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Nothing Is IMpossible

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Pankaj Kotiyal

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विभिन्न प्रकार की पुस्तकों का विवरण जिसमे प्रेरणात्मक, साहित्यिक, ऐतिहासिक, सूचना प्रौद्योगिकी जैसे पहलुओं पर आधारित है
 
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संविधान सभा की मांग को मान संविधान सभा का गठन कॉमर्स संविधान सभा की कार्यप्रणाली, संविधान सभा की समितियां कॉमर्स संविधान का प्रभाव में आना कॉमर्स संविधान का प्रवर्तन, कांग्रेस की विशेषज्ञ समिति कामा संविधान सभा की आलोचना आवश्यक तथ्य, संविधान का हिंदी पाठ
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - भौतिक प्रकृति के तीन गुणों से तीन प्रकार की श्रद्धा उत्पन्न होती है। रजोगुण तथा तमोगुण में श्रद्धा पूर्वक किए गए कर्मों से अस्थाई फल प्राप्त होते हैं, जबकि शास्त्र सम्मत विधि से सतोगुण में…
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - शास्त्रों के नियमों का पालन न करके मनमाने ढंग से जीवन व्यतीत करने वाले तथा आसुरी गुणों वाले व्यक्ति अधम योनियों को प्राप्त होते हैं और आगे भी वह बंधन में पड़े रहते हैं। किंतु देवी गुणों से…
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - वैदिक ज्ञान का चरम लक्ष्य अपने आप को भौतिक जगत के पास से विलग करना तथा कृष्ण को भगवान मानना है। जो कृष्ण के परम स्वरूप को समझ लेता है, वह उनकी शरण ग्रहण करके उनकी भक्ति में लग जाता है।…
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - सारे देहधारी जीव भौतिक प्रकृति के तीन गुणों के अधीन है यह हैं सदगुण, रजोगुण तथा तमोगुण। कृष्ण बतलाते हैं कि यह गुण क्या है? यह हम पर किस प्रकार क्रिया करते हैं? कोई इनको कैसे पार कर सकता ह…
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - जो व्यक्ति शरीर, आत्मा तथा इनसे भी परे परमात्मा के अंतर को समझ लेता है, उसे इस भौतिक जगत से मोक्ष प्राप्त होता है।
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - कृष्ण के शुद्ध प्रेम को प्राप्त करने का सबसे सुगम एवं सर्वोच्च साधन भक्ति योग है। इस परम पद का अनुसरण करने वाले में दिव्य गुण उत्पन्न होते हैं।…
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - भगवान कृष्ण अर्जुन को दिव्य दृष्टि प्रदान करते हैं और विश्वरूप में अपना अद्भुत असीम रूप प्रकट करते हैं। इस प्रकार वे अपनी दिव्यता स्थापित करते हैं। कृष्ण बतलाते हैं कि उनका सर्व आकर्षक मान…
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - बल, सौंदर्य, ऐश्वर्य या उत्कृष्टता प्रदर्शित करने वाले समस्त अद्भुत घटनाएं, चाहे वे इस लोक में हो या आध्यात्मिक जगत में, कृष्ण की दैवी शक्तियों एवं ऐश्वर्य की आंशिक अभिव्यक्तिया हैं। समस्त…
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - भगवान श्री कृष्ण परमेश्वर है और पूज्य हैं। भक्ति के माध्यम से जीव उनसे सास्वत संबंध है। शुद्ध भक्ति को जागृत करके मनुष्य कृष्ण के धाम को वापस जाता है।…
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - भक्ति पूर्वक भगवान कृष्ण का आजीवन स्मरण करते रहने से और विशेषता या मृत्यु के समय ऐसा करने से मनुष्य परमधाम को प्राप्त कर सकता है।
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - भगवान कृष्ण समस्त कारणों के कारण, परम सत्य है। महात्मा गण भक्ति पूर्वक उनकी शरण ग्रहण करते हैं, किंतु अपवित्र जन पूजा के अन्य विषयों की ओर अपने मन को मोड़ देते हैं।…
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - अष्टांग योग मन तथा इंद्रियों को नियंत्रित करता है और ध्यान को परमात्मा पर केंद्रित करता है। इस विधि की परिणिति समाधि में होती है।
 
गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - ज्ञानी पुरुष दिव्य ज्ञान की अग्नि से शुद्ध होकर बाहर सारे कर्म करता है किंतु अंतर में उन कर्मों के फल का परित्याग करता हुआ शांति, विरक्ति, आध्यात्मिक दृष्टि तथा आनंद की प्राप्ति करता है…
 
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