सोच गुलाम है फिर आजादी का जश्न किस लिए है ?

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हम जिस स्वतंत्र भारत में रहते है , वो आजभी स्वतंत्र नहीं है , यहां कई जयचंद है , कई औरंगजेब है , और कई फिरंगी भी है। जबतक ये मानस इस धर्म भूमि पर है , तबतक नाही हिन्दू राष्ट्र , वैदिक, अथवा सनातन धर्म की कोरी कल्पना साकार हो पायेगी ।

जागरण आवश्यक है , आज ही हमे उठना होगा और कुचलनि होगी मुग़ल सोच को , अंग्रजी सोच को, घर घर से सरदार पटेल , भगत सिंह , शिवजी , सुभाष चंद्र बॉस को जागना होगा। आज नहीं कल कभी नहीं आएगा। The independent India that we live in is still not independent, there are many Jaychand, many Aurangzeb, and many Firangi. As long as this psyche is on this land of religion, only the imagination of Hindu nation, Vedic, or Sanatan Dharma will be realized.

Awakening is necessary, today we will have to get up and crush Mughal thinking, English thinking, Sardar Patel, Bhagat Singh, Shivji, Subhash Chandra Boss will have to wake up from house to house. Not today, tomorrow will never come.

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