Contemporary सार्वजनिक
[search 0]
अधिक
Download the App!
show episodes
 
Loading …
show series
 
सरसों, बौरों,🌾 कोयल, भंवरों,🐝 तुम बिल के दायरे में भी हो।📜 हमारे ध्यान के शिकंजे में भी।💢
  continue reading
 
लोग पढ़ने को तैयार बैठे हैं📖 समय ही समय है उनके पास🕰️ लिखने भर की देर है✍️ तुम कुछ लिखो तो लेखकों 📝
  continue reading
 
पृथ्वी को लपेटा था तुमने 🌍 किसी ने तुम्हें लपेट दिया 👥 सांस लेना प्लास्टिक में 👹 कैसा होता है, पता तो चला 😩
  continue reading
 
बिना उसके सब रुक जाता है 🚫 दिल की धड़कन भी 💓 मानव शरीर की ये अनिवार्यता📱 अब आन्तरिक होनी चाहिए 🤳
  continue reading
 
बेकार लोग बेकार दिखते हैं 🥺 हमेशा बेकार कहलाते हैं ☹️ बेकार ही समझे जाते हैं 😬 और बेकार क़रार दिये जाते हैं #️⃣
  continue reading
 
बचत पैसा बचाने से नहीं💰 खर्च करने से होती है🎊 जितना खर्च उतनी छूट💬 ज्यादा छूट ज्यादा बचत💸
  continue reading
 
धन💰 चाहिए तो लक्ष्मी माता ज्ञान 📖 चाहिए तो सरस्वती शक्ति 💪चाहिए तो मां दुर्गा कुछ भी चाहिए तो माता ही याद आती हैं🙏
  continue reading
 
मुखौटा है असली चेहरा, मोटी चमड़ी पहचान। हमें चाहिए अपनी मस्ती, बाकी सबसे हम अनजान।
  continue reading
 
पानी की क्या परवाह करना, वो तो फैक्ट्रियों में बना लेंगे। हमें सिर्फ बच्चों के आर्थिक भविष्य, और भौतिक सुखों की चिंता करनी चाहिए।
  continue reading
 
उदासी जीवन रस सोख लेती है। दिल पर बुरा असर डालती है। मुद्दे असली है या नहीं, हमें क्या फर्क पड़ता है?
  continue reading
 
गलती करके परेशान न हों.. मनुष्य है ही गलतियों का पुतला.. सीख,सबक, सुधार के सिवाय.. कुछ और भी बेहतर हो सकता है।
  continue reading
 
खाओ पीओ और मौज करो...या फिर.... सौंपदो अपनी मेहनतकश जमाओं को उन्हें, जो आपके धन से खा पी कर मज़ा करें।
  continue reading
 
देर नहीं, तो अन्धेर कैसे हो? अन्धेर नहीं, तो आश्वासन कैसे हो? आश्वासन नहीं, तो भाषण कैसे हो? भाषण नहीं, तो शासन कैसे हो, प्रशासन कैसे हो?
  continue reading
 
वीरता नहीं दिखाना कायरों का काम है,जो हम कतई नहीं हैं। सीमा पर नहीं भेजोगे तो गली - मुहल्ले - शहर, जहां हम हैं उसी को रणक्षेत्र बना बहादुरी दिखा देंगे। खून है तो खौलेगा ही।
  continue reading
 
बुद्धि ने उसे बेवकूफ बनाया, उसने कायनात को बेवकूफ बनाया। सबको जीतने के चक्कर में, स्वयं से हारता चला गया। सुखी होने के लिए खूब दुःख दिये खुद को, इतने दुःख पा कर कैसे सुखी हो सकता था।
  continue reading
 
दिमाग का दही कर दिया इन विज्ञापन बना कर माल बेचने वालों ने। होने और दिखाने में जमीन आसमान से कम का अंतर नहीं होता। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की गर्दन इनके शिकंजे में है और उससे चिपके रहने के कारण हमारी भी। ये बेवकूफ समझ कर बेवकूफ बनाते हैं या बेवकूफ बना कर बेवकूफ समझते हैं।
  continue reading
 
समझदारी और परिपक्वता नहीं,चमड़ी की रंगत ही,चरित्र और बुद्धि की श्रेष्ठता निर्धारित करती है। गोरे दूध के धुले हैं और काले ..... हम भारतीयों का रंगभेद दुनिया में सबसे उम्दा किस्म का है, ये दूसरों के लिए प्रर्दशन में विश्वास नहीं करता। ये यकीन करता है अपने परिवार, समाज की सांवली/काली बेटियों पर प्रहार में।…
  continue reading
 
