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Here I recite Hindi poems written by me and some of my favorite, all-time classics. इस पॉडकास्ट के माध्यम से मैं स्वरचित रचनाएँ और अपने प्रिय कवियों की कालजयी कवितायेँ प्रस्तुत कर रहा हूँ Three times "Author Of The Month" on StoryMirror in 2021. Open to collaborating with music composers and singers. Write to me on HindiPoemsByVivek@gmail.com #Hindi #Poetry #Shayri #Kavita #HindiPoetry #Ghazal
 
भारत का सबसे पहला बहुभाषी प्रकृति और संरक्षण पॉडकास्ट। हम लेकर आ रहे है आपके लिए नई खबरें, नई घटनाएं, आधुनिक वैज्ञानिक खोज, नई सरकारी नीतियों के साथ-साथ, विस्मयकारी व्यक्तियों की गाथाएं और वन्य जीव की ढेर सारी कहानियां।
 
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अजेय सैनिकों चलो, लिये तिरंग हाथ में। समक्ष शत्रु क्या टिके, समस्त हिन्द साथ में॥ ललाट गर्व से उठा, स्वदेश भक्ति साथ है। अशीष मात का मिला, असीम शक्ति हाथ है॥ चले चलो बढ़े चलो, कि देश है पुकारता। सवाल आज आन का, कि आस से निहारता॥ सदैव शौर्य जीतता, कि शक्ति ही महान है। कि वीर की वसुंधरा, यही सदा विधान है॥ चढ़ा लहू कटार से, यहाँ उतार आरती। भले तू खंड-खंड…
 
श्रीकृष्ण माहात्म्य हरिगीतिका छंद (२८ मात्रिक १६,१२ पर यति) प्रथम सर्ग - श्रीकृष्ण बाल कथा श्रीकृष्ण की सुन लो कथा तुम, आज पूरे ध्यान से। भवसागरों से मुक्ति देती, यह कथा सम्मान से॥ झंझावतों की रात थी जब, आगमन जग में हुआ। प्रारब्ध में जो था लिखा तय, कंस का जाना हुआ॥ गोकुल मुझे तुम ले चलो अब, हो प्रकट बोले हरी। माया वहाँ मेरी है जन्मी, तेज से है वो भ…
 
ग़ज़ल - नहीं फ़ख़्र-ए-वतन उसका ये हिंदुस्तान थोड़े है लुटाते जान सैनिक ही हमारी जान थोड़े है। बचाते अजनबी को भी कोई पहचान थोड़े है। नहीं अहसान मानो तो समझ इक बार हम जायें, मगर मारो जो तुम पत्थर वहाँ ईमान थोड़े है। ख़िलाफ-ए-'मुल्क साजिश कर जो दुश्मन की ज़बाँ बोले, नहीं फ़ख़्र-ए-वतन उसका ये हिंदुस्तान थोड़े है। कहे भारत के टुकड़े जो वो अपना हो नहीं सकता, पढ़ा…
 
बचपन से खूब सुनी हैं, दादी नानी से कहानी। जादुई परियों के किस्से, और सुन्दर राजा रानी। कथा मैं उनकी सुनाता, जो देश के हैं बलिदानी। ना उनको आज भुलाओ, ज़रा याद करो कुर्बानी। आज़ाद हवा में साँसे, खुल कर हम सब ले पाये। क्यूँकि कुछ लोग थे ऐसे, जो अपनी जान लुटाये। उन सब की बात करूँ मैं, नहीं जिनका बना है सानी। ना उनको आज भुलाओ, ज़रा याद करो कुर्बानी। सन स…
 
दिन रात मुझे याद यूँ आया न करो तुम। हर वक़्त यूँ तड़पा के सताया न करो तुम। दिन भर तो मुझे नींद नहीं होती मयस्सर, आ ख्वाब में हर रात जगाया न करो तुम। इक वक़्त था मुस्कान हमेशा थी लबों पर, वो वक़्त मुझे याद दिलाया न करो तुम। लगता है तेरे दिल में कहीं कुछ तो बचा है, जो भी है दिल में वो छुपाया न करो तुम। इस वक़्त से बढ़कर है नहीं कुछ भी यहाँ पर, बेकार की बात…
 
