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✅To proclaim the good news of Jesus Christ, bind up the brokenhearted, proclaim freedom for captives, and proclaim God's grace. ✅This is the vision of The Revelation Church, led by Ps. Adesh Narain & Nihar Narain. The church holds weekly services in English and Hindi.✅दोस्तों इस चैनल पर आपको , हर एक प्रकार का Christian Content मिलेगा जैसे की Short film,Sermons,Worship songs,Chrstian talk show, Interviews,Real life challnges , Bible study,Christian Cartoons,Christian shyariya,Christian podcas ...
 
"हमेशा याद रखें, जो भी मैं आपसे कहता हूं, आप इसे दो तरीकों से ले सकते हैं। आप इसे बस मेरे अधिकार पर ले जा सकते हैं, 'क्योंकि ओशो ऐसा कहते हैं, यह सच होना चाहिए' - तब आप पीड़ित होंगे, तब आप नहीं बढ़ेंगे। "मैं जो भी कहता हूं, उसे सुनो, इसे समझने की कोशिश करो, इसे अपने जीवन में लागू करो, देखो कि यह कैसे काम करता है, और फिर अपने निष्कर्ष पर आओ। वे वही हो सकते हैं, वे नहीं भी हो सकते हैं। वे कभी भी समान नहीं हो सकते क्योंकि आपके पास एक अलग व्यक्तित्व है, एक अद्वितीय व्यक्ति है। ” Visit: https://l ...
 
पूरा विश्व एक वायरस के चंगुल में गिरफ्त है। मानवजाति एक के बाद दूसरे संकट से गुजर रही है। यह विश्वव्यापी महामारी ने मौजूदा विश्व व्यवस्था की कमजोरियों को सामने ला दिया है और सभी स्तरों पर एकता की आवश्यकता को प्रत्यक्ष कर दिया है? क्या हम इन संकटों से उभर पाएंगे? मानवजाति का भविष्य क्या है? मानव समुदाय ऐसे संकटो के प्रति अपनी प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढा सकता है? वे कौन से सिद्धांत और दृढ़ विश्वास हैं जो हमें एक एकताबद्ध विश्व के निर्माण करने में मार्गदर्शन कर सकते हैं- एक ऐसी एकता जो मानवजाति के ...
 
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विश्वसंवाद-५९: विश्वास गोडबोले- भाग २ सिलिकॉन व्हॅलीमधले ज्येष्ठ उद्योजक विश्वास गोडबोले यांच्या मुलाखतीचा दुसरा भाग Vishwasamwaad-59: Vishwas Godbole- Part 2 Interview of a senior Marathi entrepreneur in Silicon Valley Vishwas Godbole (Part 2)द्वारा मन्दार कुलकर्णी | Mandar Kulkarni
 
नाम बिन भाव करम नहिं छूटै। साध संग औ राम भजन बिन, काल निरंतर लूटै। मल सेती जो मल को धोवै, सो मल कैसे छूटै। प्रेम का साबुन नाम का पानी, दोए मिल तांता टूटै। भेद अभेद भरम का भांडा, चौड़े पड़-पड़ फूटै। गुरुमुख सब्द गहै उर अंतर, सकल भरम से छूटै। राम का ध्यान तू धर रे प्रानी, अमृत का मेंह बूटै। जन दरियाव अरप दे आपा, जरा मरन तब टूटै। राम नाम नहिं हिरदे धरा। …
 
आदि अनादि मेरा साईं। द्रष्ट न मुष्ट है अगम अगोचर। यह सब माया उनहीं माईं।। जो बनमाली सींचै मूल। सहजै पीवै डाल फल फूल।। जो नरपति को गिरह बुलावै। सेना सकल सहज ही आवै।। जो कोई कर भान प्रकासै। तो निस तारा सहजहि नासै।। गरुड़ पंख जो घर में लावै। सर्प जाति रहने नहिं पावै।। दरिया सुमरै एकहि राम। एक राम सारै सब काम।। आदि अंत मेरा है राम। उन बिन और सकल बेकाम।।…
 
✅अनुग्रह का सुसमाचार ,दोस्तों आज हम सभी मसीह भाई बहनों को कलीसियाओं को यह जानना बहुत जरुरी है की वचन हमे क्या सिखाता है ? ✅दोस्तों इस वीडियो में हम सीखने जा रहे है की नयी वाचा , और पुरानी वाचा हमे क्या बताती है। ✅दोस्तों अगर इस वचन से आप आशाषित हुए है तो , हमे जरूर लिखे और चैनल को सब्सक्राइब करे। और हमे फॉलो करे हमारे सोशल मीडिया पेज पर :(Know more…
 
जाके उर उपजी नहिं भाई। सो क्या जाने पीर पराई।। ब्यावर जाने पीर की सार। बांझ नार क्या लखे विकार।। पतिब्रता पति को ब्रत जानै। बिभचारिन मिल कहा बखानै।। हीरा पारख जौहरि पावै। मूरख निरख के कहा बतावै।। लागा घाव कराहै सोई। कोतगहार के दर्द न कोई।। रामनाम मेरा प्रान-अधार। सोई रामरस-पीवनहार।। जन दरिया जानेगा सोई। प्रेम की भाल कलेजे पोई।। जो धुनिया तो मैं भी …
 