ये हो क्या रहा है? नेगेटिव रहने के लिए सोच को पाॅजिटिव होना जरूरी बताया जा रहा है। पाॅजिटिव आ जाने पर नेगेटिव करने की कोशिश की जा रही है। नकारात्मक समझदार माना जा रहा है, और सकारात्मक बेचारे पर ढ़ेरों प्रश्न दागे जा रहे हैं।
  continue reading
 
वायरस शब्द ने तो हाल ही में प्रसिद्धि पाई है जबकि वायरल शब्द बहुत पहले से चर्चित रहा है। सन्देश कैसा भी हो, वायरल करने के पुनीत कार्य में लगे वारियर्स का उचित सम्मान होना जरूरी है। ग्रुप के सभी सदस्य अपने स्तर पर कितना परिश्रम करते हैं तब कहीं जाकर दिमाग का एनकाऊंटर हो पाता है और आशातीत परिणाम आ पाते हैं।…
  continue reading
 
बाजार हथियाने के एक से एक हथकंडे मुझे आते हैं। दूसरे देशों के उत्पादों ही नहीं अर्थव्यवस्था को पटखनी देकर मैं यहां तक पहुंचा हूं। तुमसे कमाए को तुमसे कमाने में लगा देने का तरीका मुझे पता है और तुम्हारे खिलाफ लगाना भी।
  continue reading
 
मेरे पैर दो और तुम्हारे चार। कहने को तो फर्क सिर्फ दो पैरों का है। लेकिन कपाल के भीतर का तन्त्रिका- तन्त्र जिसे बुद्धि कहते हैं वो खास है। मैंने अपनी विलक्षण बुद्धि का उपयोग ऐसा किया कि तुम चौपायों को जानवर बना दिया। मै नहीं होता तो अपना लम्बा जीवन तुम्हें पूरा बिताना पड़ता। तुम्हें जीव-बन्धन से मुक्ति दिलाने के लिए ही मैं रात- दिन लगा रहता हूं।…
  continue reading
 
अपनी समझदार संवेदनाओं को संभाल कर रखिएगा। पीड़ित व्यक्ति के जिन्दा रहते ही खर्च कर दी तो उसके मरने के बाद क्या करेंगे? कहां से लाएंगे Social Media पर सार्वजनिक करने के लिए शहद में डूबे अच्छे - अच्छे शब्द और वाक्य विन्यास? कैसे दिखाएंगे अपना ज़िम्मेदार नागरिक होना? कैसे प्रर्दशित करेंगे कर्त्तव्य परायण परिवार, समाज और देश होना?…
  continue reading
 
ये हमारी भलमनसाहत है, कि हमने लोगों की तकलीफें दूर करने का काम चुना है। सरकार सभी की परेशानियों का निराकरण नहीं कर पा रही थी। उसने हमसे हाथ बंटाने के लिए कहा तो हम जुट गए तन-मन-धन से।
  continue reading
 
दो - ढाई महीने तो लगे, आखिरकार हम कोरोना से negotiation करने में सफल रहे। वह सिर्फ और सिर्फ रात को सक्रिय होने के लिए मान गया। इसलिए दिन को lockup से बाहर कर दिया, जबकि रात अभी कुछ और दिन- महीने वहीं रहेगी।
  continue reading
 
घर में सुबह-शाम रोजाना का वही एक-सा रुटीन है, शान्ति है।लेकिन बाहर की दुनिया हर दिन तेजी से बदलती दिख रही है। बहुत सारी आवाजों के साथ निर्ममता की गूंज भी सुनाई दे रही है। |There is the same routine, peace in the morning and evening in the house, but the world outside is seen changing rapidly every day. An echo of ruthlessness is also heard with man…
  continue reading
 
कोरोना काल की पाबंदियों और समझदारीयों का दूरगामी असर | The far-reaching effects of restrictions and understanding of the post Corona period
  continue reading
 
लॉकडाउन ने हमें क्या कुछ नहीं सिखा दिया? बीमारी का डर हमसे वह सब करवा रहा है, जो सही था, फिर भी हमने नहीं किया।स्वतः नहीं, ज़बरदस्ती ही सही।#corona #covid19 #lockdown #positivity #adaptingtothenewnormal
  continue reading
 
पिछले कई महीनों से पूरा विश्व कोरोना से जूझ रहा है।हमारे लिए यह स्थिति बिल्कुल नई और असाधारण है। अपने-अपने तरीके से हम इसे समझने और इससे सामंजस्य स्थापित करने में लगे हैं। हमारी सोच को सहारा देने में इतिहास के सन्दर्भ महत्वपूर्ण भी हैं और दिलचस्प भी। महामारियों का इतिहास और इतिहास पर उनका प्रभाव, मेरी कलम से,सुने और अपने विचार साझा करें...…
  continue reading
 
Loading …

त्वरित संदर्भ मार्गदर्शिका