शारदा स्तुति हरिगीतिका छंद (२८ मात्रिक १६,१२ पर यति) है हंस पर आरूढ़ माता, श्वेत वस्त्रों में सजी। वीणा रखी है कर तिहारे, दिव्य सी सरगम बजी॥ मस्तक मुकुट चमके सुशोभित, हार पुष्पों से बना। फल फ़ूल अर्पण है चरण में, हम करें आराधना॥ संगीत का आधार हो माँ, हर कला का श्रोत हो। जग में प्रकाशित हो रही जो, वेद की वह ज्योत हो॥ वरदायिनी पद्मासिनि माँ, अब यही अभि…
 
आओ पर्यावरण बचायें यह प्रकृति हम से नहीं, इस प्रकृति से हम हैं। प्रकृति सरंक्षण हेतु हम जितना भी करे कम है। पंच तत्व बन प्रकृति ही इस तन को निर्मित करती है। सौंदर्य सुधा की सुरभि से सबको आकर्षित करती है। जीवनदायी प्रकृति करती है सब का पालन पोषण। निज स्वार्थ में हम कर बैठे इस देवी का शोषण। भूमि हमको भोजन देती पर हम इसको विष देते। दूषित करते उन नदियो…
 
कुछ और नहीं सोचा कुछ और नहीं माँगा। हर वक्त तुझे चाहा कुछ और नहीं माँगा। दौलत से क्या होगा यदि दिल ही रहे खाली। बस साथ रहे तेरा कुछ और नहीं माँगा। मिलता है बड़ी किस्मत से यार यहाँ सच्चा। मिल जाये वही हीरा कुछ और नहीं माँगा। दीदार खुदा का हो यदि पाक नज़र अपनी। दिल साफ़ रहे अपना कुछ और नहीं माँगा। सब लोग बराबर हैं ना कोइ बड़ा छोटा। ना भेद रहे थोड़ा कुछ और…
 
न हूँ मैं मेधा, न बुद्धि ही मैं हूँ। अहंकार न हूँ न चित्त ही मैं हूँ। न नासिका में न नेत्रों में ही समाया। न जिव्हा में स्थित न कर्ण में सुनाया। न मैं गगन हूँ न ही धरा हूँ। न ही हूँ अग्नि न ही हवा हूँ। जो सर्वत्र सर्वस्व आनंद व्यापक। मैं बस शिवा हूँ उसी का संस्थापक। नहीं प्राण मैं हूँ न ही पंचवायु। नहीं पंचकोश और न ही सप्तधातु। वाणी कहाँ बांच मुझको…
 
श्रीकृष्ण मेरे इष्ट भगवन, नित्य करता ध्यान मैं। मुरली मनोहर श्याम सुन्दर, भक्तिरस का गान मैं॥ कोमल बदन चन्दन सजा है, भव्य यह श्रृंगार है। कर में सजी वंशी सुनहरी, देखता संसार है॥ सम्पूर्ण जग में आप ही हो, आप से ही सब बना। है आप पर सर्वस्व अर्पण, आप की आराधना॥ मम मात तुम तुम तात हो तुम, बन्धु तुम ही हो सखा। प्रियतम तुझे ही मानता मैं, तुम बिना क्या है…
 
कौन हैं राम कैसे थे राम, कब थे राम कहाँ है राम? अक्सर ऐसे प्रश्न उठाते, लोगों को मैंने देखा है। श्रद्धा-सूर्य पर संशय-बादल, मंडराते मैंने देखा है। है उनको बस इतना बतलाना, मैंने राम को देखा है । पितृ वचन कहीं टूट ना जाये सौतेली माँ भी रूठ ना जाये राजसिंहासन को ठुकराकर परिजनों को भी बहलाकर एक क्षण में वैभव सारा छोड़ रिश्ते नातों के बंधन तोड़ कुल-देश-धर…
 