सब जग सोता सुध नहिं पावै। बोलै सो सोता बरड़ावै।। संसय मोह भरम की रैन। अंधधुंध होए सोते अैन।। जप तप संयम औ आचार। यह सब सुपने के ब्यौहार।। तीर्थ-दान जग प्रतिमा-सेवा। यह सब सुपना लेवा-देवा।। कहना सुनना हार औ जीत। पछा-पछी सुपनो विपरीत।। चार बरन औ आश्रम चार। सुपना अंतर सब ब्यौहार।। शट दरसन आदि भेद-भाव। सुपना अंतर सब दरसाव।। राजा-रानी तप बलवंता। सुपना माह…
 
तज बिकार आकार तज, निराकार को ध्यान। निराकार में पैठ कर, निराधार लौ लाए।। प्रथम ध्यान अनुभौ करै, जासे उपजै ग्यान। दरिया बहुतै करत हैं, कथनी में गुजरान।। पंछी उड़ै गगन में, खोज मंडै नहिं माहिं। दरिया जल में मीन गति, मारग दरसै नाहिं।। मन बुधि चित पहुंचै नहीं, सब्द सकै नहिं जाए। दरिया धन वे साधवा, जहां रहे लौ लाए।। किरकांटा किस काम का, पलट करे बहु रंग। …
 
दरिया हरि किरपा करी, बिरहा दिया पठाए। यह बिरहा मेरे साध को, सोता लिया जगाए।। दरिया बिरही साध का, तन पीला मन सूख। रैन न आवै नींदड़ी, दिवस न लागै भूख।। बिरहिन पिउ के कारने, ढूंढ़न बनखंड जाए। निस बीती, पिउ ना मिला, दरद रही लिपटाए।। बिरहिन का घर बिरह में, ता घट लोहु न मांस। अपने साहब कारने, सिसकै सांसों सांस।। दरिया बान गुरुदेव का, कोई झेलै सूर सुधीर। ला…
 
नमो नमो हरि गुरु नमो, नमो नमो सब संत। जन दरिया बंदन करै, नमो नमो भगवंत।। दरिया सतगुरु सब्द सौं, मिट गई खैंचातान। भरम अंधेरा मिट गया, परसा पद निरबान।। सोता था बहु जनम का, सतगुरु दिया जगाए। जन दरिया गुरु सब्द सौं, सब दुख गए बिलाए।। राम बिना फीका लगै, सब किरिया सास्तर ग्यान। दरिया दीपक कह करै, उदय भया निज भान।। दरिया नर-तन पाए कर, कीया चाहै काज। राव र…
 
सच्चे साहिब से मिलने को मेरा मनु लिहा बैराग है, जी। मोह निसा में सोइ गई, चोंक परी उठि जाग है, जी।। दोउ नैन बने गिरि के झरना, भूषन बसन किया त्याग है, जी। पलटू जीयत तन त्याग दिया, उठी विरह की आगि है, जी।। 13।। साहिब के दास कहाय यारो, जगत की आस न राखिए, जी। समरथ स्वामी को जब पाया, जगत से दीन न भाखिए, जी।। साहिब के घर में कौन कमी, किस बात को अंते आखिए,…
 
सील की अवध, सनेह का जनकपुर, सत्त की जानकी, ब्याह कीता। मनहिं दुलहा बने आप रघुनाथ जी, ज्ञान के मौर सिर बांधि लीता।। प्रेम-बारात जब चली है उमंगिकै, छिमा बिछाय जनबांस दीता। भूप अहंकार के मान को मर्दिकै, थीरता-धनुष को जाय जीता।। 9।। बाम्हन तो भये जनेउ को पहिरि कै, बाम्हनी के गले कछु नाहिं देखा। आधी सुद्रिनि रहै घर के बीच में, करै, तुम खाहु यह कौन लेखा।…
 
राज तन में करै, भक्ति जागीर लै, ज्ञान से लड़ै, रजपूत सोई। छमा-तलवार से जगत को बस्सि करै प्रेम की जुज्झ मैदान होई।। लोभ औ मोह हंकार दल मारिकै काम औ क्रोध ना बचै कोई। दास पलटू कहै तिलकधारी सोई, उदित तिहुं लोक रजपूत सोई।। 5।। गाय-बजाय के काल को काटना, और की सुनै कछु आप कहना। हंसना-खेलना बात मीठी कहै, सकल संसार को बस्सि करना।। खाइये-पीजिये मिलैं सो पहिर…
 
बोलु हरिनाम तू छोड़ि दे काम सब सहज में मुक्ति होइ जाए तेरी। दाम लागै नहीं, काम यह बड़ा है, सदा सतसंग में लाउ फेरी।। बिलम न लाइकैं डारि सिर भार को, छोड़ि दे आस संसार केरी। दास पलटू कहै यही संग जाएगा। बोलु मुख राम यह अरज मेरी।। 1।। पूरब में राम है, पच्छिम खुदाय है, उत्तर और दक्खिन कहो कौन रहता? साहिब वह कहां है, कहां फिर नहीं है, हिंदू और तुरक तोफान करत…
 
