कभी कभी आदमी उसके दिन को बुरा बना लेता है। Kabhi Kabhi Admi Uske Din Ko Bura Banaa Leta Hai .

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कभी कभी आदमी उसके दिन को बुरा बना लेता है। Kabhi Kabhi Admi Uske Din Ko Bura Banaa Leta Hai .मनुष्य स्वभाव से ही भविष्य दृष्ट्रा रहा है , वो आजकी नहीं कल की चिंता में डूबा रहता है। पर वो ये भी तो जनता की चिंता से काम संवरते नहीं बिगते है। जब आपकी सोच नकारत्मकता के चिंतन से घिर जाएगी तो वो सही परिणाम कैसे दे सकती है। ये बात अच्छी तरह से समझनी होगी। मै कुमार अभिषेक, आपके सामने एक समझदारवाली बात लेकर आया हूँ। सुनते रहे धन्यवाद

Man is looking at the future by nature, he is immersed in the worries of tomorrow, not today. But they also do not spoil the work due to public concern. When your thinking is surrounded by the thinking of negativity then how can it give the right result. This thing has to be understood well. I have brought before you a sensible thing, Kumar Abhishek. Keep listening thank you

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