सरस्वती वंदना हरिगीतिका छंद (२८ मात्रिक १६,१२ पर यति) है हंस पर आरूढ़ माता, श्वेत वस्त्रों में सजी। वीणा रखी है कर तिहारे, दिव्य सी सरगम बजी॥ मस्तक मुकुट चमके सुशोभित, हार पुष्पों से बना। फल फ़ूल अर्पण है चरण में, हम करें आराधना॥ संगीत का आधार हो माँ, हर कला का श्रोत हो। जग में प्रकाशित हो रही जो, वेद की वह ज्योत हो॥ वरदायिनी पद्मासिनि माँ, अब यही अभ…
 
आओ बच्चों आज तुमको एक पाठ नया पढ़ाता हूँ। प्रकृति हमको क्या सिखलाती, ये तुमको बतलाता हूँ। देखो कैसे पत्थर खा के भी, पेड़ हमें फल देते हैं। क्षमा-दान से बड़ा कुछ नहीं, ये हम सबसे कहते हैं। पर्वत से सागर तक नदिया, लम्बा सफर है करती। निज लक्ष्य तक बढ़ो निरंतर, सीख यही है मिलती। सबका भार उठाये मस्तक पर, देखो धरती माता। सहनशीलता का अर्थ क्या, इससे समझ में आ…
 
आओ मिल कर खेलें होली सबसे न्यारी अपनी टोली सभी पुराने क्लेश भुलाकर सबसे बोलें मीठी बोली लाल हरे और पीले नीले देखो मेरे रंग चटकीले भर ली मैंने नयी पिचकारी रंग दूंगा मैं दुनिया सारी सुबह सवेरे सोनू जागा उसके पीछे मोनू भागा वो छिप गया लकी सयाना नहीं चलेगा कोई बहाना बंद करो ये आंखमिचौली आओ मिल कर खेलें होली रंग लगायें गुंझिया खाएं झूमे नाचें खुशी मनाएं…
 
ग़ज़ल - तू ही बता क्यों हर समय यादें तेरी आती हमें तू ही बता। सोता हूँ तो सपने तेरे मुझको दिखें तू ही बता। सीने में हैं तूफाँ बहुत दिल है मगर खाली मेरा। हाल-ए-जिगर जाने न तू कैसे कहें तू ही बता। है मतलबी सारा जहाँ सोचा कि तुम होगी जुदा। तू भी मगर खुदगर्ज है क्या हम करें तू ही बता। छोटी सी थी मेरी खता ये बात है तुझको पता। इतनी बड़ी दी है सजा कैसे सहें…
 
ग़ज़ल - सपने तेरे जो सब कहें सपने तेरे, मुश्किल बड़े तो क्या हुआ। तेरी रज़ा तेरा सफर, अड़चन पड़े तो क्या हुआ। पथ पर अगर पत्थर पड़े, ठोकर लगे काँटे चुभें। आगे बढ़ो हिम्मत करो, गिर भी गये तो क्या हुआ। जो धुन्ध में रस्ता कहीं, खोता लगे थमना नहीं। चलते चलो मंज़िल अगर, ना भी दिखे तो क्या हुआ। होते हैं सच सपने सभी, कोशिश करो जी जान से। थोड़े समय तुमने अगर, दुख भी …
 
शिव स्तुति स्वभाव से हैं जो सरल, त्रिनेत्र में रखें अनल। जटाओं में भागीरथी, कण्ठ में धरें गरल॥ सोम सज्ज भाल है, वज्र वक्ष विशाल है। जिनका नाम मात्र ही, काल का भी काल है॥ दिव्य जिनका रूप है, सौभाग्य का स्वरूप है। कपूर कान्ति वर्ण पर, भस्म और भभूत है॥ आसन व्याघ्र चर्म है, धर्म का जो मर्म है। जिनकी इच्छा मात्र से, घटित प्रत्येक कर्म है॥ औघड़ आदिनाथ हैँ…
 
