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छोटी कहानियाँ सार्वजनिक
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सबसे अच्छा छोटी कहानियाँ पॉडकास्ट हम पा सकते हैं (अपडेट किया गया दिसंबर 2019)
सबसे अच्छा छोटी कहानियाँ पॉडकास्ट हम पा सकते हैं
अपडेट किया गया दिसंबर 2019
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K
Kahani Suno
साप्ताहिक
 
Welcome to the great world of greatest stories.Narrated by Sameer Goswami
 
Hindi Stories podcast hosted by Piyush Agarwal. Listen to new and old stories in Hindi.
 
D
Dadinani Ki Kahaniyaan
मासिक+
 
Podcast by Indu Dahiya
 
R
REDFM Short Cuts
मासिक
 
Short Cuts
 
बादशाह अकबर एक महान मुगल सम्राट है जो एक बार शिकार खेलते हुए जंगल में भटक गए थे। तब महेशदास नामक व्यक्ति ने उन्हें रास्ता दिखाया। बादशाह उससे बहुत प्रभावित हुए और उसे अपने महल में बुलाकर अपने नवरत्नों में शामिल कर लिया। अकबर ने महेश दास को राजा बीरबल नाम दिया। अकबर बीरबल के किस्से बहुत मशहूर हुए क्योंकि बड़ी बड़ी परेशानियाँ अपनी बुद्धि के बल पर बीरबल छोटी छोटी तरकीबों से मजेदार ढंग से सुलझा देते थे। ये किस्से कहानियाँ अकबर बीरबल, राज परिवार और दरबारियों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। बीरबल हमेशा ...
 
सिंहासन बत्तीसी (संस्कृत:सिंहासन द्वात्रिंशिका, विक्रमचरित) एक लोककथा संग्रह है। प्रजा से प्रेम करने वाले,न्याय प्रिय, जननायक, प्रयोगवादी एवं दूरदर्शी महाराजा विक्रमादित्य भारतीय लोककथाओं के एक बहुत ही चर्चित पात्र रहे हैं। उनके इन अद्भुत गुणों का बखान करती अनेक कथाएं हम बचपन से ही पढ़ते आए हैं। सिंहासन बत्तीसी भी ऐसी ही ३२ कथाओं का संग्रह है जिसमें ३२ पुतलियाँ विक्रमादित्य के विभिन्न गुणों का कहानी के रूप में वर्णन करती हैं।
 
Stories of Panchtantra पंचतंत्र की कहानियाँ
 
*बेताल पचीसी *राजा विक्रम और एक बेताल की कहानियों की शृंखला है बेताल पच्चीसी।पेड़ पर लटके हुए एक बेताल को एक योगी तक पहुँचाना था राजा विक्रम को। राजा उस बेताल को अपनी पीठ पर लादकर ले जाने लगा। बेताल ने कहा राजा मैं तुझे एक कहानी सुनाऊंगा, पर शर्त ये है कि तुझे चुप रहना है। अगर तू बोला तो मैं वापिस पेड़ पर चला जाऊँगा। बेताल ने कहानी सुनकर विक्रम से एक सवाल किया, राजा ने जवाब दे दिया तो बेताल वापिस पेड़ पर जा लटका। राजा फिर उसको लेकर चला फिर एक कहानी, फिर एक सवाल, हर सवाल का राजा दे देता जवाब...ब ...
 
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show series
 
युवक के आत्मोत्सर्ग और अंग्रेज़ों के अत्याचार का वर्णनद्वारा Sameer Goswami
 
एक नवयुवक के आदर्शों और पत्नI द्वारा समझाइश का वर्णनद्वारा Sameer Goswami
 
शालेय शुल्क के लिये परेशान किशोर के स्वाभिमान का वर्णनद्वारा Sameer Goswami
 
एक संपन्न व्यक्ति के पुनर्विवाह पश्चात पुत्र के दूर जाने का वर्णनद्वारा Sameer Goswami
 
एक मातृ स्नेह से वंचित किशोर की शिक्षा के संघर्ष का वर्णनद्वारा Sameer Goswami
 
Stories have great power in showing the world its true mirror. Jamun ka Ped is one suck story that throws light on the broken government systems and the tendency of passing the buck. The story was recently removed from ICSE Hindi Syllabus in 2019 because a particular state protested. Following the mission of making sure no stories get lost, Piy ...…
 
