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The Daily Buzz

Dhiren Pathak

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मासिक+
 
Welcome to The Daily Buzz the podcast that brings you the latest news and trends from around the world. I’m your host dhiren pathak , bhuj gujarat in india , and we’ll be discussing the biggest stories making headlines.Make interviews the daily buzz top in the day you will new short stories of the day, daily Technology talk , investment guide , health topic , talk on movie rating We’ll be discussing each of these topics in detail, so stay tuned. That's all for heart of podcast's show in The ...
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Pratidin Ek Kavita

Nayi Dhara Radio

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रोज
 
कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
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Hindustan Daily News Wrap

livehindustan - HT Smartcast

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साप्ताहिक+
 
खबरें कभी रुकती नहीं, चाहे जो हो जाये। इसीलिए हम लेकर आएंगे आपके लिए राजनीति, व्यवसाय, खेल और मनोरंजन की दुनिया की खबरें; हर सुबह और शाम, बीटा परीक्षण पहल के भाग के रूप में। यह एक हिंदुस्तान प्रोडक्शन है और आप सुन रहे है एचटी स्मार्टकास्ट।
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Din Bhar

Aaj Tak Radio

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मासिक+
 
Din Bhar is a daily news analysis podcast in Hindi language presented by Aaj Tak Radio. It covers issues ranging from Politics and international relations to health, society, cinema and sports. Did your regular prime time debate miss something that really matters to you? Close your day with Din Bhar, wherein we pick four big news stories of the day and analyse them with help of experts in a manner that is easy to understand. दिन भर के शोर के बाद शाम ढल गई है. हमारे यहां आइए. ख़बरों के सबसे अ ...
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Nayidhara Ekal

Nayi Dhara Radio

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मासिक+
 
साहित्य और रंगकर्म का संगम - नई धारा एकल। इस शृंखला में अभिनय जगत के प्रसिद्ध कलाकार, अपने प्रिय हिन्दी नाटकों और उनमें निभाए गए अपने किरदारों को याद करते हुए प्रस्तुत करते हैं उनके संवाद और उन किरदारों से जुड़े कुछ किस्से। हमारे विशिष्ट अतिथि हैं - लवलीन मिश्रा, सीमा भार्गव पाहवा, सौरभ शुक्ला, राजेंद्र गुप्ता, वीरेंद्र सक्सेना, गोविंद नामदेव, मनोज पाहवा, विपिन शर्मा, हिमानी शिवपुरी और ज़ाकिर हुसैन।
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Bihar ki Khabrein

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बिहार के बारे में निष्पक्ष जानकारी देने वाले इस पॉडकास्ट में, आपको 'बिहार राज्य की ख़बरें' सुनाई जाएंगी। यहाँ पर राजनीति, क्राइम, मनोरंजन, साहित्य, और अन्य कई अहम ख़बरें मिलेंगी। लाइव हिंदुस्तान के इस पॉडकास्ट में आप हर रोज़ सुने विकास और राजनीति से जुड़ी खबरें।
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Kanpur Smart News

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मासिक
 
चमड़े के शहर कानपुर में आज क्या हुआ ख़ास, सुनिए कानपुर स्मार्ट न्यूज़ में. कानपुर की ताज़ा तेज़ तर्रार खबरें सुनिए लाइव हिंदुस्तान के संवाददाताओं से| आप सुन रहे हैं एच टी स्मार्टकास्ट और ये है लाइव हिंदुस्तान प्रोडक्शन |
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Ikka-Dukka, Economy

IVM Podcasts

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मासिक
 
इक्का-दुक्का इकॉनमी पॉडकास्ट पर अभिनव त्रिवेदी और उद्योग विशेषज्ञ बड़ी ही आसान और मनमोहक भाषा में बात करते हैं आर्थिक शब्दजालो, मुद्दों और विषयों की, और उनको जोड़ते हैं आप की जेभ से,आप की सैलरी से, आप की सफलता से, और आप की ज़िन्दगी से I आर्थिक विषय की जानकारी जरूरी तो होती हैं, हैं, पर यह हमारी रोज़ की ज़िन्दगी पर क्या असर डालते हैं, इस बारे में हम आमतौर पर अनभिज्ञ रहते हैं I ये पॉडकास्ट हमारी उस अनभिज्ञता को दूर करने की तरफ एक कोशिश हैंI हर मंगलवार एक नयें एपिसोड के साथ अपने ज्ञान कोष में एक नया ...
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Agra Smart News