मैं प्रलय हूँ मैं प्रलय हूँ। अरि-मस्तकों को काट काट; शोणित-सुशोभित उन्नत ललाट, सर्व व्याप्त विश्व रूप विराट। रणचण्डी का उन्मुक्त अट्टहास; रिपुह्रदय में कर भय का निवास, अग्नि उगले मेरी हर एक श्वास। करता सुनिश्चित निज जय हूँ, मैं प्रलय हूँ। अविरल मेरी गति निरंतर, पग थमे नहीं तूफानों से। मैं थका नहीं मैं डिगा नहीं, पथ में पड़ती चट्टानों से। मैं भगीरथ …
 
एहसास-ए- मोहब्बत हर रोंया गुदगुदाता है। तन्हाई में भी मुस्कान के मोती सजाता है। चंद तारीखों में न सीमित कर मोहब्बत को। ये जज़्बा हर लम्हे में पैबस्त हुआ जाता है। इश्क़ फैले तो पूरी कायनात में न समाये। और चाहे तो छोटे से दिल में सिमट आता है। जिसने की; करामात-ए-मोहब्बत वही जाने। की कैसे ये एक साथ हँसाता और रुलाता है। न रहे बाकी कोई और ख्वाहिश इस दिल मे…
 
नखरे तिरे उठाये, तिरि बात हम ने मानी। तिरा इंतज़ार करते, मिरि खो गयी जवानी। तुम दूर हम से हो तो, कमतर है जिंदगानी। दिन भी नहीं है अच्छा, न ही रात है सुहानी। तुम आज हो ये कहते, कहीं और दिल लगा लूँ। अब यूँ किसे मैं चाहूँ, न तिरा बना है सानी। अहसान कर दे इतना, कि न याद हम को करना। यदि कोइ रह गयी है, मिरि फेंक दे निशानी। शुरुआत भी तुझी से, अनजाम तुम हो …
 
अपना बीता साल क्या बतायें कैसा गुजरा, अपना बीता साल। हर्ष के लमहे भी देखे, और देखा दुःख का काल। क्या बतायें कैसा गुजरा, अपना बीता साल। आरम्भ था वो साल का, कहूँ क्या अपने हाल का। निष्क्रिय निर्जीव था, न होश समय की चाल का। एक गीत बन के आयी थी, उमंग साथ लायी थी। मुझे सोते से जगा दिया, दिल पे वो ही छायी थी। सच कहें तो यूँ लगा, आया कोई भूचाल। क्या बताये…
 
हिमालय की बर्फीली ऊँचाइयों से, हिन्द महासागर की अथाह गहराइयों तक। पूर्वोत्तर के प्रचंड झंझावतों व सघन वर्षा वनों से, थार की गर्म शुष्क हवाओं तक। हिंदुस्तान के कोने कोने में आलोकित है, इनके स्वेद और शोणित की चमक। और अनंत काल तक गूँजेगी, सेना-ए-हिन्द की जोशीली ललकारो की खनक। माँ भारती की सीमा-औ-सम्मान-सुरक्षा पर, ये सदैव शीश अर्पण को तत्पर। कभी मुड़े …
 
एक ग़ज़ल लिखी है चन्दा पे, छत पर आके पढ़ लेना। है तेरी याद में गाया नगमा, जब हवा बहे तो सुन लेना। अपने सागर में उगते सूरज को, नयन घटों से अर्घ्‍य दिया है। तेरे सागर में जब सूरज डूबे, अश्कों के मोती चुन लेना। जितनी भी हैं मेरी यादें, दो हिस्सों में कर लेना। बुरी लगें जो उन्हें भुलाकर, ठीक लगें वो रख लेना। जो दुनिया वाले पूछें तुझसे, किसने की थी बेवफ़ायी…
 
चलो इस जनवरी जन जन को जगाते हैं।बैर और नफरत की दीवार को,मिलकर मिटटी में मिलाते हैं।चलो इस जनवरी, जन जन को जगाते हैं।व्यर्थ का यह वाद विवाद,इसका प्रत्युत्तर उसका प्रतिवाद,पूर्वाग्रहों को मन से हटा,सब लोग करें सार्थक संवाद।तुम अपनी कहो, हम अपनी सुनाते हैं।चलो इस जनवरी, जन जन को जगाते हैं।व्यक्ति को है जब गुस्सा आता।विवेक कहीं है तब खो जाता।अपशब्द अनर…
 