This is a Children's Day special episode of 'Kahani Jaani Anjaani' by Piyush Agarwal. In this episode, we invite a guest, Bimal Kumar Sethia to share a story with us from the lands of Rajasthan. This is the story that has been narrated across generations. I could not find the actual author of this story but could find various versions similar t ...…
 
लेखक - अंतोन चेख़व Writer - Anton Chekhov अनुवाद - अनिल जनविजय Translation - Anil Janvijay वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
लेखक - अंतोन चेख़व Writer - Anton Chekhov अनुवाद - अनिल जनविजय Translation - Anil Janvijay वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
लेखक - अंतोन चेख़व Writer - Anton Chekhov अनुवाद - अनिल जनविजय Translation - Anil Janvijay वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
लेखक - अंतोन चेख़व Writer - Anton Chekhov अनुवाद - अनिल जनविजय Translation - Anil Janvijay वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
लेखक - अंतोन चेख़व Writer - Anton Chekhov अनुवाद - अनिल जनविजय Translation - Anil Janvijay वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
लेखक - अंतोन चेख़व Writer - Anton Chekhov अनुवाद - अनिल जनविजय Translation - Anil Janvijay वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
रानी रुपवती बत्तीसवीं पुतली रानी रुपवती ने राजा भोज को सिंहासन पर बैठने की कोई रुचि नहीं दिखाते देखा तो उसे अचरज हुआ। उसने जानना चाहा कि राजा भोज में आज पहले वाली व्यग्रता क्यों नहीं है। राजा भोज ने कहा कि राजा विक्रमादित्य के देवताओं वाले गुणों की कथाएँ सुनकर उन्हें ऐसा लगा कि इतनी विशेषताएँ एक मनुष्य में असम्भव हैं और मानते हैं कि उनमें बहुत ...…
 
लेखक - ओ॰ हेनरी Writer - O Henry वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
लेखक - लियो टॉल्स्टॉय Writer - Leo Tolstoy स्वर - शैलेन्द्र सिंह, Narration - Shailendra Singhद्वारा Sameer Goswami
 
लेखक - ओ॰ हेनरी Writer - O Henry वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
लेखक - ओ॰ हेनरी Writer - O Henry वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
कहानी - कमज़ोर Story - Kamzor लेखक - अंतोन चेख़व Writer - Anton Chekhov अनुवाद - अनिल जनविजय Translation - Anil Janvijay वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
कहानी - एक छोटा सा मज़ाक़ Story - Ek Chhota Sa Mazaaq लेखक - अंतोन चेख़व Writer - Anton Chekhov अनुवाद - अनिल जनविजय Translation - Anil Janvijay वाचन - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswamiद्वारा Sameer Goswami
 
एक बहू पशु-पक्षियों की भाषा जानती थी। आधी रात को श्रृगाल को यह कहता सुनकर कि नदी का मुर्दा मुझे दे दे और उसके गहने ले ले, नदी पर वैसा करने गई। लौटती बार श्वसुर ने देख लिया। जाना कि यह अ-सती है। वह उसे पीहर पँहुचाने ले चला। मार्ग में करीर के पेड़ के पास से कौआ कहने लगा कि इस पेड़ के नीचे दस लाख की निधि है, निकाल ले और मुझे दही-सत्तू खिला। अपनी व ...…
 
एक कहिल नामक कबाड़ी था, जो काठ की कावड़ कंधे पर लिए-लिए फिरता था। उसकी सिंहला नामक स्त्री थी। उसने पति से कहा कि देवाधिदेव-युगादिदेव की पूजा करो, जिनसे जन्मांतर में दारिद्रय-दुख न पावें। पति ने कहा-- तू धर्म-गहली (पगली) हुई है, पर सेवक मैं क्या कर सकता हूँ? तब स्त्री ने नदी-जल और फूल से पूजा की। उसी दिन वह विषूचिका (हैजा) से मर गई और जन्मांतर म ...…
 
दादी नानी की कहानियाँ Dadi Nani\'s audio stories. Tales told in Hindi for my grandchildren and for kids all over the world who can understand our lovely language.द्वारा Indu Dahiya
 