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मासिक
 
ताजमहल के शहर आगरा में आज क्या हुआ ख़ास, सुनिए आगरा स्मार्ट न्यूज़ में. आगरा की ताज़ा तेज़ तर्रार खबरें सुनिए लाइव हिंदुस्तान के संवाददाताओं से| आप सुन रहे हैं एच टी स्मार्टकास्ट और ये है लाइव हिंदुस्तान प्रोडक्शन |
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Lucknow Smart News

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मासिक
 
राजधानी लखनऊ में आज क्या हुआ ख़ास, सुनिए लखनऊ स्मार्ट न्यूज़ में. लखनऊ की ताज़ा तेज़ तर्रार खबरें सुनिए लाइव हिंदुस्तान के संवाददाताओं से| आप सुन रहे हैं एच टी स्मार्टकास्ट और ये है लाइव हिंदुस्तान प्रोडक्शन |
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Fact Check

Aaj Tak Radio

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रोज
 
Fact Check is a daily Hindi podcast by Aaj Tak Radio where we fight fake news often viral on whatsapp, facebook, twitter and other social media platforms. India Today’s Fact Check Editor debunks fake news stories and also explains various fact check methods, tools and practices to help the listeners identify and cross check before they blindly believe on a forwarded message or a social media post. ख़बरों की नदी में अफ़वाहों का प्रदूषण भी बहकर चला आता है. तो यूं समझिए कि हमारा ये सेक्शन एक छन ...
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The Family Podcast

Shiwalay

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मासिक
 
हम दोनों स्वप्निल और सोनू शिवालय आप सभी का स्वागत करते है अपने इस "द फॅमिली पॉडकास्ट" में, ये हमारा एक छोटा सा प्रयास है आप सभी लोगो से जुड़ने का हमारे अनुभव आप सभी लोगो तक शेयर करने का ... हम अपने जीवन के कुछ पल आप लोगो के साथ रोज़ शेयर करते है ... उन्मीद है की आप सभी को पसंद आते होंगे .... हमारा उद्देश्य अपने जीवन को पूरे तरीके से जीना और लोगो को भी प्रेरित करना है, ताकि वो भी जीवन की सुंदरता को मह्सूस कर सके....और जीवन का भरपूर आनंद ले सके। 🙏 Share your voice notes on Spotify or send us a m ...
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show series
 