मेरी तन्हाई वाकिफ है मेरे हर एक राज से। आखिर मेरी सबसे वफादार हमराह है ये। खुशियों की बज़्म में भले ही न हो शामिल। गम में बहे हर एक अश्क की गवाह है ये। छोड़ देती है मेरा साथ जब तू पास होती है। पर जुदाई में गुलशुदा दिल की पनाह है ये। हमसफ़र बदल लेते हैं अपनी राहें अक्सर। जब और रास्ते बंद हों तो अकेली राह है ये। अफ़सुर्दा दिल जब महव-ए-यास रहता है। तस्सव…
 
क्या वृक्षों को तुमने देखा है, निज फलों का स्वयं संचय करते। वाटिका में पल्लवित पुष्प भला, क्या मात्र अपने लिये महकते। जनकल्याण को आतुर अम्बुद, क्यों अपना अस्तित्व मिटाता। सूर्य देव के सप्त अश्वों को, दिन भर क्यों कर अरुण चलाता। नभ में टिमटिमा के ध्रुव तारा, पथिकों को है दिशा दिखाता। अपने कद को काँटछाँट कर, चन्दा है सबको तिथि बताता। आखिर अपना क्या प…
 
अपने सपनेऐ मुन्ने तू मुझे बता, तेरे क्या क्या सपने हैंकौन से हैं औरों ने चुने, और कौन से तेरे अपने हैं।कदम कदम पर लोग कहेंगे, क्या करना है क्या नहीं।इधर उधर की राह पकड़कर, भटक न जाना तू कहीं।बाकी सबकी बातें छोड़, बात तू अपने दिल की सुन।तेरी मंज़िल जो रस्ता जाये, राह वही तू खुद से चुन।मछली को तुमने देखा है, क्या कभी पेड़ पर चढ़ते।या किसी बाज को तुमने पाय…
 
निर्झरिणी निर्मल निश्छल निर्झरिणी तू, पर्वत पर प्रपात बन बहती। मनमोहक मधुर मंद ध्वनि में, मेरे कानों में क्या कहती। स्वच्छंद सजीव तू चले निरंतर, थमना है तेरा काम नहीं। पथ पर पड़ते पाषाण परन्तु, प्रीती सदैव हृदय में रहती। (१) अंजन आँखों से तेरी चुराकर, श्यामघटा है नभ में छाती। तेरी तरंगों से क्रीड़ा करने, नित्य सूर्य की किरणें आती। उमड़ घुमड़ तेरा नृत्य…
 
समाज में आधुनिकता ने कई संवेदनशील मुद्दों पर भी प्रभाव डाला है। इस में मुख्य है sanitary napkins और pads का विकास। आम तौर पर सामान्य और काफी हद तक periods के दौरान एक बेहतर विकल्प लगने वाले इन sanitary napkins की असलियत क्या है? क्या ये इतने बेहतर है जितने सोचे और समझे जाते है? और पर्यावरण पर इनका क्या प्रभाव पड़ता है? इन सब मुद्दों पर बात होगी आज क…
 
ग़ज़ल-लहजा मतलब निकल गया तो, लहजा बदल गया। चलो इस बहाने हमें दिख, चेहरा असल गया। कल की बात है वो, दर आये मुस्कुराते। देख कर भोली सूरत दिल, अपना मचल गया। ऐसा नहीं हमें ना था, तग़ाफ़ुल का अंदेशा। कुछ ऐसे वो बोले कि, जादू सा चल गया। कतराते हैं वो ऐसे की मेरा, साया तक ना दिखे। जिनकी फ़रमाइश पे कुर्बां, मेरा कल गया। उसके लबों पे है हँसीं, पा के मेरी नियाम…
 