दिल्ली में अनंगपाल नामी एक बड़ा राय था। उसके महल के द्वार पर पत्थर के दो सिंह थे। इन सिंहों के पास उसने एक घंटी लगवाई कि जो न्याय चाहें उसे बजा दें, जिस पर राय उसे बुलाता, पुकार सुनता और न्याय करता। एक दिन एक कौआ आकर घंटी पर बैठा और घंटी बजाने लगा। राय ने पूछा-- इसकी क्या पुकार है? यह बात अनजानी नहीं है कि कौए सिंह के दाँतों में से माँस निकाल ल ...…
 
पाठशाला का वार्षिकोत्सव था। मैं भी वहाँ बुलाया गया था। वहाँ के प्रधान अध्यापक का एकमात्र पुत्र, जिसकी अवस्था आठ वर्ष की थी, बड़े लाड़ से नुमाइश में मिस्टर हादी के कोल्हू की तरह दिखाया जा रहा था। उसका मुँह पीला था, आँखें सफ़ेद थीं, दृष्टि भूमि से उठती नहीं थी। प्रश्न पूछे जा रहे थे। उनका वह उत्तर दे रहा था। धर्म के दस लक्षण सुना गया, नौ रसों के ...…
 
आज सवेरे ही से गुलाबदेई काम में लगी हुई है। उसने अपने मिट्टी के घर के आँगन को गोबर से लीपा है, उस पर पीसे हुए चावल से मंडन माँडे हैं। घर की देहली पर उसी चावल के आटे से लीकें खैंची हैं और उन पर अक्षत और बिल्‍वपत्र रक्‍खे हैं। दूब की नौ डालियाँ चुन कर उनने लाल डोरा बाँध कर उसकी कुलदेवी बनाई है और हर एक पत्ते के दूने में चावल भर कर उसे अंदर के घर ...…
 
रघुनाथ प् प् प्रसाद त् त् त्रिवेदी - या रुग्‍नात् पर्शाद तिर्वेदी - यह क्‍या? क्‍या करें, दुविधा में जान हैं। एक ओर तो हिंदी का यह गौरवपूर्ण दावा है कि इसमें जैसा बोला जाता है वैसा लिखा जाता है और जैसा लिखा जाता है वैसा ही बोला जाता है। दूसरी ओर हिंदी के कर्णधारों का अविगत शिष्‍टाचार है कि जैसे धर्मोपदेशक कहते हैं कि हमारे कहने पर चलो, वैसे ही ...…
 
परीक्षा देने के पीछे और उसके फल निकलने के पहले दिन किस बुरी तरह बीतते हैं, यह उन्हीं को मालूम है जिन्हें उन्हें गिनने का अनुभव हुआ है। सुबह उठते ही परीक्षा से आज तक कितने दिन गए, यह गिनते हैं और फिर 'कहावती आठ हफ्ते' में कितने दिन घटते हैं, यह गिनते हैं। कभी-कभी उन आठ हफ्तों पर कितने दिन चढ़ गए, यह भी गिनना पड़ता है। खाने बैठे है और डाकिए के पै ...…
 
सायंकाल हुआ ही चाहता है। जिस प्रकार पक्षी अपना आराम का समय आया देख अपने-अपने खेतों का सहारा ले रहे हैं उसी प्रकार हिंस्र श्‍वापद भी अपनी अव्याहत गति समझ कर कंदराओं से निकलने लगे हैं। भगवान सूर्य प्रकृति को अपना मुख फिर एक बार दिखा कर निद्रा के लिए करवट लेने वाले ही थे, कि सारी अरण्यानी 'मारा' है, बचाओ, मारा है' की कातर ध्वनि से पूर्ण हो गई। माल ...…
 
एक मनुष्य को कहीं जाना था। उसने अपने पैरों से उपजाऊ भूमि को बंध्या करके पगडंडी काटी और वह वहाँ पर पहला पहुँचने वाला हुआ। दूसरे, तीसरे और चौथे ने वास्तव में उस पगडंडी को चौड़ी किया और कुछ वर्षों तक यों ही लगातार जाते रहने से वह पगडंडी चौड़ा राजमार्ग बन गई, उस पर पत्थर या संगमरमर तक बिछा दिया गया, और कभी-कभी उस पर छिड़काव भी होने लगा। वह पहला मनु ...…
 