एक सफल ब्लॉग शुरू करने और उसे विकसित करने के लिए एकत्र किए गए स्रोत एक व्यापक मार्गदर्शिका प्रदान करते हैं, जिसमें रणनीतिक योजना, तकनीकी सेटअप और मुद्रीकरण पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। मुख्य बातें: सामग्री रणनीति (Content Strategy): इसमें एक मजबूत सामग्री रणनीति विकसित करने की आवश्यकता शामिल है जो लक्ष्यों, दर्शकों और एक सुसंगत प्रका…
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आओ, जल-भरे बरतन में । रघुवीर सहाय आओ, जल-भरे बरतन में झाँकें साँस से पानी में डोल उठेंगी दोनों छायाएँ चौंककर हम अलग-अलग हो जाएँगे जैसे अब, तब भी न मिलाएँगे आँखें, आओ पैठी हुई शीतल जल में छाया साथ-साथ भीगे झुके हुए ऊपर दिल की धड़कन-सी काँपे करती हुई इंगित कभी हाँ के, कभी ना के आओ जल-भरे बरतन में झाँके…
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औरत को चाहिए थी महज़ एक जेब। अदीबा ख़ानम औरत को चाहिए थी महज़ एक जेब उसमें चन्द खनकते सिक्के जिनके के बल पर आज़ाद करने थे कुछ ऐसे पंछी जो पीढ़ी दर पीढ़ी किसी महान षडयंत्र के तहत होते आए थे क़ैद चाभियाँ पल्लू में बाँध नहीं भाता उन्हें रानियों का स्वाँग उन चाभियों ने बन्द कर रखे हैं कई क़ीमती संदूक जिनमें बन्द हैं ख़ुद रानियाँ ही धूल फाँक रहीं गहनों की कि…
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अँधेरे के दिन । लक्ष्मीशंकर वाजपेयी बदल गए हैं अँधेरों के दिन अब वे नहीं निकलते सहमे, ठिठके, चुपके-चुपके रात के वक्त वे दिन-दहाड़े घूमते हैं बस्ती में सीना ताने, कहकहे लगाते नहीं डरते उजालों से बल्कि उजाले ही सहम जाते हैं इनसे अकसर वे धमकाते भी हैं उजालों को बदल गए हैं अँधेरों के दिन।द्वारा Nayi Dhara Radio
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कोई उम्मीद बर नहीं आती। मिर्ज़ा ग़ालिब कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती मौत का एक दिन मुअ'य्यन है नींद क्यूँ रात भर नहीं आती आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी अब किसी बात पर नहीं आती जानता हूँ सवाब-ए-ताअत-ओ-ज़ोहद पर तबीअत इधर नहीं आती है कुछ ऐसी ही बात जो चुप हूँ वर्ना क्या बात कर नहीं आती क्यूँ न चीख़ूँ कि याद करते हैं मेरी आवाज़ गर नहीं आती…
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इत्यादि - राजेश जोशी कुछ लोगों के नामो का उल्लेख किया गया था जिनके ओहदे थे बाकी सब इत्यादि थे इत्यादि तादात में हमेशा ही ज़्यादा होते थे इत्यादि भाव ताव कर के सब्जी खरीदते थे और खाना वाना खा कर ख़ास लोगों के भाषण सुनने जाते थे इत्यादि हर गोष्ठी में उपस्थिति बढ़ाते थे इत्यादि जुलूस में जाते थे तख्तियां उठाते थे नारे लगाते थे इत्यादि लम्बी लाइनों में लग…
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बात की बात । शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ इस जीवन में बैठे ठाले ऐसे भी क्षण आ जाते हैं जब हम अपने से ही अपनी बीती कहने लग जाते हैं। तन खोया-खोया-सा लगता मन उर्वर-सा हो जाता है कुछ खोया-सा मिल जाता है कुछ मिला हुआ खो जाता है। लगता; सुख-दुख की स्मृतियों के कुछ बिखरे तार बुना डालूँ यों ही सूने में अंतर के कुछ भाव-अभाव सुना डालूँ कवि की अपनी सीमाऍं है कहता जितन…
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भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है। अदम गोंडवी भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है अहले हिंदुस्तान अब तलवार के साये में है छा गई है ज़ेहन की पर्तों पे मायूसी की धूप आदमी गिरती हुई दीवार के साये में है बेबसी का इक समंदर दूर तक फैला हुआ और कश्ती काग़ज़ी पतवार के साये में है हम फ़क़ीरों की न पूछो मुतमइन वो भी नहीं जो तुम्हारी गेसुए-ख़मदार के सा…
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विष्णु नागर । सबसे अच्छी कविता सबसे अच्छी कविता इतनी विनम्र होगी कि अविश्वसनीय लगेगी इतनी प्राकृतिक होगी कि हिन्दी लगेगी इतने दुखों में काम आएगी कि लिखी हुई नहीं लगेगी सबसे अच्छी कविता सबसे बुरे दिनों में याद आएगी उसे जो कंठ गाएगा मीठा लगेगा सबसे अच्छी कविता विकल कर देगी मुक्ति के लिए सबसे अच्छी कविता सबसे अच्छी बंदूक़ का सबसे बुरा झगड़ा साबित होगी…