तुम्हें उदास-सा पाता हूँ मैं कई दिन से न जाने कौन से सदमे उठा रही हो तुम वो शोख़ियाँ, वो तबस्सुम, वो क़हक़हे न रहे हर एक चीज़ को हसरत से देखती हो तुम छुपा-छुपा के ख़मोशी में अपनी बेचैनी ख़ुद अपने राज़ की तशहीर बन गयी हो तुम मेरी उम्मीद अगर मिट गयी तो मिटने दो उम्मीद क्या है बस एक पेशो-ओ-पश है कुछ भी नहीं मेरी हयात की ग़मग़ीनियों का ग़म न करो ग़म हय…
 
त्योहार के मौसम आते ही हमारे घरों में साफ-सफाई शुरू हो जाती है। इसी वक़्त हम कई सारे छोटे जानवर जैसे मकड़ियों का सामना करते है। पर कभी आपने सोचा है की यह मकड़ियाँ आखिर हमारे घरों में क्या कर रही है? यह मकड़ियाँ आखिर ऐसा क्या काम कर रही है हमारे घरों में और पर्यावरण में ? आज इन्ही सब प्रशनों का जवाब देंगे और हमारे घर में कौनसी मकड़ी है इसके बारे में भी ब…
 
प्रथम सर्ग काँप रही थी पृथ्वी, स्वर्ग भी था भयभीत। महिषासुर ने लिया, तीनों लोकों को जीत। त्राहि माम के गुंजन से, सृष्टि भर गयी सारी। जग में आतंक मचा रहा, वो क्रूर अत्याचारी। उसकी शक्ति के सम्मुख, देव भी थे लाचार। ब्रह्मदेव के वर स्वरुप, निष्फल हुये प्रहार। वज्र व्यर्थ बाण बेकार, सुदर्शन सफल नहीं। देवता घूम रहे चहुँ ओर, मिले न चैन कहीं। थक हार कर सब…
 
शीर्षक: क्राँति का नया अर्थ २६ जनवरी की सर्द सुबह को, गर्म चाय की चुस्कियां लेते हुये। गर्वित अनुभव कर रहा था, टीवी पर सेना की परेड देखते हुये। की अचानक एक आवाज आयी, और लुप्त हो गयी पिक्चर सारी। तथा स्क्रीन पर आ गए भगत, सुभाष और अन्य वीर क्रांतिकारी। चेहरे पर स्वतंत्रता मिलने का हर्ष नहीं, अपितु था एक विचित्र विषाद। रक्तिम नेत्रों में निराशा-नीर, व…
 
कोपल की कहानी कोमल कोपल के कोने से, ढुलक पड़ी बूँदें ओस की। सकुचाई सिमटी सी वो पत्ती, कर अर्पित निधि कोष की। अंशुमाली क्या स्वीकार करेंगे, सप्रेम समर्पित स्नेह अर्घ्य यह। धरा ने जिसे धरा सहेज कर, कहीं किधर न जाये बह। अवनि आखिर जननी है, पादप, पत्ती पुष्पों की। कैसे जाने दे व्यर्थ भला, प्रेम-भेंट निज पुत्री की। बहुत हुआ ये तिरस्कार, मन ही मन वसुधा ने …
 
अपना ये रिश्ता न अपनों वाली आत्मीयता है और, न अजनबियों वाली औपचारिकता। असहज हो जाती हो मेरी मौजूदगी में, आखिर कैसा है अपना ये रिश्ता। आखिर … न कभी अनुराग से मनुहार किया और, न ही कभी नम्रता से परिपूर्ण निवेदन। चंद लफ़्ज़ों में कर लेती हो जरुरत की बात, आखिर कहाँ सीखी ये व्यवहार कुशलता। आखिर … न दिखी कभी स्नेहमयी सहज संवेदना और, न ही कभी शिष्टाचार की कृ…
 
साढ़े नौ किलोमीटर"साढ़े नौ किलोमीटर"कलाई पर बँधी स्मार्टवॉच ने दिखाया।जैसे ही घर का द्वार निकट आया।रोज ही की तरह मॉर्निंग वॉक से वापस आ रहा था।स्वयं से किया नये साल का वादा निभा रहा था।अपनी जानी पहचानी गलियों को मापते हुये।पास वाले गार्डन और बीचफ़्रंट की लम्बाई नापते हुये।तक़रीबन डेढ़ घंटा हो गया था चलते हुये।और अपनी प्रिय प्लेलिस्ट को सुनते हुये।ऑफिस क…
 