देव-मन्दिर के सिंहद्वार से कुछ दूर हट कर वह छोटी-सी दुकान थी। सुपारी के घने कुञ्ज के नीचे एक मैले कपड़े पर सूखी हुई धार में तीन-चार केले, चार कच्चे पपीते, दो हरे नारियल और छ: अण्डे थे। मन्दिर से दर्शन करके लौटते हुए भक्त लोग दोनों पट्टी में सजी हुई हरी-भरी दुकानों को देखकर उसकी ओर ध्यान देने की आवश्यकता ही नहीं समझते थे। अर्द्ध-नग्न वृद्धा दूका ...…
 
मन्दाकिनी के तट पर रमणीक भवन में स्कन्द और गणेश अपने-अपने वाहनों पर टहल रहे हैं। नारद भगवान् ने अपनी वीणा को कलह-राग में बजाते-बजाते उस कानन को पवित्र किया, अभिवादन के उपरान्त स्कन्द, गणेश और नारद में वार्ता होने लगी। नारद-(स्कन्द से) आप बुद्धि-स्वामी गणेश के साथ रहते हैं, यह अच्छी बात है, (फिर गणेश से) और देव-सेनापति कुमार के साथ घूमते हैं, इस ...…
 
सदानीरा अपनी गम्भीर गति से, उस घने साल के जंगल से कतरा कर चली जा रही है। सालों की श्यामल छाया उसके जल को और भी नीला बना रही है; परन्तु वह इस छायादान को अपनी छोटी-छोटी वीचियों से मुस्कुरा कर टाल देती है। उसे तो ज्योत्सना से खेलना है। चैत की मतवाली चाँदनी परिमल से लदी थी। उसके वैभव की यह उदारता थी कि उसकी कुछ किरणों को जंगल के किनारे की फूस की झो ...…
 
दादी नानी की कहानियाँ Dadi Nani\'s audio stories. Tales told in Hindi for my grandchildren and for kids all over the world who can understand our lovely language.द्वारा Indu Dahiya
 
दादी नानी की कहानियाँ Dadi Nani\'s audio stories. Tales told in Hindi for my grandchildren and for kids all over the world who can understand our lovely language.द्वारा Indu Dahiya
 
नवीन कोमल किसलयों से लदे वृक्षों से हरा-भरा तपोवन वास्तव में शान्ति-निकेतन का मनोहर आकार धारण किये हुए है, चञ्चल पवन कुसुमसौरभ से दिगन्त को परिपूर्ण कर रहा है; किन्तु, आनन्दमय वशिष्ठ भगवान् अपने गम्भीर मुखमण्डल की गम्भीरमयी प्रभा से अग्निहोत्र-शाला को आलोकमय किये तथा ध्यान में नेत्र बन्द किये हुए बैठे हैं। प्रशान्त महासागर में सोते हुए मत्स्यरा ...…
 
चन्द्रदेव ने एक दिन इस जनाकीर्ण संसार में अपने को अकस्मात् ही समाज के लिए अत्यन्त आवश्यक मनुष्य समझ लिया और समाज भी उसकी आवश्यकता का अनुभव करने लगा। छोटे-से उपनगर में, प्रयाग विश्वविद्यालय से लौटकर, जब उसने अपनी ज्ञान-गरिमा का प्रभाव, वहाँ के सीधे-सादे निवासियों पर डाला, तो लोग आश्चर्य-चकित होकर सम्भ्रम से उसकी ओर देखने लगे, जैसे कोई जौहरी हीरा ...…
 
श्चिमोत्तर सीमाप्रान्त में एक छोटी-सी नदी के किनारे, पहाड़ियों से घिरे हुए उस छोटे-से गाँव पर, सन्ध्या अपनी धुँधली चादर डाल चुकी थी। प्रेमकुमारी वासुदेव के निमित्त पीपल के नीचे दीपदान करने पहुँची। आर्य-संस्कृति में अश्वत्थ की वह मर्यादा अनार्य-धर्म के प्रचार के बाद भी उस प्रान्त में बची थी, जिसमें अश्वत्थ चैत्य-वृक्ष या वासुदेव का आवास समझकर पू ...…
 
प्रकृति तब भी अपने निर्माण और विनाश में हँसती और रोती थी। पृथ्वी का पुरातन पर्वत विन्ध्य उसकी सृष्टि के विकास में सहायक था। प्राणियों का सञ्चार उसकी गम्भीर हरियाली में बहुत धीरे-धीरे हो रहा था। मनुष्यों ने अपने हाथों की पृथ्वी से उठाकर अपने पैरों पर खड़े होने की सूचना दे दी थी। जीवन-देवता की आशीर्वाद-रश्मि उन्हें आलोक में आने के लिए आमन्त्रित क ...…
 
