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लोग भूल जाते हैं दहशत जो लिख गया कोई किताब में / Log Bhool Jaate Hain Dahashat jo Likh Gaya Koi Kitaab men - रघुवीर सहाय / Raghuvir Sahay
 
प्रस्तुत है गोपालदस नीरज की कविता 'मैं सोच रहा हूँ अगर तीसरा युद्ध हुआ तो'.
 
Chhabbees Janwary Pandrah August / छब्बीस जनवरी पंद्रह अगस्त - बाबा नागार्जुन
 
Aaj dikhi phir mujhe gilhari / आज दिखी फिर मुझे गिलहरी - केदारनाथ अग्रवाल
 
Main tum logon se door hoon / मैं तुम लोगों से दूर हूँ - गजानन माधव मुक्तिबोध
 
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