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मैं फूल । गोपालदास "नीरज" निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल ! कल अधरों में मुस्कान लिए आया था, मन में अगणित अरमान लिए आया था, पर आज झर गया खिलने से पहले ही, साथी हैं बस तन से लिपटे दो शूल ! निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल !द्वारा Nayi Dhara Radio
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तन्हाई । शहरयार अँधेरी रात की इस रहगुज़र पर हमारे साथ कोई और भी था उफ़ुक़* (क्षितिज) की सम्त* (दिशा) वो भी तक रहा था उसे भी कुछ दिखाई दे रहा था उसे भी कुछ सुनाई दे रहा था मगर ये रात ढलने पर हुआ क्या हमारे साथ अब कोई नहीं हैद्वारा Nayi Dhara Radio
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शब्द और अर्थ के बीच। गायत्रीबाला पंडा शब्द और अर्थ के बीच एक नारी ही बदल जाती है लंबे इंतज़ार में। ख़ुद को कोड़ती है बीज बोती है अनाज उपजाती है धरती को सदाबहार बनाती है और जीवनभर किसी न किसी की छाया में बैठकर एक इंसान बनने की अथक प्रतीक्षा करती है।द्वारा Nayi Dhara Radio
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आँखें देखकर । गोरख पांडेय ये आँखें हैं तुम्हारी तकलीफ़ का उमड़ता हुआ समुंदर इस दुनिया को जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए।द्वारा Nayi Dhara Radio
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विद्रोह करो, विद्रोह करो। शिवमंगल सिंह 'सुमन' आओ वीरोचित कर्म करो मानव हो कुछ तो शर्म करो यों कब तक सहते जाओगे, इस परवशता के जीवन से विद्रोह करो, विद्रोह करो। जिसने निज स्वार्थ सदा साधा जिसने सीमाओं में बाँधा आओ उससे, उसकी निर्मित जगती के अणु-अणु कण-कण से विद्रोह करो, विद्रोह करो। मनमानी सहना हमें नहीं पशु बनकर रहना हमें नहीं विधि के मत्थे पर भाग्य…
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मुझे अब डर नहीं लगता | मोहसिन नक़वी किसी के दूर जाने से तअ'ल्लुक़ टूट जाने से किसी के मान जाने से किसी के रूठ जाने से मुझे अब डर नहीं लगता किसी को आज़माने से किसी के आज़माने से किसी को याद रखने से किसी को भूल जाने से मुझे अब डर नहीं लगता किसी को छोड़ देने से किसी के छोड़ जाने से ना शम्अ' को जलाने से ना शम्अ' को बुझाने से मुझे अब डर नहीं लगता अकेले म…
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पुराना घर। गोबिंद प्रसाद पुराना घर इतना पुराना कि कभी पुराना नहीं होता कविता की उस किताब की तरह पंक्तियों के बीच ठहरे हुए किसी अनबीते की तरह मन में बसा रहता है यह पुराना घर पुराना घर आज भी कितना नया है इन आँखों में और आँखें ख़ुद कितनी नई हैं घर के इस पुरानेपन को देखने के लिए इसे कौन जानता है सिवा पुराने घर के...।…
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दुख | प्रियाँक्षी मोहन पिताओं के दुख माँओं के दुखों से मुख़्तलिफ़ होते हैं। वे कभी भी प्रत्यक्ष रूप से नहीं दिखते वे चूहों से झाँकते हैं अधजली सिगरेटों से खूटियों पर टंगी हुई थकी कमीज़ों से, पुरानी ऐनकों से, और बिजली व जल विभाग के निरंतर बह रहे बिलों सेद्वारा Nayi Dhara Radio
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फूले कदंब । नागार्जुन फूले कदंब टहनी-टहनी में कंदुक सम झूले कदंब फूले कदंब। सावन बीता बादल का कोप नहीं रीता जाने कब से तू बरस रहा ललचाई आँखों से नाहक जाने कब से तू तरस रहा मन कहता है,छू ले कदंब फूले कदंब फूले कदंब।द्वारा Nayi Dhara Radio
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नफ़ी | किश्वर नाहीद मैं थी आईना फ़रोश* (विक्रेता) कोह-ए-उम्मीद* (आशा का पहाड़) के दामन में अकेली थी ज़ियाँ* (नुक़्सान) कोशिश सुरय्या की थी हम-दोश मुझे हर रोज़ हमा-वक़्त* (हर समय) थी बस अपनी ख़बर मैं थी ख़ुद अपने में मदहोश मैं वो तन्हा थी जिसे पैर मिलाने का सलीक़ा भी न था मैं वो ख़ुद-बीं* (आत्म-मुग्ध) थी जिसे अपने हर इक रुख़ से मोहब्बत थी बहुत मैं वो…
