Download the App!

show episodes
 
हिन्दी भक्ति गीत, भजन, कीर्तन, आरती, चालीसा - शब्द एवं गान : bhajans.ramparivar.com Hindi Bhakti Geet, Bhajan, Kirtan, Arati and Chalisa with MP3 audio and youtube video (written/composed/sung by and favorites of Shri Ram Parivar - our family and friends)
 
"हमेशा याद रखें, जो भी मैं आपसे कहता हूं, आप इसे दो तरीकों से ले सकते हैं। आप इसे बस मेरे अधिकार पर ले जा सकते हैं, 'क्योंकि ओशो ऐसा कहते हैं, यह सच होना चाहिए' - तब आप पीड़ित होंगे, तब आप नहीं बढ़ेंगे। "मैं जो भी कहता हूं, उसे सुनो, इसे समझने की कोशिश करो, इसे अपने जीवन में लागू करो, देखो कि यह कैसे काम करता है, और फिर अपने निष्कर्ष पर आओ। वे वही हो सकते हैं, वे नहीं भी हो सकते हैं। वे कभी भी समान नहीं हो सकते क्योंकि आपके पास एक अलग व्यक्तित्व है, एक अद्वितीय व्यक्ति है। ” Visit: https://l ...
 
Loading …
show series
 
ध्यान साधना शिविर में ध्यान-प्रयोगों एवं प्रश्नोत्तर सहित ओशो द्वारा दिए गएअमृत प्रवचनों का अपूर्व संकलन.
 
ध्यान साधना शिविर में ध्यान-प्रयोगों एवं प्रश्नोत्तर सहित ओशो द्वारा दिए गए अमृत प्रवचनों का अपूर्व संकलन. प्रस्तुयत प्रवचनों के माध्य्म से हम ध्यान की जिस भावदशा में प्रविष्टत हो सकते हैं उसकी पूर्व तैयारी के लिए ओशो हमें ध्यातन के कुछ ऐसे प्रयोगों में उतारते हैं जिन्हें करने के पश्चात हम विश्रांति की झील बन जाते हैं ।…
 
साधना के जगत में सहज प्रवेश के अत्यंत सरल सूत्र देते हुए ओशो कहते हैं : ‘सुबह जब आखिरी तारे डूबते हों, तब हाथ जोड़ कर उन तारों के पास बैठ जाएं और उन तारों को डूबते हुए, मिस्ट्री में खोते हुए देखते रहें। और आपके भीतर भी कुछ डूबेगा, आपके भीतर भी कुछ गहरा होगा। सुबह के उगते हुए सूरज को देखते रहें। कुछ न करें, सिर्फ देखते रहें। उगने दें। उधर सूरज उगेगा…
 
"विचार एक दिशा है। विचार से कोई पंडित हो सकता है, प्रज्ञा को उपलब्ध नहीं। ध्यान एक दशा है, ध्यान एक दिशा है। ध्यान से कोई विचार को उपलब्ध नहीं होता, लेकिन प्रज्ञा को और ज्ञान को उपलब्ध होता है। इस समय सारी दुनिया और सारी मनुष्य-जाति विचार से पीड़ित है।"
 
आपने कब और किसको, कौनसी बात, कैसे बतानी चाहिए, इस सवाल का जवाब, आज हम आपको बतायेंगे। Share your reviews on our Social Media handles. Facebook: https://www.facebook.com/areysuniyetoh Instagram: https://www.instagram.com/areysuniyetoh/ Twitter: https://twitter.com/areysuniyetoh Youtube: https://youtu.be/tMOhHGrvyik…
 
जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रश्नोत्तर सहित ओशो द्वारा दिए गए प्रवचन। "आनंद मनुष्य का अपने चैतन्य में स्थित होने का नाम है। सुख मिलता है, दुख मिलता है, आनंद मिलता नहीं है। आनंद मौजूद है, केवल जानना होता है। सुख को पाना होता है, दुख को पाना होता है। आनंद को पाना नहीं होता, केवल आविष्कार करना होता है, डिस्कवरी करनी होती है।"…
 
खुद को तलाशना क्यूँ जरूरी है? इस सवाल का जवाब, आज हमारी बातों के जरिए हम आपको बतायेंगे। Share your reviews on our Social Media handles. Facebook: https://www.facebook.com/areysuniyetoh Instagram: https://www.instagram.com/areysuniyetoh/ Twitter: https://twitter.com/areysuniyetoh Youtube: https://youtu.be/FfQklsdww8s…
 
"मेरी दृष्टि में तो भारत के विचार की शक्ति खो गई है; भारत के पास विचार की ऊर्जा नष्ट हो गई है। भारत ने हजारों साल से सोचना बंद कर दिया है। भारत सोचता ही नहीं है। यह इतना बड़ा पत्थर भारत के प्राणों पर है कि अगर कुछ हजार लोग अपने सारे जीवन को लगा कर इस पत्थर को हटा दें, तो भारत का जितना हित हो सकता है, उतना ये तथाकथित रचनात्मक कहे जाने वाले कामों से …
 
दीपक बारा नाम का! इसे यूं पढ़ना: शून्य का दिया जलाया। शब्दातीत, शास्त्रातीत, अनिवर्चनीय, समाधि का दीया जलाया। न वहां कुछ कहने को है, न कुछ समझने को है, न कुछ सुनने को है; वहां गहन मौन है, समग्र मौन है। जरा भी चहल-पहल नहीं। जरा भी शोरगुल नहीं। झेन फकीर उस अवस्था को कहते हैं एक हाथ से बजाई गई ताली। दो हाथ से बजाओगे तो आवाज होगी। एक हाथ से ताली बजती ह…
 