चौड़ (चैड़, चोल या गौड़) देश में गोवर्धन नामक राजा के यहाँ सभामंडप के सामने लोहे के स्तम्भ पर न्याय घंटा था, जिसे न्याय चाहने वाला बजा दिया करता। एक समय उसके एकमात्र पुत्र ने रथ पर चढ़कर जाते समय जान-बूझकर एक बछड़े को कुचल दिया। बछड़े की माता (गौ) ने सींग अड़ाकर घंटा बजा दिया। राजा ने सब हाल पूछकर अपने न्याय को कोटि पर पहुँचाना चाहा। दूसरे दिन ...…
 
गाँव के बाहर, एक छोटे-से बंजर में कंजरों का दल पड़ा था। उस परिवार में टट्टू, भैंसे और कुत्तों को मिलाकर इक्कीस प्राणी थे। उसका सरदार मैकू, लम्बी-चौड़ी हड्डियोंवाला एक अधेड़ पुरुष था। दया-माया उसके पास फटकने नहीं पाती थी। उसकी घनी दाढ़ी और मूँछों के भीतर प्रसन्नता की हँसी छिपी ही रह जाती। गाँव में भीख माँगने के लिए जब कंजरों की स्त्रियाँ जातीं, ...…
 
दो-तीन रेखाएँ भाल पर, काली पुतलियों के समीप मोटी और काली बरौनियों का घेरा, घनी आपस में मिली रहने वाली भवें और नासा-पुट के नीचे हलकी-हलकी हरियाली उस तापसी के गोरे मुँह पर सबल अभिव्यक्ति की प्रेरणा प्रगट करती थी। यौवन, काषाय से कहीं छिप सकता है? संसार को दु:खपूर्ण समझकर ही तो वह संघ की शरण में आयी थी। उसके आशापूर्ण हृदय पर कितनी ही ठोकरें लगी थीं ...…
 
नूरी ''ऐ; तुम कौन? ''......'' ''बोलते नहीं?'' ''......'' ''तो मैं बुलाऊँ किसी को-'' कहते हुए उसने छोटा-सा मुँह खोला ही था कि युवक ने एक हाथ उसके मुँह पर रखकर उसे दूसरे हाथ से दबा लिया। वह विवश होकर चुप हो गयी। और भी, आज पहला ही अवसर था, जब उसने केसर, कस्तूरी और अम्बर से बसा हुआ यौवनपूर्ण उद्वेलित आलिंगन पाया था। उधर किरणें भी पवन के एक झोंके के ...…
 
दादी नानी की कहानियाँ Dadi Nani\'s audio stories. Tales told in Hindi for my grandchildren and for kids all over the world who can understand our lovely language.द्वारा Indu Dahiya
 
मैं ‘संगमहाल’ का कर्मचारी था। उन दिनों मुझे विन्ध्य शैल-माला के एक उजाड़ स्थान में सरकारी काम से जाना पड़ा। भयानक वन-खण्ड के बीच, पहाड़ी से हटकर एक छोटी-सी डाक बँगलिया थी। मैं उसी में ठहरा था। वहीं की एक पहाड़ी में एक प्रकार का रंगीन पत्थर निकला था। मैं उनकी जाँच करने और तब तक पत्थर की कटाई बन्द करने के लिए वहाँ गया था। उस झाड़-खण्ड में छोटी-सी ...…
 
खपरल दालान में, कम्बल पर मिन्ना के साथ बैठा हुआ ब्रजराज मन लगाकर बातें कर रहा था। सामने ताल में कमल खिल रहे थे। उस पर से भीनी-भीनी महक लिये हुए पवन धीरे-धीरे उस झोपड़ी में आता और चला जाता था। ‘‘माँ कहती थी ...’’, मिन्ना ने कमल की केसरों को बिखराते हुए कहा। ‘‘क्या कहती थी?’’ ‘‘बाबूजी परदेश जायँगे। तेरे लिये नैपाली टट्टू लायँगे।’’ ‘‘तू घोड़े पर च ...…
 
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