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माँ । श्रीनरेश मेहता मैं नहीं जानता क्योंकि नहीं देखा है कभी— पर, जो भी जहाँ भी लीपता होता है गोबर के घर-आँगन, जो भी जहाँ भी प्रतिदिन दुआरे बनाता होता है आटे-कुंकुम से अल्पना, जो भी जहाँ भी लोहे की कड़ाही में छौंकता होता है मेथी की भाजी, जो भी जहाँ भी चिंता भरी आँखें लिए निहारता होता है दूर तक का पथ - वही, हाँ, वही है माँ!!…
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रात यूँ दिल में तिरी खोई हुई याद आई | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ रात यूँ दिल में तिरी खोई हुई याद आई जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए जैसे सहराओं में हौले से चले बाद-ए-नसीम जैसे बीमार को बे-वज्ह क़रार आ जाएद्वारा Nayi Dhara Radio
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नृत्य और परिकथाएँ | अन्वेषा राय 'मंदाकिनी' मेरे पाँव, बचपन से थिरकते रहे, किसी अनजान सवालिया धुन पर... मैं बढ़ती रही.. नाचती रही.. मेरे जीवन का उद्देश्य यह खोज भर रहा कि मेरे इस जीवन संगीत का उद्गम कहाँ है ?? मेरा यह कारवाँ जारी रहा... हर रोज़ मेरे पग उस संगीत की खोज में नृत्य करते चले गए !! मैं शायद नहीं जानती हूँ कि जीवन के किस रोज़ मेरा परी-कथाओ…
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मैं और मैं! | साक़ी फ़ारुक़ी मैं हूँ मैं वो जिस की आँखों में जीते जागते दर्द हैं दर्द कि जिन की हम-राही में दिल रौशन है दिल जिस से मैं ने इक दिन इक अहद (प्रतिज्ञा) किया था अहद कि दोनों एक ही आग में जलते रहेंगे आग कि जिस में जल कर जिस्म हुआ ख़ाकिस्तर (राख) जिस्म कि जिस के कच्चे ज़ख़्म बहुत दुखते थे ज़ख़्म कि जिन का मरहम वक़्त के पास नहीं है वक़्त कि जि…
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नमस्कार! आज हम बात करेंगे गुजरात में एक सहकारी मंडली (Sahakari Mandli) की स्थापना करने और उसे सफल बनाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं और प्रबंधन के बारे में।
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ठाकुर का कुआँ। ओमप्रकाश वाल्मीकि चूल्हा मिट्टी का मिट्टी तालाब की तालाब ठाकुर का। भूख रोटी की रोटी बाजरे की बाजरा खेत का खेत ठाकुर का। बैल ठाकुर का हल ठाकुर का हल की मूठ पर हथेली अपनी फ़सल ठाकुर की। कुआँ ठाकुर का पानी ठाकुर का खेत-खलिहान ठाकुर के गली-मुहल्ले ठाकुर के फिर अपना क्या? गाँव? शहर? देश?द्वारा Nayi Dhara Radio
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A co-op society is a voluntary association of individuals who pool resources to meet their common economic and social needs through a jointly owned and democratically controlled enterprise. These societies are based on the principle of "each for all and all for each," with members contributing equitably and having an equal say in decision-making, r…
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सूर्य और सपने।चंपा वैद सूर्य अस्त हो रहा है पहली बार इस मंज़िल पर खड़ी वह देखती है बादलों को जो टकटकी लगा देखते हैं सूर्य के गोले को यह गोला आग लगा जाता है उसके अंदर कह जाता है कल फिर आऊँगा पूछूँगा क्या सपने देखे?द्वारा Nayi Dhara Radio
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डोमेन सरल शब्दों में एक केंद्रीकृत सिस्टम है जो उपयोगकर्ताओं, कंप्यूटरों और संसाधनों (जैसे फाइल्स और प्रिंटर) का केंद्रीकृत मैनेजमेंट देता है। Windows में यह Active Directory (AD) के माध्यम से काम करता है — जो कि यूजर ऑथेंटिकेशन, ऑथराइज़ेशन और नीति (Group Policy) लागू करने का तरीका है।