सन्देश साँवरे सुन सन्देश हृदय का, मोहे मोह माया से उबार दे। अपने चरणों की पावन रज पै, थोड़ा सा तो अधिकार दे। मन मोरा मैला मलिन जान के, न छोड़ना मेरा साथ मुरारी। मेरी भक्ति को अपनी शक्ति का, अवलंब और आधार दे। बांके बिहारी बसि बसि जावे, छवि तिहारी मोरे नैनन में। देखूँ हर पल तोरी मोहिनी मूरत, पूरा कर मोरा मनुहार दे। जागत सोवत बस नाम तिहारा, निकले मेरी ह…
 
जिंदगी की रेत से, ख़ुशी के कंकड़ छान लेते हैं। ये जीना जीना तो नहीं, पर चलो मान लेते हैं। तू गयी जब, तो सोचा था अब मिलेगा सुकूं। तू नहीं तो तेरी, यादों के ख़ंजर जान लेते हैं। नहीं चाहिये अब, हमें तेरी नज़र-ए-'इनायत। ग़ुरूर आज भी है, हम नहीं अहसान लेते हैं। मत करना मेरे, लौट कर आने का इंतज़ार। पलटते नहीं कभी, एक बार जो ठान लेते हैं। नादाँ हैं वो, जो रख…
 
मुझे यकीन है आपने क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग जैसे शब्द सुने होगे। आज का एपिसोड इसी के बारे में है। 9 अगस्त 2021 को आईपीसीसी ने अपनी सिक्स एसेसमेंट रिपोर्ट जारी की है। यूनाइटेड नेशंस के सेक्रेटरी जनरल ने इस रिपोर्ट को मानवता के लिए कोर्ट रेड घोषित किया है। तो आखिर यह रिपोर्ट क्यों मानवता के लिए कोर्ट रेड है आइए जानते हैं। Host Chahat Yadav 9 अ…
 
भारत एक विशाल राष्ट्र है और यहाँ के हर प्रान्त, शहर व ग्राम में अतुलनीय प्रतिभा के लोग निवास करते हैं पर अक्सर उनकी प्रतिभा एक उचित अवसर के अभाव में एक संकीर्ण दायरे में सिमट कर रह जाती है। हर एक व्यक्ति के पास साधन या पहुँच नहीं होती की वो एक बड़े मंच से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। लेकिन ये नया भारत है जो हार मान कर चुप बैठने वालों में से नही…
 
एक किताब सा मैं जिसमें तू कविता सी समाई है, कुछ ऐसे ज्यूँ जिस्म में रुह रहा करती है। मेरी जीस्त के पन्ने पन्ने में तेरी ही रानाई है, कुछ ऐसे ज्यूँ रगों में ख़ून की धारा बहा करती है। एक मर्तबा पहले भी तूने थी ये किताब सजाई, लिखकर अपनी उल्फत की खूबसूरत नज़्म। नीश-ए-फ़िराक़ से घायल हुआ मेरा जिस्मोजां, तेरे तग़ाफ़ुल से जब उजड़ी थी ज़िंदगी की बज़्म। सूखी नहीं …
 
आज हम बात करेंगे लक्षद्वीप के बारे में और आपको देंगे हालही के अपडेट्स। आखिर लक्षद्वीप ड्राफ्ट रेगुलेशन अथॉरिटी अथार्थ LDAR क्यों परेशानी वाली बात है और क्यों ये नियम लागू नहीं होने चाहिए, यह सब आज के एपिसोड में। Host Anjali Tripathi हमारे साथ जुड़े रहें! हमें आपकी समीक्षा और प्रतिक्रिया सुनना पसंद करेंगे ! Instagrahttps://www.instagram.com/naturalis…
 
