लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती | Lehron Se Dar Kar Nauka Paar Nahi Hoti

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लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती | Lehron Se Dar Kar Nauka Paar Nahi Hoti | राष्ट्रीय कवि सोहनलाल द्विवेदी की रचना में जीवन की सफलता का रहस्य छुपा है। मनुष्य को सिख मिलती है , की छोटी सी ठोकर से गिर जाए तो फिरसे उठकर आगे चलना ही जीवन है , रुकना तो मौत है। " बैठ जाता हूँ मिट्टी पे अक्सर " एक अनामी कवि की रचना है।जो हमें निरभिमान होकर जीवन रहने की सिख देता है।

The boat does not cross due to fear of the waves. Lehron Se Dar Kar Nauka Paar Nahi Hoti | The secret of success of life is hidden in the composition of the national poet Sohanlal Dwivedi. A man finds a Sikh, that if he falls from a small stumbling block, he has to rise again and walk forward, to stop is death. "I sit down on the soil often" is the creation of an unnamed poet who teaches us to live life without fear.

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