Thokar Par Likha Hain Jeene Ka Saliqa | ठोकर पर लिखा है जीने का सलीका |

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Thokar Par Likha Hain Jeene Ka Saliqa | ठोकर पर लिखा है जीने का सलीका | एक ऐसे इंसान की कहानी जो मुंबई की धारावी झोपड़पट्टी में पला बड़ा हुआ , ज़िन्दगी ने कई ठोकरे दी गिरा और संभाला भी। कभी भूख प्यास ने सताया तो कभी लोगो ने ,गरीबी का यही इम्तेहान है वो तरसाती रहती है। पर उस लड़के के पास दुसरो को हंसाने का हुनर था फिर क्या वो पहुँच गया फ़िल्मी दुनिया के फलक पर। फिर क्या हुआ ? आइये जानते है। The story of a man who grew up in the Dharavi slum of Mumbai, life dropped and handled many things. Sometimes hunger thirsted, sometimes people persecuted, this is the test of poverty. But that boy had the skills to make others laugh, then did he reach the stage of the film world? What happened then ? Let's know

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