तुम्हें पता है, क्यूँ तुम्हारी किसी कड़वी बात का मैं बुरा नहीं मानता। क्यूंकि बातें अक्सर अस्थायी होती हैं। बदलती रहती हैं मनोदशा के साथ। सिर्फ बातों का कोई खास मूल्य भी नहीं होता, बातें करने वाले लाख मिल जायेंगे। क्यूंकि बातें करना आसान है, और उतना ही आसान है नकार जाना। बातें अक्सर हवा के झोंके सी आती हैं, और चली जाती हैं। बस छोड़ जाती हैं एक अहसास।…
 
आज के इस एपिसोड में बात होगी बुक्सवाह के जंगलों में मिले हीरों के खदान के बारे में।इस एपिसोड में हम मध्य प्रदेश के छत्तरपुर जिले से लगे इस परियोजना स्थल की जानकारी लेंगे और जानेंगे की कैसे ये परियोजना यहाँ के इकोसिस्टम को हानि पंहुचा सकती है और कैसे इस जगह की जन जीवन के लिए एक दिक्कत पैदा कर सकती है। Host Shikha Pandey हमारे साथ जुड़े रहें! हमें आपक…
 
भारत का सबसे पहला बहुभाषी प्रकृति और संरक्षण पॉडकास्ट। हम लेकर आ रहे है आपके लिए नई खबरें, नई घटनाएं, आधुनिक वैज्ञानिक खोज, नई सरकारी नीतियों के साथ-साथ, विस्मयकारी व्यक्तियों की गाथाएं और वन्य जीव की ढेर सारी कहानियां।द्वारा NaturalisT Foundation
 
माँ तू मुझे सिखा दे, आसमान में उड़ना ओ माँ तू मुझे सिखा दे, आसमान में उड़ना। पंखों में भर जोश मुझे भी, तेज हवा से लड़ना। हर सुबह तू छोड़ के मुझको, दाना लेने जाती है। सर्दी गर्मी में श्रम करके, तू सदैव मुस्काती है। बारिश के मौसम में जब, नीड़ हमारा रिसता है। वन में तू घूम अकेले, तिनका तिनका लाती है। तेरी प्रेरणा से मैं भी चाहूँ, नित ऊँचाई पे चढ़ना। ओ माँ त…
 
।। हिमशिला ।। एक निर्मल निर्झरणी थी तू, कैसे बन गयी हिमशिला । किधर गयी स्नेह की गर्मी, ये पाषाण हृदय था कहाँ मिला। वर्षों पहले जब देखा था, तू चंचल, कल कल बहती थी। जोश भरी, मतवाली होकर, लाखों बातें कहती थी। ऐसा वेग प्रचंड था तेरा, कोई बाधा रोक न पाती थी। तेरी जिजीविषा के सम्मुख, पर्वत चोटी झुक जाती थी। निकट तेरे आकर तो मैं भी, जड़ से चेतन हो जाता था।…
 
कालिदास! सच-सच बतलानाइन्दुमती के मृत्युशोक सेअज रोया या तुम रोये थे?कालिदास! सच-सच बतलाना!शिवजी की तीसरी आँख सेनिकली हुई महाज्वाला मेंघृत-मिश्रित सूखी समिधा-समकामदेव जब भस्म हो गयारति का क्रंदन सुन आँसू सेतुमने ही तो दृग धोये थेकालिदास! सच-सच बतलानारति रोयी या तुम रोये थे?वर्षा ऋतु की स्निग्ध भूमिकाप्रथम दिवस आषाढ़ मास कादेख गगन में श्याम घन-घटाविध…
 
आज मैं आपके सामने न तो कोई अपनी कविता लाया हूँ और न ही किसी प्रसिद्ध कवि की। पर ये कवितायेँ मुझे अति प्रिय हैं क्यूंकि ये कवितायें मेरी आँखों के दो तारों के पहली कवितायें हैं जो उन्होने कुछ दिन पहले लिखी और अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड कीं। आपका आशीर्वाद और प्रोत्साहन इन्हें और आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। --- Send in a voice message: https://anchor.fm/vivek…
 
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