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🏭 **INDUSTRY INSIDERS: The Ashapura Perfoclay Success Story** In this exclusive podcast, we sit down with Mr. Jayesh Thakkar, the visionary leader behind Ashapura Perfoclay Ltd's remarkable journey from a domestic startup to a global bleaching clay powerhouse. 🔍 **What You'll Learn:** • The 2001 startup challenges and foundation building • Quality …
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क्या हम सब कुछ जानते हैं । कुँवर नारायण क्या हम सब कुछ जानते हैं एक-दूसरे के बारे में क्या कुछ भी छिपा नहीं होता हमारे बीच कुछ घृणित या मूल्यवान जिन्हें शब्द व्यक्त नहीं कर पाते जो एक अकथ वेदना में जीता और मरता है जो शब्दित होता बहुत बाद जब हम नहीं होते एक-दूसरे के सामने और एक की अनुपस्थिति विकल उठती है दूसरे के लिए। जिसे जिया उसे सोचता हूँ जिसे सो…
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निःशब्द भाषा में। नवीन सागर कुछ न कुछ चाहता है बच्चा बनाना एक शब्द बनाना चाहता है बच्चा नया शब्द वह बना रहा होता है कि उसके शब्द को हिला देती है भाषा बच्चा निःशब्द भाषा में चला जाता है क्या उसे याद आएगा शब्द स्मृति में हिला जब वह रंगमंच पर जाएगा बरसों बाद भाषा में ढूँढ़ता अपना सच कौंधेगा वह क्या एक बार! बनाएगा कुछ या चला जाएगा बना-बनाया दीर्घ नेपथ्…
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आज हम बात कर रहे हैं भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक बहुत ही महत्वपूर्ण अभियान के बारे में, जिसका नाम है SIR यानी Special Intensive Revision या हिंदी में कहें तो विशेष गहन पुनरीक्षण। यह अभियान आपके वोटिंग लिस्ट को सही और पारदर्शी बनाने के लिए चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान, हर वोटर को एक एन्यूमरेशन फॉर्म (Enumeration Form) या गणना फॉर्म भरना …
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आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे टॉपिक पर जो हम सबका पसंदीदा है - करेंट फैशन ट्रेंड्स (current fashion trends)। फैशन की दुनिया हमेशा बदलती रहती है, और 2025 में भी कुछ बहुत ही रोमांचक और नए स्टाइल्स देखने को मिल रहे हैं। इस साल का फैशन मंत्र है - कम्फर्ट के साथ स्टाइल (Style with comfort) और सस्टेनेबिलिटी (sustainability)।…
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बेचैन चील। गजानन माधव मुक्तिबोध बेचैन चील!! उस-जैसा मैं पर्यटनशील प्यासा-प्यासा, देखता रहूँगा एक दमकती हुई झील या पानी का कोरा झाँसा जिसकी सफ़ेद चिलचिलाहटों में है अजीब इनकार एक सूना!!द्वारा Nayi Dhara Radio
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1. Introduction to Voice Cloning What is voice cloning technology? How AI can recreate human voices The rapid growth in artificial intelligence voice tech Deep learning models and neural networks Audio analysis: tone, pitch, speech patterns Creating "digital twins" of human voices Training on thousands of audio samples Entertainment Industry: Movie…
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यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है जिसने अपने जीवन में किए गए बुरे कर्मों का फल भुगता।नैतिक शिक्षा:इस कहानी की नैतिक शिक्षा यह है कि कर्म का सिद्धांत अकाट्य है। अच्छे कर्मों का फल अच्छा होता है और बुरे कर्मों का फल बुरा। मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए और किसी भी प्राणी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए।…
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मतलब है | पराग पावन मतलब है सब कुछ पा लेने की लहुलुहान कोशिशों का थकी हुई प्रतिभाओं और उपलब्धियों के लिए तुम्हारी उदासीनता का गहरा मतलब है जिस पृथ्वी पर एक दूब के उगने के हज़ार कारण हों तुम्हें लगता है तुम्हारी इच्छाएँ यूँ ही मर गईं एक रोज़मर्रा की दुर्घटना मेंद्वारा Nayi Dhara Radio
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त्वरित संदर्भ मार्गदर्शिका

अन्वेषण करते समय इस शो को सुनें
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