कोई कितने ही फल तोड़े, पेड़ को तो बस फलते ही जाना है।

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कोई कितने ही फल तोड़े, पेड़ को तो बस फलते ही जाना है। इस छोटी सी प्रेरक कहानी में, किसी पेड़ से फल तोड़ कर उसे बेझार छोड़ देना स्वार्थी मनुष्य स्वाभाव का एक उदाहरण है। किसी के उपकार को हम थैंक यू भले ना कहे , पर उसके दिल को ठेस तो ना पहुचाये , ये दुनिया भावना के अभावो में जीने लगी है। इसी लिए लोगो को कदम कदम पर चोंट मिलती है। क्यों की हमारी सुख व्यवस्था ने हमे मशीनी बना दिया है। और जो जड़ होता है उसमे संवेदना नहीं होती। कहि हमने संवेदना खो दी है अथवा खोते चले जा रहे है। सभी ऐसे नहीं है , पर बहुतायत में, दिखाई दे रहे है, क्या इसे हम मानवता कहगे , जी नहीं कहि ना कहि मशीनी एजुकेशन ने हमे भावनाविहीन मौड़ पर खड़ा कर दिया है। No matter how many fruits are harvested, the tree has to go on growing. In this short inspiring story, breaking fruit from a tree and leaving it untainted is an example of selfish human nature. We may not say thank you to anyone's benefit, but do not hurt his heart, this world has started living in the absence of emotion. That is why people get a choice on the steps. Because our pleasure system has made us mechanistic. And the root is not in it. Say that we have lost sensation or are going on losing. Not all are like this, but in abundance, we are seeing it, shall we call it humanity, no, no, no, mechanical education has made us stand on emotionless mood.

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