उचित लज्जा क्या है/What Is Well-Placed Shame?

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उचित लज्जा क्या है?

What Is Well-Placed Shame?

क्योंकि जब तुम पाप के दास थे तो धार्मिकता की ओर स्वतन्त्र थे। जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो उनसे उस समय पर क्या लाभ प्राप्त करते थे? क्योंकि उनका परिणाम तो मृत्यु है। (रोमियों 6:20-21)

जब एक ख्रीष्टीय की आँखे अपने पुराने व्यवहार द्वारा परमेश्वर का अनादर करने वाली दुष्टता के प्रति खोली जाती हैं, तो वह ख्रीष्टीय उचित रीति से लज्जा का आभास करता है। पौलुस रोम की कलीसिया से कहता है, “जब तुम पाप के दास थे . . . जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो उनसे उस समय पर क्या लाभ प्राप्त करते थे?”

बीती बातों के विषय में मुड़कर देखने और पीड़ा की चुटकी को अनुभव करने का एक उचित स्थान है कि हम एक समय ऐसा जीवन जी रहे थे जो परमेश्वर का अत्यधिक अनादर करने वाला था। यह सच है, कि इस बात पर विचार करते रहने के द्वारा हमें लकवाग्रस्त नहीं होना चाहिए। किन्तु एक संवेदनशील ख्रीष्टीय का हृदय युवावस्था की मूर्खता के विषय में बिना लज्जा की गूँज को अनुभव किये नहीं सोच सकता है, भले ही प्रभु के साथ हमारा उचित सम्बन्ध हो।

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