जैसे नद्दी एक है, बहुतेरे हैं घाट।। बहुतेरे हैं घाट, भेद भक्तन में नाना। जो जेहि संगत परा, ताहि के हाथ बिकाना।। चाहे जैसी करै भक्ति, सब नामहिं केरी। जाकी जैसी बूझ, मारग सो तैसी हेरी।। फेर खाय इक गये, एक ठौ गये सिताबी। आखिर पहुंचे राह, दिना दस भई खराबी।। पलटू एकै टेक ना, जेतिक भेस तै बाट। जैसे नद्दी एक है, बहुतेरे हैं घाट।। 19।। लेहु परोसिनि झोंपड़ा,…
 
मन मिहीन कर लीजिए, जब पिउ लागै हाथ।। जब पिउ लागै हाथ, नीच ह्वै सब से रहना। पच्छापच्छी त्याग उंच बानी नहिं कहना।। मान-बड़ाई खोय खाक में जीते मिलना। गारी कोउ दै जाय छिमा करि चुपके रहना।। सबकी करै तारीफ, आपको छोटा जानै। पहिले हाथ उठाय सीस पर सबकी आनै।। पलटू सोइ सुहागनी, हीरा झलकै माथ। मन मिहीन कर लीजिए, जब पिउ लागै हाथ।। 16।। पानी काको देइ प्यास से मुव…
 
सोई सती सराहिये, जरै पिया के साथ।। जरै पिया के साथ, सोई है नारि सयानी। रहै चरन चित लाय, एक से और न जानी।। जगत करै उपहास, पिया का संग न छोड़ै। प्रेम की सेज बिछाय, मेहर की चादर ओढ़ै। ऐसी रहनी रहै, तजै जो भोग-विलासा। मारै भूख-पियास याद संग चलती स्वासा।। रैन-दिवस बेहोस, पिया के रंग में राती। तन की सुधि है नाहिं, पिया संग बोलत जाती।। पलटू गुरु परसाद से कि…
 
सीस उतारै हाथ से, सहज आसिकी नाहिं।। सहज आसिकी नाहिं, खांड खाने को नाहीं। झूठ आसिकी करै, मुलुक में जूती खाहीं।। जीते जी मरि जाय, करै ना तन की आसा। आसिक का दिन-रात, रहै सूली उपर बासा।। मान बड़ाई खोय, नींद भर नाहीं सोना। तिलभर रक्त न मांस, नहीं आसिक को रोना।। पलटू बड़े बेकूफ वे, आसिक होने जाहिं। सीस उतारै हाथ से, सहज आसिकी नाहिं।। 10।। यह तो घर है प्रेम…
 
क्या सोवै तू बावरी, चाला जात बसंत।। चाला जात बसंत, कंत ना घर में आये। धृग जीवन है तोर, कंत बिन दिवस गंवाये।। गर्व गुमानी नारि फिरै जोवन की माती। खसम रहा है रूठि, नहीं तू पठवै पाती।। लगै न तेरो चित्त, कंत को नाहिं मनावै।। कापर करै सिंगार, फूल की सेज बिछावै।। पलटू ऋतु भरि खेलि ले, फिर पछतावै अंत। क्या सोवै तू बावरी, चाला जात बसंत।। 7।। ज्यौं-ज्यौं सू…
 
दीपक बारा नाम का, महल भया उजियार।। महल भया उजियार, नाम का तेज विराजा। सब्द किया परकास, मानसर ऊपर छाजा।। दसों दिसा भई सुद्ध, बुद्ध भई निर्मल साची। छूटी कुमति की गांठ, सुमति परगट होय नाची।। होत छतीसो राग, दाग तिर्गुन का छूटा। पूरन प्रगटे भाग, करम का कलसा फूटा।। पलटू अंधियारी मिटी, बाती दीन्ही बार। दीपक बारा नाम का, महल भया उजियार। 4।। हाथ जोरि आगे मि…
 
नाव मिली केवट नहीं, कैसे उतरै पार।। कैसे उतरै पार पथिक विश्वास न आवै। लगै नहीं वैराग यार कैसे कै पावै।। मन में धरै न ग्यान, नहीं सतसंगति रहनी। बात करै नहिं कान, प्रीति बिन जैसी कहनी।। छूटि डगमगी नाहिं, संत को वचन न मानै। मूरख तजै विवेक, चतुराई अपनी आनै।। पलटू सतगुरु सब्द का तनिक न करै विचार। नाव मिली केवट नहीं, कैसे उतरै पार।। 1।। साहिब वही फकीर है…
 
विश्वसंवाद-५८: विश्वास गोडबोले-१ सिलिकॉन व्हॅलीमधले ज्येष्ठ उद्योजक विश्वास मुलाखतीचा पहिला भाग Vishwasamwaad-58: Vishwas Godbole-1 Interview of a senior Marathi entrepreneur in Silicon Valley Vishwas Godbole (Part 1)द्वारा मन्दार कुलकर्णी | Mandar Kulkarni
 
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