पृथिवीमंतरे संचरन् यं पृथिवी न वेद। यस्यापः शरीरं योऽपोऽन्तरे संचरन् यमापो न विदुः। यस्य तेजः शरीरं यस्तेजोऽन्तरे संचरन् यं तेजो न वेद। यस्य वायुः शरीरं यो वायुमन्तरे संचरन् यं वायुर्न वेद। यस्याकाशः शरीरं य आकाशमन्तरे संचरन् यमाकाशो न वेद। यस्य मनः शरीरं यो मनोऽन्तरे संचरन् यं मनो न वेद। यस्य बुद्धिः शरीरं यो बुद्धिमन्तरे संचरन् यं बुद्धिर्न वेद। यस्याहंकारः शरीरं योऽहंकारमन्तरे संचरन् यमहंकारो न वेद। यस्य चित्त शरीरं यश्चित्तमन्तरे संचरन् यमचित्तं न वेद। यस्याव्यक्तं शरीरं योऽव्यक्तमन्तरे संचरन् यमव्यक्तं न वेद। यस्याक्षरं शरीरं योऽक्षरमन्तरे संचरन् यमक्षरं न वेद। यस्य मृत्युः शरीरं यो मृत्युमन्तरे संचरन् यं मृत्युर्न वेद। स एष सर्वभूतान्तरात्माऽपहतपाप्मा दिव्यो देव नारायणः। अहं समेति यो भावो देहाक्षाद्यवनात्मनि। अध्यासो यं निरस्तव्यो विदुषा ब्रह्मनिष्ठया।। 1।।

283 एपिसोडस