बातें कल भी थी, बातें आज भी हैं, और बातें हमेशा रहेगी, बस! उसको लोगों तक पहुँचाने के तरीके बदलते रहेंगे, इसीलिए आप सबके लिए हम लेकर आए हैं, "अरे, सुनिये तो" Podcast, शब्द अम्बर के, बोल दीपाली के! Share your reviews on our Social Media handles. Facebook: https://www.facebook.com/areysuniyetoh Instagram: https://www.instagram.com/areysuniyetoh/ Twitt…
 
विचार समझ से महत्वपूर्ण हो गए हैं, क्योंकि बहुत ममत्व हमने उनको दिया है। इस ममत्व को एकदम तोड़ देना जरूरी है। और तोड़ना कठिन नहीं है, क्योंकि यह बिलकुल काल्पनिक है। यह जंजीर कहीं है नहीं, केवल कल्पना में है। विचार के प्रति ममत्व का त्याग जरूरी है। पहली बात: विचार के प्रति अपरिग्रह का बोध। दूसरी बात: विचार के प्रति ममत्व का त्याग। और तीसरी बात: विचा…
 
‘देश भर में घूमते हुए दिए गए इन प्रवचनों के संकलन में ओशो भारत की आत्मा को झकझोरते हुए उसे विचार और व्यवहार के संकुचन से बाहर निकलकर एक विराट आकाश को छू लेने का आमंत्रण देते हैं। युवा होने का अर्थ क्या है? कैसे युवा हों? क्या चमत्कारों में कोई अध्यात्म है? ऊब क्या है? जीवन को नित-नया कैसे करें? कैसे हों ऊर्जावान मुक्त-मन?…
 
बिन धन परत फुहार’—यह वार्तामाला एक नई ही यात्रा होगी। मैं अब तम मुक्तपुरुषों पर बोला हूं। पहली बार एक मुक्तनारी पर चर्चा शुरू करता हूं। मुक्तपुरुषों पर बोलना आसान था। उन्हें मैं समझ सकता हूं—वे सजातीय हैं। मुक्तनारी पर बोलना थोड़ा कठिन होगा—वह थोड़ा अजनबी रास्ता है। ऐसे तो पुरुष और नारी अंतरतम में एक हैं, लेकिन उनकी अभिव्यक्तियां बड़ी भिन्न-भिन्न ह…
 
जवान आदमी भविष्य की तरफ देखता है। और जो कौम भविष्य की तरफ देखती है वह जवान होती है। जो अतीत की तरफ, पीछे की तरफ देखती है, वह बूढ़ी हो जाती है। यह हमारा मुल्क सैकड़ों वर्षों से पीछे की तरफ देखने का आदी रहा है। हम सदा ही पीछे की तरफ देखते हैं; जैसे भविष्य है ही नहीं, जैसे कल होने वाला नहीं है। जो बीत गया कल है वही सब-कुछ है। यह जो हमारी दृष्टि है यह …
 
घड़ी दो घड़ी चौबीस घंटे में चुप बैठे रहो, कुछ न करो - बस शून्यवत! और उसी शून्य में धीरे-धीरे भीतर की शमा प्रकट होने लगेगी, धुआं कट जाएगा। और जिस दिन भीतर का धुआं कटता है, आंखें स्पष्ट देखने में समर्थ हो जाती हैं—उस दिन तुम परमात्मा हो, सारा अस्तित्व परमात्मा है। और वह अनुभूति आनंद है, मुक्ति है, निर्वाण है।…
 
गांधी कोई कागजी महापुरुष नहीं हैं कि आलोचना की वर्षा आएगी और उनका रंग-रोगन बह जाएगा। कुछ कागजी महापुरुष होते हैं उन्हें आलोचना से बचाया जाना चाहिए, क्योंकि वे आलोचना में खड़े नहीं रह सकते हैं। भारत की समस्‍याओं से जुड़े ओशो के विचार।
 
स्वतंत्रता विद्रोह नहीं है, क्रांति है। क्रांति की बात ही अलग है। क्रांति का अर्थ है: दूसरे से कोई प्रयोजन नहीं है। हम किसी के विरोध में स्वतंत्र नहीं हो रहे हैं। क्योंकि विरोध में हम स्वतंत्र होंगे, तो वह स्वच्छंदता हो जाएगी। हम दूसरे से मुक्त हो रहे हैं--न उससे हमें विरोध है, न हमें उसका अनुगमन है। न हम उसके शत्रु हैं, न हम उसके मित्र हैं--हम उसस…
 
ओशो की अस्तित्‍वगत् झलक की तीव्र अनुभूति भी इस संकलन से मिलेगी। निराकार अस्तित्‍व की साकार प्रतिमा दर्शन की अनुभूति भी आपको होगी। जो सहज ही आपको द्रष्‍टा भाव, साक्षी भाव और यथार्थता में उतार देगी।
 
"हम सब आनंद चाहते हैं, हम सब शांति चाहते हैं, हम सब तृप्ति चाहते हैं। लेकिन हम खोजते हैं बाहर। वहीं भूल है। खोजना है भीतर, टटोलना है अपने में – अपने माहिं टटोल। अगर हम भीतर जागकर देख सकें तो वहां जो है वही परमात्मा है, वही मोक्ष है, वही निर्वाण है। फिर उसे कोई कोई नाम दे दे, इससे कोई भेद नहीं पड़ता। वहां जो है वही परम आनंद है, वही परम सत्य है।"…
 
Loading …

त्वरित संदर्भ मार्गदर्शिका

Google login Twitter login Classic login