भजन: रे मन हरि सुमिरन कर लीजै

 
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Bhajan: re man hari sumiran kar leeje
मंगल भवन अमंगल हारी
द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी
रे मन, हरि सुमिरन कर लीजै ।
हरि सुमिरन कर लीजै ।
हरि सुमिरन कर लीजै ।
हरिको नाम प्रेमसों जपिये, हरिरस रसना पीजै ।
हरिगुन गाइय, सुनिय निरंतर, हरि-चरननि चित दीजै ॥
हरि-भगतनकी सरन ग्रहन करि, हरिसँग प्रीति करीजै ।
हरि-सम हरि जन समुझि मनहिं मन तिनकौ सेवन कीजै ॥
हरि केहि बिधिसों हमसों रीझै, सो ही प्रश्न करीजै ।
हरि-जन हरिमारग पहिचानै, अनुमति देहिं सो कीजै ॥
हरिहित खाइय, पहिरिय हरिहित, हरिहित करम करीजै ।
हरि-हित हरि-सन सब जग सेइय, हरिहित मरिये जीजै ॥
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maMgal bhavan amaMgal hArI
drava_u so dasrath ajir bihArI
re man hari sumiran kar lIjai |
hariko nAm premsoM japiye, hariras rasnA pIjai |
harigun gAiy, suniy niraMtar, hari-charanni chit dIjai ||
hari-bhagatankI saran grahan kari, haris.Ng prIti karIjai |
hari-sam hari jan samujhi manhiM man tinakau sevan kIjai ||
hari kehi bidhisoM hamsoM rIjhai, so hI prashn karIjai |
hari-jan harimArag pahichAnai, anumti dehiM so kIjai ||
harihit khAiy, pahiriy harihit, harihit karam karIjai |
hari-hit hari-san sab jag seiy, harihit mariye jIjai ||

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