मन की अधिक ना सुनो Don't listen too much

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मन की अधिक ना सुनो | Don't listen too much | मन तो बौराई है उसका क्या ठिकाना , उसका कोई आता पता नहीं। वो तो एक पवन का झोका सा है कभी फूलो में तो कभी कीचड़ में रहता है। वो हमे कभी रुकने नहीं देता। जब की आत्मा उसका दूसरा स्वरुप है जो शांत होकर हमे जीवन जीने का सन्देश देता है। Nobody knows what his whereabouts are like. He is like a wind, sometimes in flowers and sometimes in mud. He never lets us stop. When the soul is the second form of it, which gives the message of calm and living life to us

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